Credit Card Minimum Amount Due: मिनिमम ड्यू भरने की आदत कहीं पड़ न जाए भारी! जानें क्या सच में गिरता है सिबिल स्कोर और क्या है इसका 'डेब्ट ट्रैप'

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लखनऊ। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले लगभग हर यूजर के मन में एक सवाल अक्सर घूमता है— "क्या सिर्फ मिनिमम अमाउंट ड्यू (MAD) भर देने से काम चल जाएगा?" स्टेटमेंट में दिखने वाली यह छोटी सी रकम कई बार राहत तो देती है, लेकिन इसके पीछे छिपे गणित को न समझना आपको भारी कर्ज के जाल में फंसा सकता है। आइए, अमर उजाला की रिपोर्टर शैली में समझते हैं कि क्रेडिट कार्ड की यह 'न्यूनतम राशि' आपके वित्तीय स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है।

क्या है Minimum Amount Due का गणित?

आसान शब्दों में कहें तो Minimum Amount Due (MAD) आपके कुल बिल का वह छोटा हिस्सा (आमतौर पर 5% से 10%) होता है, जिसे चुकाने पर बैंक आपको 'डिफॉल्टर' नहीं मानता। उदाहरण के लिए, यदि आपका बिल ₹50,000 है और आपने ₹2,500 का मिनिमम ड्यू भर दिया, तो बैंक आप पर लेट फीस (Late Payment Charges) नहीं लगाएगा। लेकिन याद रखें, यह सिर्फ जुर्माने से बचने का रास्ता है, कर्ज खत्म करने का नहीं।

क्या इससे क्रेडिट स्कोर तुरंत गिरता है?

तकनीकी रूप से देखें तो इसका जवाब 'नहीं' है। यदि आप समय पर मिनिमम अमाउंट भर रहे हैं, तो आपके क्रेडिट रिकॉर्ड में "समय पर भुगतान" (On-time payment) ही दर्ज होगा। बैंक इसे डिफॉल्ट नहीं मानते, इसलिए आपका CIBIL स्कोर तुरंत नहीं गिरता। यही वह कारण है जिसकी वजह से आधे से ज्यादा कार्ड यूजर इस मुगालते में रहते हैं कि वे सुरक्षित हैं।

सावधान! छिपी हुई मुसीबतें यहां हैं

भले ही आपका स्कोर तुरंत न गिरे, लेकिन लगातार सिर्फ मिनिमम अमाउंट भरना आपके प्रोफाइल को दो तरह से खोखला करता है:

ब्याज का चक्रव्यूह: जैसे ही आप फुल पेमेंट के बजाय मिनिमम ड्यू भरते हैं, शेष राशि पर 36% से 45% सालाना तक का भारी-भरकम ब्याज लगना शुरू हो जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगले महीने से आपके नए खर्चों पर मिलने वाला 'ब्याज मुक्त समय' (Interest-free period) भी खत्म हो जाता है।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (CUR): मान लीजिए आपकी लिमिट ₹1 लाख है और आपका बकाया ₹80,000 बना रहता है। ऐसे में आपका क्रेडिट यूज 80% दिखेगा। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स हमेशा 30% से कम उपयोग की सलाह देते हैं। लगातार हाई यूटिलाइजेशन दिखाने से बैंक आपको 'जोखिम भरा ग्राहक' मानने लगते हैं, जिससे धीरे-धीरे आपका क्रेडिट स्कोर कम होने लगता है।

कब है मिनिमम अमाउंट भरना सही?

विशेषज्ञों के अनुसार, मिनिमम अमाउंट भरने का विकल्प सिर्फ आपातकालीन स्थिति के लिए होना चाहिए। यदि किसी महीने मेडिकल इमरजेंसी या अचानक नकदी की कमी (Cash Crunch) हो गई हो, तो लेट फीस और कानूनी नोटिस से बचने के लिए इसे एक या दो महीने तक इस्तेमाल करना ठीक है। लेकिन इसे 'वित्तीय आदत' बना लेना भविष्य में होम लोन या पर्सनल लोन मिलने में बड़ी अड़चन पैदा कर सकता है।

स्मार्ट कार्ड यूजर बनने के 5 टिप्स

फुल पेमेंट की आदत डालें: हमेशा कोशिश करें कि ड्यू डेट से पहले पूरा बिल चुकाएं।

ज्यादा भरें: यदि पूरा बिल नहीं भर पा रहे, तो मिनिमम के भरोसे न रहें; जितना संभव हो उतनी ज्यादा रकम भरें।

EMI का विकल्प: यदि कोई बड़ा खर्च कर लिया है, तो उसे भारी ब्याज वाले क्रेडिट कार्ड बिल के बजाय कम ब्याज वाली EMI में बदल लें।

लिमिट का ध्यान: अपने खर्च को कुल लिमिट के 30% के दायरे में ही रखें।

स्टेटमेंट पढ़ें: हर महीने अपने स्टेटमेंट में छिपे हुए चार्जेस और ब्याज दरों को ध्यान से देखें।