Bank Income Sources: सिर्फ लोन के ब्याज से नहीं भरती बैंकों की तिजोरी! एटीएम चार्ज से लेकर कमीशन तक, जानें बैंक की कमाई के 7 'सीक्रेट' जरिए
लखनऊ। जब भी बैंक की कमाई का जिक्र होता है, तो हमारे जेहन में सबसे पहले होम लोन या कार लोन पर लगने वाले भारी-भरकम ब्याज का ख्याल आता है। हमें लगता है कि बैंक केवल ब्याज (Interest) से ही मुनाफा कमाते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प और व्यापक है। आज के आधुनिक दौर में बैंक केवल ब्याज पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा “नॉन-इंटरेस्ट इनकम” (ब्याज के अलावा अन्य आय) से आता है। यही वजह है कि जब रिजर्व बैंक रेपो रेट घटाता है या ब्याज दरें कम होती हैं, तब भी बैंकों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर बना रहता है।
आइए, अमर उजाला की रिपोर्टर शैली में समझते हैं कि आपकी जेब से कटने वाले छोटे-छोटे चार्जेस से लेकर बड़े कॉरपोरेट सौदों तक, बैंक आखिर कैसे अरबों की कमाई करते हैं।
1. फीस और सर्विस चार्ज: छोटी बूंदों से बनता है कमाई का समंदर
बैंक आपसे मिलने वाले हर छोटे काम के लिए एक निश्चित फीस वसूलते हैं। भले ही आपको यह रकम मामूली लगे, लेकिन करोड़ों ग्राहकों से जुड़कर यह एक विशाल आय बन जाती है:
ATM चार्ज: तय सीमा से अधिक पैसा निकालने पर लगने वाली फीस।
पेनल्टी: अकाउंट में मिनिमम बैलेंस (AMB) मेंटेन न करने पर लगने वाला जुर्माना।
एनुअल फीस: आपके डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला सालाना चार्ज।
सुविधा शुल्क: एसएमएस अलर्ट, चेकबुक जारी करना और डुप्लीकेट स्टेटमेंट जैसी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क।
2. लोन प्रोसेसिंग और प्रीपेमेंट चार्ज: ब्याज शुरू होने से पहले ही कमाई
बैंक केवल लोन की किश्तों (EMI) से ही पैसा नहीं बनाते, बल्कि लोन की प्रक्रिया शुरू होते ही उनकी कमाई चालू हो जाती है:
प्रोसेसिंग फीस: लोन अप्रूव करते समय बैंक फाइल चार्ज या प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, जो हजारों-लाखों में हो सकती है।
फोरक्लोजर चार्ज: अगर आप समय से पहले अपना पूरा लोन चुकाना चाहते हैं, तो कई बैंक इसके बदले 'प्रीपेमेंट पेनाल्टी' वसूलते हैं।
3. ट्रेजरी और स्मार्ट निवेश: बाजार की चाल से मुनाफा
बैंक आपके द्वारा जमा किए गए पैसे को सिर्फ लोन में ही नहीं बांटते। वे उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल और शेयर बाजार के सुरक्षित साधनों में निवेश करते हैं। जब बाजार में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव होता है, तो बैंक इन निवेशों को सही समय पर खरीदकर या बेचकर भारी मुनाफा (Trading Profit) कमाते हैं।
4. फॉरेक्स और विदेशी लेनदेन: सीमाओं के पार से आय
अगर आप विदेश यात्रा के लिए करेंसी (डॉलर, यूरो आदि) एक्सचेंज कराते हैं, तो बैंक विनिमय दर (Exchange Rate) में अपना मार्जिन जोड़ते हैं। इसके अलावा:
विदेश से आने वाले पैसे (Remittance) पर लगने वाली फीस।
एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट के बिजनेस में एलसी (Letter of Credit) जारी करने के बदले ली जाने वाली भारी कमीशन।
5. बैंकाश्योरेंस: बीमा और म्यूचुअल फंड का कमीशन
आजकल आप जब भी बैंक जाते हैं, तो मैनेजर आपको इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड लेने की सलाह देते हैं। दरअसल, बैंक इन कंपनियों के लिए एक 'एजेंट' के तौर पर काम करते हैं। जब भी कोई ग्राहक बैंक के जरिए बीमा या निवेश प्लान खरीदता है, तो बैंक को उस कंपनी से मोटा कमीशन मिलता है। इसे बैंकिंग की भाषा में 'बैंकाश्योरेंस' मॉडल कहा जाता है।
6. डिजिटल पेमेंट और मर्चेंट सर्विसेज
कैशलेस इकोनॉमी के दौर में डिजिटल ट्रांजेक्शन बैंकों की आय का मजबूत स्तंभ बन गए हैं। दुकानों पर लगी पीओएस (POS) मशीनें और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए होने वाले हर लेनदेन पर बैंक छोटा सा 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) या ट्रांजेक्शन मार्जिन लेते हैं। भले ही यूपीआई (UPI) आम आदमी के लिए फ्री हो, लेकिन अन्य डिजिटल चैनलों से बैंक लगातार कमाई कर रहे हैं।
7. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और एडवाइजरी
यह कमाई आम ग्राहकों की नजरों से दूर होती है। बड़े बैंक कंपनियों के आईपीओ (IPO) लाने, दो कंपनियों के विलय (Merger) कराने या बड़े कॉरपोरेट सौदों में सलाहकार की भूमिका निभाते हैं। इन हाई-प्रोफाइल सौदों के बदले बैंक करोड़ों रुपये की एडवाइजरी फीस वसूलते हैं।