सिर्फ़ पूजा नहीं, एक जादू है... जब पूरा बंगाल एक कला संग्रहालय बन जाता है!
हवा में घुली 'धुनो' (एक ख़ास तरह की धूप) की पवित्र ख़ुशबू, कानों में पड़ती 'ढाक' (एक ख़ास ढोल) की जोशीली आवाज़, और सड़कों पर ऐसे सजे-धजे लोग, जैसे हर कोई किसी बारात में आया हो... अगर आपको कभी ये सब एक साथ महसूस करना हो, तो बस दुर्गा पूजा के पांच दिनों में बंगाल चले आइएगा।
यह सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक एहसास है। एक ऐसा जादू है, जो पूरे राज्य को पांच दिनों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी और ख़ूबसूरत आर्ट गैलरी में बदल देता है। हर गली, हर नुक्कड़ पर कला और रचनात्मकता का ऐसा शानदार प्रदर्शन देखने को मिलता है, जिसे देखकर आंखें थकती नहीं।
ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि दुर्गा पूजा का मतलब सिर्फ़ कोलकाता है। यह सच है कि कोलकाता इस जश्न के दिल की धड़कन है, लेकिन इस त्योहार की आत्मा बंगाल के कोने-कोने में बसती है। तो चलिए, आज आपको कोलकाता से आगे ले चलते हैं और बंगाल की उन जगहों की सैर कराते हैं, जहाँ दुर्गा पूजा का एक अलग ही, दिलकश रंग देखने को मिलता है।
1. कोलकाता: कला और जुनून का महासागर
शुरुआत यहीं से करनी होगी! कोलकाता की दुर्गा पूजा सिर्फ़ पंडालों का मेला नहीं, बल्कि कला का सागर है। यहाँ का हर पंडाल एक कहानी कहता है। कोई मिस्र के पिरामिड के आकार का है, तो कोई गाँव की झोपड़ी जैसा। मूर्तियों में इतनी विविधता है कि आप हैरान रह जाएँगे। यहाँ की पूजा एक प्रतियोगिता भी है, हर कोई सबसे अनोखा और खूबसूरत पंडाल बनाना चाहता है, और इसी जुनून का नतीजा होता है जादू, जिसे देखने दुनिया भर से लोग आते हैं।
2. सिलीगुड़ी: पहाड़ों की गोद में पूजा का आनंद
उत्तर बंगाल का यह शहर दुर्गा पूजा के समय एक अलग ही अंदाज़ में सजता है। एक तरफ दार्जिलिंग के पहाड़ों से आती ठंडी हवा और दूसरी तरफ ढाक की जोशीली आवाज़... यह एक ऐसा संगम है जो आपको कहीं और नहीं मिलेगा। यहाँ के पंडाल भले ही कोलकाता जितने विशाल न हों, लेकिन यहाँ की पूजा में पहाड़ी संस्कृति का एक हल्का-सा स्पर्श ज़रूर महसूस होता है, जो इसे बहुत ख़ास बना देता है।
3. कूच बिहार: जब पूजा में घुले शाही अंदाज़
यह शहर अपने राजबाड़ी (शाही महल) के लिए मशहूर है, और यहाँ की दुर्गा पूजा में आज भी वह शाही शान-ओ-शौकत की एक झलक दिख जाती है। यहाँ की पूजा बहुत पारंपरिक और सदियों पुरानी रस्मों से भरी होती है। अगर आपको थीम वाले पंडालों की भीड़-भाड़ से दूर, एक शांत और भक्तिमय माहौल में पारंपरिक दुर्गा पूजा का अनुभव करना है, तो कूच बिहार आपके लिए एक बेहतरीन जगह है।
4. चंदननगर: रोशनी का वो शहर जो रात में भी दिन लगे
कोलकाता से कुछ ही दूरी पर हुगली नदी के किनारे बसा यह छोटा सा शहर कभी फ़्रांसीसी उपनिवेश हुआ करता था। लेकिन आज यह अपनी 'रोशनी' के लिए जाना जाता है। दुर्गा पूजा के दौरान चंदननगर की गलियों में रोशनी का जो जादू देखने को मिलता है, वह दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। यहाँ के कलाकार रोशनी से ऐसी कहानियाँ गढ़ते हैं कि आप पलकें झपकाना भूल जाएँगे। यहाँ की जगद्धात्री पूजा भी बहुत प्रसिद्ध है।
5. बिष्णुपुर: टेराकोटा की धरती पर माता की आराधना
यह शहर लाल मिट्टी से बने अपने खूबसूरत टेराकोटा मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहाँ की दुर्गा पूजा में आपको कला और इतिहास का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलेगा। यहाँ के पंडाल और मूर्तियाँ अक्सर मंदिरों की इसी कला से प्रेरित होती हैं। यह उन लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है जो त्योहार के साथ-साथ बंगाल की समृद्ध विरासत को भी देखना चाहते हैं।
तो इस बार जब आप दुर्गा पूजा का प्लान बनाएं, तो सिर्फ़ कोलकाता तक ही सीमित न रहें। बंगाल के इन अलग-अलग शहरों में जाइए, और आप पाएंगे कि माँ दुर्गा हर जगह एक नए और ख़ूबसूरत रूप में आपका इंतज़ार कर रही हैं।