अब जापान-यूरोप को भूल जाइए! भारत की नई 'सुपर ट्रेन' मचाएगी दुनिया में धूम, आपका सफर हमेशा के लिए बदल जाएगा
Vande Bharat 4.0 launch date : अब वो दिन दूर नहीं जब भारतीय ट्रेनें सिर्फ मंजिल तक पहुंचाने का साधन नहीं, बल्कि खुद में एक शानदार अनुभव होंगी। भारतीय रेलवे अब एक ऐसी छलांग लगाने की तैयारी में है, जो न सिर्फ देश में ट्रेन यात्रा की परिभाषा बदल देगी, बल्कि 'मेड इन इंडिया' को दुनिया के नक्शे पर एक बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करेगी।
बात हो रही है वंदे भारत 4.0की, जिसकी तैयारियां तूफानी रफ्तार से चल रही हैं। यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि एक सपना है - भारत की अपनी वर्ल्ड-क्लास ट्रेन बनाने का, जिसे हम दूसरे देशों को भी बेच सकें।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में साफ कर दिया है कि वंदे भारत का यह नया अवतार दुनिया की बड़ी-बड़ी ट्रेनों को सीधी टक्कर देगा। उन्होंने कहा, "हमें वंदे भारत को एक नए नजरिए से देखना होगा और ऐसी तकनीक लानी होगी जो हर पैमाने पर दुनिया में बेस्ट हो।"
क्या खास होगा वंदे भारत 4.0 में? मिशन- स्पीड और आराम
नई वंदे भारत 4.0 में उन सभी छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखा जा रहा है, जो आपके सफर को बेहतरीन बनाती हैं। अब बेहतर टॉयलेट, ज्यादा आरामदायक सीटें और शानदार डिजाइन वाले कोच देखने को मिलेंगे। रेल मंत्रालय का लक्ष्य है कि अगले डेढ़ साल के अंदर यह ट्रेन पटरियों पर दौड़ने लगे।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारी मौजूदा वंदे भारत 3.0 भी किसी से कम नहीं है। यह जापान और यूरोप की कई ट्रेनों से तेज है और मात्र 52 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। रेल मंत्री का कहना है कि अब इसे अगले लेवल पर ले जाने का समय आ गया है।
बुलेट ट्रेन का सपना भी अब दूर नहीं
इसके साथ ही, सरकार देश में 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर भी बना रही है। सोचिए, बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार पर आप भारत में सफर कर पाएंगे! 2047 तक ऐसे करीब 7,000 किलोमीटर के रूट तैयार करने का लक्ष्य है, जो एक विकसित भारत की तस्वीर को पूरा करेंगे।
सुरक्षा सबसे पहले: आ रहा है कवच 5.0
तेज रफ्तार के साथ सुरक्षा की चिंता भी आती है, लेकिन रेलवे ने इसका भी इंतजाम कर लिया है। ट्रेनों को टकराने से बचाने वाला 'कवच' सिस्टम अब और एडवांस हो रहा है। कवच 5.0को इस तरह से विकसित किया जा रहा है कि यह 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी ट्रेन को पूरी तरह सुरक्षित रखेगा, जिससे हादसों का डर खत्म हो जाएगा।
अब धुएं की जगह हाइड्रोजन: भारत की अपनी ग्रीन ट्रेन
पर्यावरण को बचाने की दिशा में भी रेलवे ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। भारत ने पूरी तरह से 'देसी' तकनीक पर बनी 2400 हॉर्सपावर की हाइड्रोजन ट्रेन तैयार कर ली है। यह कोई बाहर से लाई गई तकनीक नहीं, बल्कि हमारे अपने इंजीनियरों द्वारा डिजाइन की गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रेल मंत्री ने चेतावनी दी है कि घटिया सामान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को काली सूची में डाल दिया जाएगा।
यह बदलाव भारतीय रेलवे की पूरी सूरत बदलकर रख देगा। आने वाले समय में आपको तेज, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा, जो देश की तरक्की को एक नई रफ्तार देगा।