सारा अली खान को अब केदारनाथ जाने के लिए देना होगा हलफनामा? जानें क्या है नियम और क्यों बढ़ी अभिनेत्री की मुश्किल
News India Live, Digital Desk : बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान (Sara Ali Khan), जो खुद को 'केदारनाथ की बेटी' मानती हैं और अक्सर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए उत्तराखंड के पहाड़ों में नजर आती हैं, अब एक नए कानूनी फेर में फंसती दिख रही हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब सारा अली खान को केदारनाथ धाम की यात्रा करने के लिए एक शपथ पत्र (Affidavit) जमा करना पड़ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा माजरा क्या है और प्रशासन ने यह कदम क्यों उठाया है।
क्या है पूरा मामला? विवाद की जड़
केदारनाथ में पिछले कुछ समय से वीआईपी (VIP) मूवमेंट और रील बनाने वालों की वजह से मंदिर की मर्यादा और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे थे। सारा अली खान अक्सर अपनी यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करती हैं, जिसे लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने कुछ आपत्तियां जताई थीं।
शपथ पत्र की जरूरत क्यों? (3 मुख्य कारण):
मर्यादा का पालन: प्रशासन चाहता है कि सेलिब्रिटीज यह लिखित में दें कि वे मंदिर परिसर के भीतर कोई भी ऐसी गतिविधि या रील नहीं बनाएंगे जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण: वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल तैयार किया गया है।
निजी फोटोग्राफी पर रोक: मंदिर के गर्भगृह और मुख्य परिसर में कैमरा वर्जित है, और शपथ पत्र के जरिए हस्तियों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए पाबंद किया जा रहा है।
सारा अली खान के लिए क्यों बदला नियम?
सारा अली खान ने अपनी पहली फिल्म 'केदारनाथ' की शूटिंग के बाद से ही इस धाम के प्रति अपनी अटूट आस्था दिखाई है। वह साल में कम से कम दो बार बाबा के दर्शन के लिए जाती हैं। हालांकि, उनकी पिछली कुछ यात्राओं के दौरान उमड़ी भीड़ और सोशल मीडिया पोस्ट्स को देखते हुए प्रशासन अब और अधिक सतर्क हो गया है। नया नियम केवल सारा के लिए नहीं, बल्कि उन सभी हस्तियों के लिए है जो केदारनाथ की संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रशासन और मंदिर समिति का क्या कहना है?
बद्री-केदार मंदिर समिति के अधिकारियों का कहना है कि धाम की पवित्रता सर्वोपरि है। "हम किसी भी भक्त को रोकने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अनुशासन जरूरी है। शपथ पत्र केवल एक कानूनी प्रक्रिया है ताकि भविष्य में किसी भी विवाद से बचा जा सके।"
फैंस और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर सारा के फैंस दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ का कहना है कि आस्था के मामले में ऐसे प्रतिबंध नहीं होने चाहिए, जबकि अन्य का मानना है कि मंदिर की शांति बनाए रखने के लिए यह एक सही कदम है।