धनबाद में बोरिंग कराना अब नहीं होगा आसान नगर निगम ने जारी की सख्त गाइडलाइन,उल्लंघन पर कटेगा पानी का कनेक्शन
News India Live, Digital Desk : धनबाद के शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए नगर निगम ने बोरिंग को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में नई गाइडलाइन को मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत अब अपनी जमीन पर बोरिंग कराने के नियम पहले से कहीं अधिक सख्त होंगे। निगम ने साफ कर दिया है कि जल संरक्षण और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए अब बिना अनुमति के बोरिंग करना भारी पड़ सकता है।
जिनके पास सरकारी पानी का कनेक्शन, उन्हें नहीं मिलेगी अनुमति
नगर निगम की नई गाइडलाइन में सबसे कड़ा प्रावधान उन लोगों के लिए है जिनके घरों में पहले से नगर निगम का पानी कनेक्शन मौजूद है। ऐसे मकान मालिकों को अब बोरिंग कराने की अनुमति नहीं दी जाएगी। निगम ने चेतावनी दी है कि यदि किसी घर में सरकारी सप्लाई का पानी आता है और वहां चोरी-छिपे बोरिंग कराई जाती है, तो नगर निगम का पानी कनेक्शन तत्काल प्रभाव से अवैध मानकर काट दिया जाएगा।
बोरिंग के लिए चुकानी होगी भारी फीस, 4.75 इंच की ही मिलेगी मंजूरी
नगर निगम ने बोरिंग के लिए तकनीकी और आर्थिक शर्तें भी तय कर दी हैं। अब शहर में केवल 4.75 इंच व्यास वाली बोरिंग की ही अनुमति दी जाएगी।
आवेदन शुल्क: बोरिंग के लिए आवेदन के साथ 5,000 रुपये का शुल्क बैंक ड्राफ्ट के जरिए जमा करना होगा।
एजेंसी का पंजीकरण: बोरिंग वही एजेंसी कर सकेगी जो नगर निगम में रजिस्टर्ड होगी।
पंजीकरण शुल्क: एजेंसियों को निगम में रजिस्ट्रेशन के लिए 50,000 रुपये की मोटी फीस चुकानी होगी।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग है अनिवार्य, रात में बोरिंग पर प्रतिबंध
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) को बोरिंग की अनुमति के लिए अनिवार्य शर्त बना दिया है। जिस परिसर में हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं होगा, वहां बोरिंग की इजाजत नहीं मिलेगी। इसके अलावा, ध्वनि प्रदूषण और आम लोगों की सुविधा को देखते हुए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बोरिंग करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
नियम तोड़ा तो देना होगा भारी जुर्माना
निगम ने स्पष्ट किया है कि बोरिंग का उपयोग केवल उसी उद्देश्य (घरेलू या अन्य) के लिए किया जा सकेगा जिसके लिए अनुमति ली गई है। यदि व्यावसायिक उपयोग पाया गया, तो निगम भारी जुर्माना वसूल करेगा। साथ ही, भूजल दोहन से पर्यावरण पर पड़ने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव के लिए मकान मालिक को ही जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।