Railway Reforms 2026: रेलवे की खाली जमीन पर बनेंगे गोदाम और फैक्ट्री, 50 साल के कॉन्ट्रैक्ट से निवेशकों की लगेगी कतार

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने 14 फरवरी 2026 को अपने बुनियादी ढांचे और यात्री सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए एक बड़े रिफॉर्म पैकेज का ऐलान किया है। रेल मंत्रालय का यह नया विजन 'गति शक्ति' और 'आधुनिक यात्री सेवा' के तालमेल पर आधारित है। इस नई नीति के तहत अब रेलवे की खाली पड़ी जमीनों का इस्तेमाल न केवल पटरियां बिछाने, बल्कि देश के बड़े इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब बनाने के लिए किया जाएगा। आइए, अमर उजाला की रिपोर्टर शैली में समझते हैं कि कैसे ये बदलाव आपकी रेल यात्रा और देश के व्यापार की सूरत बदलने वाले हैं।

कोच की सफाई का नया अवतार: अब एक ही टीम संभालेगी सारा जिम्मा

रेल यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या—गंदे टॉयलेट और फटे-पुराने लिनन—का समाधान अब रेलवे ने ढूंढ लिया है। रेलवे अब 'इंटीग्रेटेड क्लीनिंग, लिनन और पेटी रिपेयर्स' मॉडल लागू कर रहा है।

मल्टी-टास्किंग टीमें: अब कोच की सफाई, चादरों का रखरखाव और छोटी-मोटी मरम्मत (जैसे खराब नल या ढीली सीट) के लिए अलग-अलग ठेकेदारों के चक्कर नहीं काटने होंगे। एक ही हाई-टेक टीम इन सभी कामों के लिए जिम्मेदार होगी।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग: अब सफाई केवल कागजों पर नहीं, बल्कि डिजिटल डेटा पर आधारित होगी। यात्री अपनी शिकायतें सीधे रूट-आधारित टीमों तक पहुंचा सकेंगे, जो लंबी दूरी की ट्रेनों में हर वक्त मुस्तैद रहेंगी। सबसे खास बात यह है कि इस मॉडल में जनरल कोच की सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल: रेलवे की खाली जमीन पर मचेगी 'धूम'

रेलवे का दूसरा बड़ा दांव माल ढुलाई (Logistics) पर है। सरकार का लक्ष्य सड़कों पर बढ़ते ट्रकों के बोझ को कम कर सामान को सीधा पटरी पर लाना है। इसके लिए 'गति शक्ति कार्गो टर्मिनल' (GCT) नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं।

फैक्ट्री और गोदामों का निर्माण: अब रेलवे की खाली जमीन पर निजी कंपनियां अपने गोदाम, ग्राइंडिंग यूनिट्स और प्रोसेसिंग सेंटर बना सकेंगी। पुराने और बेकार पड़े माल गोदामों को अब अत्याधुनिक टर्मिनल में बदला जाएगा।

50 साल का महा-कॉन्ट्रैक्ट: व्यापार जगत को आकर्षित करने के लिए रेलवे अब 50 साल की लंबी अवधि के लिए जमीन लीज पर देगा। इससे निवेशकों को स्थिरता मिलेगी और वे भारी निवेश करने का साहस कर पाएंगे।

अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ़्तार: 20,000 करोड़ का राजस्व लक्ष्य

रेलवे ने अगले तीन सालों में 124 मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इन टर्मिनलों के जरिए रेलवे का लक्ष्य 20 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढोना है, जिससे सरकारी खजाने में करीब 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व आने की उम्मीद है।

सीधा जुड़ाव: रेलवे अब सीधे पोर्ट्स (बंदरगाहों) और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ेगा। इससे सीमेंट, कोयला और स्टील जैसे भारी सामान की ढुलाई की लागत कम होगी।

GRF (गारंटीड रेलवे फ्रेट): व्यापारियों के लिए अब 'गारंटीड रेलवे फ्रेट' की सुविधा होगी, जिससे उनका माल सुरक्षित और समय पर पहुंचने की गारंटी मिलेगी।