New Income Tax Rule 2026: 64 साल पुराना इनकम टैक्स कानून होगा रिटायर, 1 अप्रैल से बदल जाएगा आपकी कमाई और बचत का गणित; जानें 4 बड़े बदलाव
नई दिल्ली। देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। केंद्र सरकार ने 64 साल पुराने 'इनकम टैक्स एक्ट 1961' को विदा करने की पूरी तैयारी कर ली है। 1 अप्रैल 2026 से देश में एक नया, आधुनिक और सरल इनकम टैक्स कानून लागू होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से न केवल नियमों की पेचीदगी कम होगी, बल्कि टैक्स भरने की प्रक्रिया भी पारदर्शी और आसान हो जाएगी। इस नए कानून के लागू होते ही आपकी सैलरी, निवेश और टैक्स रिफंड से जुड़े कई नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।
Previous और Assessment Year का झंझट खत्म, अब होगा सिर्फ 'टैक्स ईयर'
आम करदाताओं के लिए अब तक सबसे बड़ी उलझन 'प्रीवियस ईयर' (कमाई का साल) और 'असेसमेंट ईयर' (टैक्स आंकलन का साल) के बीच तालमेल बिठाने में होती थी। नए कानून में इस भ्रम को जड़ से खत्म किया जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से सिर्फ एक 'Tax Year' होगा। यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि में जो आप कमाएंगे, उसी दौरान उसकी टैक्स प्रक्रिया भी पूरी मानी जाएगी। इससे कागजी कार्यवाही कम होगी और रिटर्न फाइल करना काफी सरल हो जाएगा।
डिजिटल प्राइवेसी पर सख्त नियम: सोशल मीडिया की जांच पर लगी 'लगाम'
पिछले कुछ समय से यह डर बना हुआ था कि टैक्स अधिकारी कभी भी किसी का व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम अकाउंट चेक कर सकते हैं। नए कानून में इस पर स्थिति साफ कर दी गई है। डिजिटल एक्सेस की शक्ति अब असीमित नहीं होगी। टैक्स अधिकारी केवल गंभीर टैक्स चोरी या धोखाधड़ी के मामलों में ही डिजिटल डेटा की जांच कर पाएंगे। इसके लिए बाकायदा सर्च वारंट और उच्च अधिकारियों की मंजूरी अनिवार्य होगी। ईमानदार करदाताओं को अपनी डिजिटल प्राइवेसी को लेकर अब डरने की जरूरत नहीं है।
देरी से ITR भरने वालों को बड़ी राहत, अब नहीं डूबेगा TDS रिफंड
मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत यह है कि अब देरी से रिटर्न (Belated Return) फाइल करने पर भी आपका टीडीएस (TDS) रिफंड नहीं अटकेगा। अब तक समय सीमा निकलने के बाद रिफंड मिलना मुश्किल होता था, लेकिन नए नियमों के तहत आप लेट फीस देकर अपना रिफंड वापस पा सकेंगे।
₹5 लाख से कम आय: ₹1,000 लेट फीस।
₹5 लाख से अधिक आय: ₹5,000 लेट फीस।
यह बदलाव सुनिश्चित करेगा कि टैक्सपेयर का मेहनत का पैसा सरकारी खजाने में फंसा न रहे।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर लगेगा टैक्स, निवेशकों को बदलनी होगी रणनीति
निवेश के मोर्चे पर एक बड़ा झटका लग सकता है। अब तक टैक्स-फ्री माने जाने वाले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स के नियम बदल रहे हैं। अगर आपने स्टॉक एक्सचेंज के जरिए SGB खरीदा है और आप उसे बेचते हैं, तो होने वाले लाभ पर 12.5% की दर से टैक्स देना होगा। हालांकि, जो निवेशक मैच्योरिटी (8 साल) तक बॉन्ड को होल्ड करेंगे, उन्हें पहले की तरह राहत मिलने की संभावना बरकरार है।