मनरेगा में अब नहीं चलेगी फर्जी हाजिरी: श्रमिकों के लिए e-KYC अनिवार्य, फेस ऑथेंटिकेशन ऐप से दर्ज होगी अटेंडेंस

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नई दिल्ली/लखनऊ: ग्रामीण भारत की लाइफलाइन कही जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। योजना में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को अनिवार्य कर दिया है। अब केवल उन्हीं मजदूरों को काम मिलेगा जिनका डिजिटल सत्यापन पूरा होगा। सरकार का यह कदम फर्जी मास्टर रोल और गलत तरीके से मजदूरी हड़पने वाले बिचौलियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक माना जा रहा है। सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द शत-प्रतिशत श्रमिकों का सत्यापन कार्य पूरा करें।

चेहरा दिखाकर लगेगी हाजिरी, एनएमएमएस ऐप में आया नया फीचर

ग्राम्य विकास विभाग ने मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। अब काम की जगह पर मजदूरों की हाजिरी नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication) से दर्ज की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत श्रमिक को ऐप के कैमरे के सामने आना होगा, जहां उसका चेहरा सत्यापित होने के बाद ही उसे उस दिन के कार्य के लिए उपस्थित माना जाएगा। इस डिजिटल हाजिरी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के नाम पर फर्जी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाएगा।

बिना ई-केवाईसी के नहीं जारी होंगे मास्टर रोल

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि राज्यों को मनरेगा के क्रियान्वयन में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी। राज्य स्तर पर अधिकारियों को जारी आदेश में कहा गया है कि मास्टर रोल जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिक का ई-केवाईसी पोर्टल पर अपडेट है या नहीं। यदि किसी श्रमिक की पहचान प्रक्रिया अधूरी रहती है, तो तकनीकी तौर पर उसका नाम मास्टर रोल में शामिल नहीं किया जा सकेगा। मंत्रालय का मानना है कि इस डिजिटल दीवार के बनने से योजना का बजट सीधे पात्र मजदूरों के बैंक खातों में पहुंचेगा और सरकारी धन का दुरुपयोग रुकेगा।

तकनीकी दिक्कत पर घबराने की जरूरत नहीं, बीजीओ को मिले अधिकार

नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही सरकार ने उन मजदूरों का भी ध्यान रखा है जो तकनीकी कारणों से ई-केवाईसी नहीं करा पा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी श्रमिक के अंगूठे के निशान या फेस रिकग्निशन में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो उसे योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित खंड विकास अधिकारी (BDO) या कार्यक्रम अधिकारी को भौतिक सत्यापन कर छूट देने का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वास्तविक और जरूरतमंद मजदूर सिर्फ तकनीकी खराबी की वजह से बेरोजगार न रह जाए।

भ्रष्टाचार मुक्त होगी ग्रामीण रोजगार व्यवस्था

मनरेगा के माध्यम से देश के करोड़ों परिवारों को रोजगार की सुरक्षा मिलती है। सरकार का यह नया डिजिटल ढांचा भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। फेस ऑथेंटिकेशन और ई-केवाईसी जैसी प्रणालियां न केवल उपस्थिति में पारदर्शिता लाएंगी, बल्कि इससे जमीनी स्तर पर होने वाली अनियमितताओं को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा। आने वाले दिनों में इसे पूरे देश की ग्राम पंचायतों में युद्धस्तर पर लागू करने की योजना है।