Bihar Jeevika Loan Scheme: बिहार की जीविका दीदियों की चमकेगी किस्मत! अब नहीं फंसना होगा माइक्रो फाइनेंस के जाल में, 1 हफ्ते में मिलेगा ₹2 लाख तक का लोन

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पटना/डेस्क: बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली 'जीविका दीदियों' के लिए नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की है। अब स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने या उसे विस्तार देने के लिए प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियों या साहूकारों के चक्कर नहीं काटने होंगे। नई व्यवस्था के तहत, इन महिलाओं को 'बिहार रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी' (जीविका) के माध्यम से महज एक सप्ताह के भीतर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। जिला स्तर पर इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने की कवायद तेज हो गई है, जिससे राज्य की लाखों महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन की नई दिशा मिलेगी।

निजी कंपनियों के 'वसूली चक्रवात' से मिलेगी मुक्ति

पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण इलाकों से ऐसी कई शिकायतें आई थीं, जहां माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज वसूली के नाम पर महिलाओं का मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न कर रही थीं। कई परिवार इन निजी कंपनियों के ऊंचे ब्याज दरों और सख्त नियमों के जाल में फंसकर तबाह हो रहे थे। सरकार की इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को ऐसे असुरक्षित और दबाव वाले ऋणदाताओं से बचाना है। अब जीविका दीदियों को एक सुरक्षित, पारदर्शी और बेहद आसान ऋण तंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे बिना किसी खौफ के अपने हुनर को स्वरोजगार में बदल सकेंगी।

'जीविका निधि साख सहकारी संघ' करेगा वित्तीय मदद

इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 'बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ' का गठन किया गया है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम से बिहार की 3 लाख से अधिक महिलाओं को सीधा लाभ पहुंचने की उम्मीद है। वर्तमान में राज्य में 26 हजार से अधिक जीविका समूह सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, अगरबत्ती निर्माण, पशुपालन और अन्य छोटे गृह उद्योगों में लगी हुई हैं। सहकारी संघ के माध्यम से मिलने वाली यह पूंजी उनके व्यवसायों के लिए 'संजीवनी' का काम करेगी।

पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया, मोबाइल ऐप से होगा आवेदन

डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए ऋण लेने की पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस और पारदर्शी बनाया गया है। जिला परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि ऋण के लिए आवेदन से लेकर स्वीकृति और बैंक खाते में राशि पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके लिए एक विशेष मोबाइल ऐप भी तैयार किया जा रहा है। महिलाएं घर बैठे ही ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगी, जिसकी निगरानी जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी करेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

₹15 हजार से ₹2 लाख तक का ऋण: जानें शर्तें और अवधि

महिलाओं की अलग-अलग व्यावसायिक जरूरतों को देखते हुए ऋण को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:

अल्पकालीन ऋण: जो महिलाएं बहुत छोटे स्तर पर काम शुरू करना चाहती हैं, उन्हें ₹15,000 तक की राशि मिलेगी। इसे चुकाने के लिए 12 महीने का समय दिया जाएगा।

सूक्ष्म ऋण: इस श्रेणी में ₹15,000 से लेकर ₹75,000 तक का लोन उपलब्ध होगा। इसकी वापसी के लिए 24 महीने (2 साल) की अवधि निर्धारित की गई है।

लघु ऋण: बड़े स्वरोजगार के लिए महिलाएं ₹75,000 से लेकर ₹2,00,000 तक का ऋण ले सकेंगी। इस राशि को चुकाने के लिए उन्हें 36 महीने यानी 3 साल का पर्याप्त समय मिलेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने वाला साबित होगा। जब महिलाओं के हाथ में बिना किसी दबाव के पूंजी पहुंचेगी, तो न केवल उनकी पारिवारिक आय बढ़ेगी, बल्कि गांव स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो उन्हें सही मायनों में आत्मनिर्भर बनाएगी।