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March 21 2026 09:55 am

Neem Karoli Baba : वो चमत्कारी मंत्र, आरती और विनय चालीसा जो हर इच्छा पूरी करते हैं

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News India Live, Digital Desk: नीम करौली बाबा, जिन्हें उनके भक्त हनुमान जी का अवतार मानते हैं, आज भी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं दुनिया भर में उनके अनुयायी यह मानते हैं कि बाबा की कृपा से जीवन की बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाती है. ऐसा कहा जाता है कि उनके मंत्रों का जाप करने, आरती और विनय चालीसा का पाठ करने से हर मनोकामना पूरी होती है

भले ही बाबा ने देह त्याग दी हो, लेकिन उनकी दिव्य उपस्थिति आज भी महसूस की जाती है. उनके भक्त मानते हैं कि पूरी श्रद्धा से उन्हें याद करने पर वे किसी न किसी रूप में मदद जरूर करते हैं. आइए, जानते हैं बाबा की उस दिव्य स्तुति के बारे में जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है.

नीम करौली बाबा का चमत्कारी मंत्र

यह मंत्र एक दोहे के रूप में है, जिसे बाबा का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है. भक्त मानते हैं कि इसके जाप से वे सीधे बाबा से जुड़ जाते हैं.

"मैं हूँ बुद्धि मलीन अति, श्रद्धा भक्ति विहीन।
करूँ विनय कछु आपकी, होउ सब ही विधि दीन॥"

श्री नीम करौली बाबा की आरती

बाबा की यह आरती उनके भक्तों में बहुत लोकप्रिय है. इसे गाने से मन में शांति का अनुभव होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.

आरती नीब करौरी की, छवि मन भावन भोली सी।
धाम कैंची में है प्यारा, मिटावे मन का अँधियारा॥

ध्यावे जो इनको मन से, कष्ट कट जाते जीवन से।
भाव से आया जो दर पे, हाथ उसके धरते सर पे॥

न वो घबरावे संकट से, मिटें सब रोग, कटें सब दोष।
हटे सब शोक, कृपा कर दे जो भौरी सी, के बाबा नीब करौरी जी॥

आरती नीब करौरी की, छवि मन भावन भोली सी।

कहाते हनुमत अवतारी, दरश को भीर परी भारी।
भक्तजन तुम-पर बलिहारी, जपे जो नाम, सुबह और शाम॥

बने सब काम, जो गावे महिमा थोड़ी सी, के बाबा नीब करौरी की।
आरती नीब करौरी की, छवि मन भावन भोली सी॥

समाधी है वृन्दावन में, समाए जन जन के मन में।
बसा लो इनको जीवन में, लगाकर प्रीत, झुकाकर शीश॥

मिले आशिष, करे विनती मन से जो भी, के बाबा नीब करौरी की।
आरती नीब करौरी की, छवि मन भावन भोली सी॥

शरण जो भी इनकी आया, जो माँगा वो इनसे पाया।
कभी ना खाली लौटाया, करे गुणगान, भजे जो राम॥

ध्यावे नाम, भरे बाबा झोली उसकी, के बाबा नीब करौरी जी।
आरती नीब करौरी की, छवि मन भावन भोली सी॥

श्री विनय चालीसा

'विनय चालीसा' बाबा की महिमा और उनके चमत्कारों का गुणगान है. कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इसका पाठ करता है, बाबा उसकी सभी विपदाएं हर लेते हैं.

॥ दोहा ॥

मैं हूँ बुद्धि मलीन अति, श्रद्धा भक्ति विहीन।
करूँ विनय कछु आपकी, हो सब ही विधि दीन॥

॥ चौपाई ॥

जय जय नीब करोली बाबा। कृपा करहु आवै सद्भावा॥
कैसे मैं तव स्तुति बखानू। नाम ग्राम कछु मैं नहीं जानूँ॥

जापे कृपा दृष्टि तुम करहु। रोग शोक दुःख दारिद हरहु॥
तुम्हरौ रूप लोग नहीं जानै। जापै कृपा करहु सोई भानै॥

करि दे अर्पन सब तन मन धन। पावै सुख अलौकिक सोई जन॥
दरस परस प्रभु जो तव करई। सुख सम्पति तिनके घर भरई॥

जय जय संत भक्त सुखदायक। रिद्धि सिद्धि सब सम्पति दायक॥
तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा। विचरत पूर्ण कारन हित तृष्णा॥

जय जय जय जय श्री भगवंता। तुम हो साक्षात हनुमंता॥
कही विभीषण ने जो बानी। परम सत्य करि अब मैं मानी॥

बिनु हरि कृपा मिलहिं नहिं संता। सो करि कृपा करहिं दुःख अंता॥
सोई भरोस मेरे उर आयो। जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो॥

जो सुमिरै तुमको उर माहि। ताकि विपति नष्ट ह्वै जाहि॥
जय जय जय गुरुदेव हमारे। सबहि भाँति हम भये तिहारे॥

हम पर कृपा शीघ्र अब करहु। परम शांति दे दुःख सब हरहु॥
रोक शोक दुःख सब मिट जावै। जपै राम रामहि को ध्यावै॥

जा विधि होई परम कल्याणा। सोई सोई आप देहु वरदाना॥
सबहि भाँति हरि ही को पूजे। राग द्वेष द्वंदन सो जूझे॥

करै सदा संतन की सेवा। तुम सब विधि सब लायक देवा॥
सब कुछ दे हमको निस्तारो। भव सागर से पार उतारो॥

मैं प्रभु शरण तिहारी आयो। सब पुण्यन को फल है पायो॥
जय जय जय गुरुदेव तुम्हारी। बार बार जाऊं बलिहारी॥

सर्वत्र सदा घर घर की जानो। रूखो सूखो ही नित खानो॥
भेष वस्त्र है सादा ऐसे। जाने नहीं कोउ साधू जैसे॥

ऐसी है प्रभु रहनी तुम्हारी। वाणी कहो रहस्यमय भारी॥
नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावै। जब स्वामी चेटक दिखलावै॥

सब ही धर्मन के अनुयायी। तुम्हे मनावै शीश झुकाई॥
नहीं कोउ स्वारथ नहीं कोउ इच्छा। वितरण कर देउ भक्तन भिक्षा॥

केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनाऊँ। जासो कृपा-प्रसाद तव पाऊँ॥
साधु सुजन के तुम रखवारे। भक्तन के हो सदा सहारे॥

दुष्टऊ शरण आनी जब परई। पूरण इच्छा उनकी करई॥
यह संतन करि सहज सुभाऊ। सुनी आश्चर्य करई जनि काउ॥

॥ दोहा ॥

श्रद्धा के यह पुष्प कछु, चरणन धरि सम्हार।
कृपासिंधु गुरुदेव प्रभु, करि लीजे स्वीकार॥