BREAKING:
April 21 2026 12:44 am

झारखंड में लगी नई फैक्ट्री तो 75% नौकरियां सिर्फ झारखंडियों की हेमंत सोरेन का बड़ा आदेश

Post

News India Live, Digital Desk: झारखंड के युवाओं के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. अब प्रदेश में लगने वाली किसी भी नई निजी कंपनी, फैक्ट्री या आउटसोर्सिंग एजेंसी को अपनी कुल नौकरियों का 75 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित रखना होगा. इसका मतलब है कि अब झारखंड में लगने वाले उद्योगों में हर 4 में से 3 नौकरियां सिर्फ झारखंड के युवाओं को ही मिलेंगी.

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में श्रम विभाग के अधिकारियों को इस नियम को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं.

क्या है यह नया नियम?

इस नियम का पूरा नाम 'झारखंड राज्य के निजी क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन अधिनियम, 2021' है. हालांकि यह कानून पहले ही बन चुका था, लेकिन अब सरकार ने इसे पूरी सख्ती के साथ लागू करने का फैसला किया है.

  • किन नौकरियों पर लागू होगा?: यह नियम उन सभी निजी क्षेत्र की नौकरियों पर लागू होगा, जिनमें मासिक वेतन 40,000 रुपये तक है. इससे ज्यादा वेतन वाली नौकरियों पर यह आरक्षण लागू नहीं होगा.
  • सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य: यह नियम राज्य में स्थापित होने वाली हर नई फैक्ट्री, कंपनी, संयुक्त उद्यम और पीपीपी मोड पर चलने वाली परियोजनाओं पर लागू होगा.
  • बनाना होगा जॉब पोर्टल: सरकार ने श्रम विभाग को एक नया जॉब पोर्टल, 'झार-नियोजन' (Jhar-Niyojan), बनाने का भी निर्देश दिया है. सभी कंपनियों को अपनी रिक्तियों की जानकारी इसी पोर्टल पर देनी होगी.
  • स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर: सरकार सिर्फ आरक्षण ही नहीं देगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि स्थानीय युवाओं को कंपनियों की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग दी जाए. इसके लिए राज्य भर में कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centres) भी खोले जाएंगे.

क्यों लिया गया यह फैसला?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि झारखंड के संसाधनों पर पहला हक यहीं के लोगों का है. अक्सर देखा जाता है कि राज्य में उद्योग तो लगते हैं, लेकिन नौकरियां बाहरी लोगों को मिल जाती हैं और स्थानीय युवा बेरोजगार रह जाते हैं. इस नियम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश से पलायन को रोकना और स्थानीय युवाओं को उनके घर के पास ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है.

सरकार ने सभी जिलों के डीसी को भी यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि उनके जिले में स्थापित होने वाली कंपनियां इस 75 प्रतिशत आरक्षण के नियम का पूरी तरह से पालन करें. यह फैसला झारखंड के युवाओं के भविष्य के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है.