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March 26 2026 05:24 am

NITI Aayog Report : झारखंड और ओडिशा बने देश के नए इकोनॉमिक पावरहाउस नीति आयोग ने विकास दर को सराहा

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News India Live, Digital Desk: नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट 'भारत के विकास का भविष्य' (Future of India's Development) में इस बात पर जोर दिया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड और ओडिशा ने अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है।

रिपोर्ट के 5 मुख्य बिंदु 

औसत से अधिक विकास दर: रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड और ओडिशा की जीडीपी (GDP) विकास दर राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे अधिक रही है। यह इन राज्यों में हो रहे संरचनात्मक सुधारों का संकेत है।

खनिज संपदा का सही उपयोग: नीति आयोग का मानना है कि दोनों राज्यों ने अपनी प्रचुर खनिज संपदा (कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट) के प्रसंस्करण (Processing) और निर्यात के लिए बेहतर नीतियां बनाई हैं, जिससे राजस्व में भारी वृद्धि हुई है।

एमएसएमई और स्टार्टअप का उदय: ओडिशा में 'मेक इन ओडिशा' और झारखंड में 'नई औद्योगिक नीति' के कारण छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) का जाल बिछा है। झारखंड में कृषि-आधारित स्टार्टअप्स की संख्या में भी उछाल आया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति: राज्यों में रेल, सड़क और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) के विकास ने निवेशकों का भरोसा जीता है। रिपोर्ट में विशेष रूप से झारखंड के 'ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' के लाभ का उल्लेख किया गया है।

गरीबी उन्मूलन में सुधार: नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, इन दोनों राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार होने से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

झारखंड के लिए विशेष टिप्पणी

नीति आयोग ने झारखंड की 'रिन्यूएबल एनर्जी' (सौर ऊर्जा) की दिशा में बढ़ते कदमों की सराहना की है। साथ ही, राज्य द्वारा 'रोजगार पोर्टल' और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को उद्योगों के लिए तैयार करने के मॉडल को अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बताया है।

आगे की चुनौतियाँ (The Road Ahead)

रिपोर्ट में कुछ सुधार के क्षेत्रों का भी सुझाव दिया गया है:

लॉजिस्टिक कॉस्ट: माल ढुलाई की लागत को कम करने के लिए और अधिक डिजिटलीकरण की आवश्यकता है।

ग्रामीण कनेक्टिविटी: दूरदराज के इलाकों को मुख्य बाजारों से जोड़ने के लिए और अधिक निवेश की जरूरत है।

कौशल विकास: स्थानीय युवाओं को आधुनिक उद्योगों (जैसे सेमीकंडक्टर या ग्रीन एनर्जी) के अनुरूप तैयार करना।