EPFO Pension Hike: पेंशनभोगियों की बल्ले-बल्ले! ₹7,500 हो सकती है न्यूनतम पेंशन, जानें श्रम मंत्रालय के नए प्रस्ताव की हर बड़ी बात
नई दिल्ली: देश के लाखों प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को लेकर सरकार एक ऐतिहासिक फैसला ले सकती है। लंबे समय से चल रही मांगों और आंदोलनों के बीच अब यह चर्चा तेज है कि न्यूनतम पेंशन की राशि को मौजूदा ₹1,000 से बढ़ाकर सीधे ₹7,500 प्रति माह किया जा सकता है। अगर श्रम मंत्रालय इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाता है, तो रिटायरमेंट के बाद जीवन यापन कर रहे बुजुर्गों को महंगाई के इस दौर में एक बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा।
क्या है EPS-95 योजना और कैसे कटता है आपका पैसा?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की पेंशन योजना, जिसे एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) कहा जाता है, साल 1995 में शुरू हुई थी। इस योजना का गणित काफी सीधा है। नौकरीपेशा व्यक्ति की बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा उसके पीएफ खाते (EPF) में जमा होता है। नियोक्ता (कंपनी) भी कर्मचारी के हिस्से के बराबर ही योगदान देती है। हालांकि, नियोक्ता के 12 प्रतिशत योगदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा सीधे कर्मचारी के पेंशन फंड यानी EPS में चला जाता है। यही वह पैसा है जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में वापस मिलता है। इसके लिए शर्त केवल इतनी है कि कर्मचारी ने कम से कम 10 साल तक अपनी सेवाएं दी हों और उसकी उम्र 58 वर्ष पूरी हो चुकी हो।
क्यों उठी ₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग?
वर्तमान में ईपीएस योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन मात्र ₹1,000 महीना है। आज की बेतहाशा महंगाई को देखते हुए रिटायरमेंट के बाद ₹1,000 में घर चलाना लगभग नामुमकिन है। इसी विसंगति को दूर करने के लिए देशभर के पेंशनभोगी संगठन 'कमांडर अशोक राउत' के नेतृत्व में लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। पेंशनभोगियों का तर्क है कि उन्होंने दशकों तक देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है, इसलिए उन्हें एक सम्मानजनक राशि मिलनी चाहिए। संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने भी पहले पेंशन राशि बढ़ाने की सिफारिश की थी, जिस पर अब श्रम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच गंभीरता से मंथन चल रहा है।
कौन उठा पाएगा इस बढ़ी हुई पेंशन का लाभ?
प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत यदि न्यूनतम पेंशन ₹7,500 लागू होती है, तो इसके लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि कर्मचारी का यूएएन (UAN) सक्रिय होना चाहिए और वह ईपीएफओ में निरंतर योगदान दे रहा हो। इसके अलावा, जिन लोगों को वर्तमान में ₹7,500 से कम मासिक पेंशन मिल रही है, उन्हें इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा मिलेगा। यह उन लाखों बुजुर्गों के लिए संजीवनी की तरह होगा जो फिलहाल ₹1,500 या ₹2,000 जैसी मामूली पेंशन पर आश्रित हैं।
पेंशन कैलकुलेशन का फॉर्मूला और डिजिटल सुविधा
ईपीएफओ में पेंशन की गणना एक खास फॉर्मूले से की जाती है, जो इस प्रकार है: (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) / 70। उदाहरण के लिए, यदि किसी का औसत वेतन ₹15,000 है और उसने 30 साल नौकरी की है, तो उसकी पेंशन करीब ₹6,428 बनती है। लेकिन अगर न्यूनतम पेंशन का नियम लागू हो जाता है, तो गणना में राशि कम आने पर भी सरकार को उसे ₹7,500 देना होगा। तकनीक के दौर में अब पेंशन की प्रक्रिया भी बहुत आसान हो गई है। अब पेंशनभोगी घर बैठे 'उमंग ऐप' या ईपीएफओ के पोर्टल से अपना पीपीओ (PPO) स्टेटस देख सकते हैं। साथ ही, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) की सुविधा ने बुजुर्गों को लंबी लाइनों में लगने से भी मुक्ति दिला दी है।