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April 24 2026 04:37 pm

IDBI बैंक के निजीकरण पर निलम का बड़ा बयान, रॉकेट बने शेयर 8% तक उछले दाम, जानें क्या है सरकार का प्लान

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News India Live, Digital Desk: IDBI बैंक के निजीकरण (Privatisation) को लेकर पिछले कई हफ्तों से बने अनिश्चितता के बादल अब छंट गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि सरकार इस बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया को जारी रखेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्री के इस 'भरोसे' के बाद शेयर बाजार में IDBI बैंक के शेयरों में जबरदस्त लिवाली देखी गई और इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान शेयर की कीमतें 8% तक उछलकर ₹79.90 के स्तर पर पहुँच गईं।

अनिश्चितता खत्म: क्यों थमी थी प्रक्रिया?

पिछले महीने ऐसी खबरें आई थीं कि IDBI बैंक के लिए मिली बोलियां सरकार द्वारा तय 'रिजर्व प्राइस' से कम थीं, जिसके कारण सौदे को अस्थायी रूप से टाल दिया गया था। इससे निवेशकों में डर था कि शायद सरकार अब इस बैंक को नहीं बेचेगी। हालांकि, पुणे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक कार्यक्रम के दौरान सीतारमण ने साफ किया कि सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचने की योजना पर कायम है। कुल मिलाकर 60.72% हिस्सेदारी के विनिवेश की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय पर भी स्थिति साफ

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब वित्त मंत्री से सरकारी बैंकों के आपस में विलय (Consolidation) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस पर कोई नया प्रस्ताव टेबल पर नहीं है। उन्होंने बताया कि एक उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति बैंकिंग क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रख रही है। सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार इतना बड़ा हो चुका है कि हमें बड़े बैंकों की जरूरत है, जो घरेलू मांग को पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि घरेलू गतिविधियों, विशेषकर कृषि पर आधारित है।

निवेशकों की लौटी रौनक: ₹12,000 करोड़ से ज्यादा बढ़ी मार्केट वैल्यू

शुक्रवार को आई इस तेजी से IDBI बैंक की मार्केट वैल्यू में एक ही दिन में करोड़ों रुपये का इजाफा हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विनिवेश प्रक्रिया के दोबारा पटरी पर लौटने की खबर से बैंक के मूल्यांकन (Valuation) में सुधार होगा। सरकार ने जनवरी 2023 में ही इस प्रक्रिया के लिए बोलियां (EOI) आमंत्रित की थीं, लेकिन आरबीआइ (RBI) की 'फिट एंड प्रॉपर' जांच और वैल्युएशन के मुद्दों के कारण इसमें देरी हो रही थी। अब वित्त मंत्री के बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही संशोधित बोलियां (Revised Bids) आमंत्रित कर सकती है।