अब 'जेल से सरकार' का खेल खत्म! गिरफ्तार PM-CM को 30 दिन में देना होगा इस्तीफा, संसद में पेश हुआ ऐतिहासिक बिल
भारतीय राजनीति में "नैतिकता" और "आपराधिक पृष्ठभूमि" के बीच की धुंधली रेखा पर अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक 'सर्जिकल स्ट्राइक' होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में एक ऐसा ऐतिहासिक विधेयक (Bill) पेश किया है, जो अगर कानून बन गया तो यह देश में 'जेल से सरकार' चलाने की किसी भी संभावना को हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त कर देगा। इस नए प्रस्तावित कानून के अनुसार, अगर प्रधानमंत्री, कोई मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है और 30 दिनों से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में रहता है, तो उसे अपने पद सेअनिवार्य रूप से इस्तीफा देना होगा।
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किया गया यह बिल, हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद छिड़ी राष्ट्रीय बहस का सीधा परिणाम माना जा रहा है। इस बिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग कानून से ऊपर नहीं हैं और आपराधिक आरोपों के चलते शासन व्यवस्था प्रभावित न हो।
क्यों पड़ी इस 'क्रांतिकारी' कानून की ज़रूरत?
भारतीय संविधान में अब तक इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी कि अगर कोई मुख्यमंत्री या मंत्री गिरफ्तार हो जाता ਹੈ तो उसे कितने दिनों में इस्तीफा देना होगा।
- केजरीवाल और सोरेन का मामला: हाल ही में, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन, दोनों को ही भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। हेमंत सोरेन ने तो गिरफ्तारी से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया, लेकिन अरविंद केजरीवाल है इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और कई हफ्तों तक जेल से ही दिल्ली सरकार चलाने का प्रयास किया।
- संवैधानिक संकट: इस घटना ने एक बड़ा संवैधानिक और नैतिक संकट खड़ा कर दिया। सवाल उठने लगे कि क्या कोई व्यक्ति जेल की सलाखों के पीछे से एक राज्य का शासन प्रभावी रूप से चला सकता है? क्या यह शासन की गोपनीयता और शुचिता का उल्लंघन नहीं है?
इसी "Grey Area" यानी कानूनी अस्पष्टता को खत्म करने के लिए सरकार यह नया बिल लेकर आई है।
क्या हैं इस नए बिल के मुख्य प्रावधान?
यह बिल सीधे तौर पर देश के शीर्ष कार्यकारी पदों की जवाबदेही तय करता है।
बिल के अनुसार:
- 30 दिन की सीमा: अगर प्रधानमंत्री, कोई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, या कोई राज्य का मंत्री किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के बाद 30 दिनों से ज़्यादा न्यायिक हिरासत में रहता है...
- अनिवार्य इस्तीफा: तो उसे अपने पद सेइस्तीफा देना अनिवार्य हो जाएगा।
- कैसे लागू होगा?: 30 दिन की अवधि पूरी होते ही, यह कानून स्वतः लागू हो जाएगा और संबंधित व्यक्ति को पद छोड़ना ही पड़ेगा।
यह नियम विधायकों या सांसदों पर उनकी सदस्यता के संबंध में लागू नहीं होगा, बल्कि केवल मंत्री पदों पर बैठे लोगों पर लागू होगा।
विपक्ष का रुख और संभावित राजनीतिक तूफान
सरकार इस बिल को राजनीति में शुचिता लाने वाला एक मास्टरस्ट्रोक बता रही है।
- सरकार का तर्क: बीजेपी का कहना है कि यह कानून भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का एक हिस्सा है और यह सुनिश्चित करेगा कि कानून का सामना कर रहे लोग सत्ता का दुरुपयोग न कर सकें।
हालांकि, विपक्षी दल इस बिल को 'राजनीतिक प्रतिशोध' के एक हथियार के रूप में देख रहे हैं।
- विपक्ष का आरोप: विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार इस कानून का इस्तेमाल अपनी जांच एजेंसियों (जैसे ED, CBI) के माध्यम से विपक्षी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को झूठे मामलों में फंसाकर, 30 दिनों तक जेल में रखकर, उनकी सरकारें गिराने के लिए कर सकती है।
- संघीय ढांचे पर हमला: कुछ दलों का यह भी कहना है कि यह राज्यों के अधिकारों और देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) पर भी एक हमला ਹੈ।
यह तय है कि जब यह बिल संसद में बहस के लिए आएगा, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिलेगा।
भारतीय राजनीति पर इसका दूरगामी असर
यह कानून अगर पास हो जाता है, तो इसके भारतीय राजनीति पर कई गहरे और दूरगामी असर होंगे:
- नेताओं में डर: आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने वाले नेताओं के मन में कानून का डर बढ़ेगा।
- राजनीति का अपराधीकरण कम होगा: यह कानून राजनीति के अपराधीकरण पर लगाम लगाने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
- नई बहस की शुरुआत: यह इस बहस को भी जन्म देगा कि क्या इसी तरह का कोई नियम आपराधिक मामलों में दोषी करार दिए गए विधायकों और सांसदों पर भी चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध के रूप में लागू होना चाहिए।
कुल मिलाकर, यह बिल भारतीय लोकतंत्र में जवाबदेही और नैतिकता के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता ਹੈ, लेकिन इसके संभावित दुरुपयोग की आशंकाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।