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April 28 2026 09:28 am

सरकारी नौकरी के साथ अब नेतागिरी पूरी तरह बैन ,छत्तीसगढ़ सरकार ने आचरण नियमों पर जारी किया कड़ा फरमान

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यक्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि या नेतृत्व (Leadership) स्वीकार्य नहीं होगा। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का हवाला देते हुए सभी सरकारी सेवकों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

राजनीतिक दलों से जुड़ाव पर 'जीरो टॉलरेंस'

सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बन सकता। न केवल सदस्यता, बल्कि किसी भी राजनीतिक आंदोलन, चुनाव प्रचार या चंदा देने जैसी गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना भी अब 'सेवा समाप्ति' का कारण बन सकता है। शासन का मानना है कि सरकारी तंत्र को पूरी तरह से निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक होना चाहिए।

संगठनों में पद लेने के लिए अब 'सक्षम अनुमति' अनिवार्य

अक्सर देखा जाता है कि कई कर्मचारी सरकारी नौकरी के साथ-साथ विभिन्न समितियों, गैर-सरकारी संस्थाओं या सामाजिक संगठनों में उच्च पदों पर आसीन रहते हैं। नए निर्देशों के अनुसार, बिना सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की लिखित अनुमति के कोई भी कर्मचारी किसी भी संगठन में कोई पद धारण नहीं कर सकेगा। यह नियम इसलिए कड़ा किया गया है ताकि कर्मचारियों का पूरा ध्यान अपने विभागीय उत्तरदायित्वों पर रहे।

ईमानदारी और निष्ठा की कसौटी पर कसेंगे कर्मचारी

जारी निर्देश में विशेष रूप से राजस्व मंडल बिलासपुर सहित राज्य के सभी प्रमुख कार्यालयों को संबोधित किया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्पक्षता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ करना होगा। यदि कोई कर्मचारी किसी ऐसे पद या जिम्मेदारी को स्वीकार करता है जिससे उसके सरकारी कर्तव्यों की निष्पक्षता प्रभावित होती है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त दंडात्मक कार्रवाई

शासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने पर:

कर्मचारी का निलंबन (Suspension) किया जा सकता है।

वार्षिक वेतनवृद्धि (Increment) रोकी जा सकती है।

गंभीर मामलों में सेवा से बर्खास्तगी (Termination) तक की जा सकती है।