Navratri Maha Ashtami 2025 : इस खास दिन माँ महागौरी क्यों बनीं श्वेत वर्ण? जानें पूरी कहानी
News India Live, Digital Desk: Navratri Maha Ashtami 2025 : शारदीय नवरात्रि के पावन नौ दिन माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित हैं. इन नौ दिनों में से आठवां दिन, जिसे महाअष्टमी कहते हैं, माँ महागौरी की पूजा के लिए खास होता है. यह दिन भक्तों के लिए बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि माँ महागौरी सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती हैं. अगर आप भी माँ महागौरी की कृपा पाना चाहते हैं, तो उनकी व्रत कथा और उनके स्वरूप के बारे में जानना बेहद खास है.
माँ महागौरी की कथा इस बात का प्रतीक है कि कठोर तपस्या और निष्ठा से हर मनोकामना पूरी हो सकती है. पौराणिक कथा के अनुसार, माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. यह तपस्या इतनी भीषण थी कि उनके शरीर पर धूल और मिट्टी जम गई थी, जिससे उनका रंग काला पड़ गया था. जब भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए, तो उन्होंने माँ पार्वती को गंगाजल से स्नान कराया. गंगाजल के प्रभाव से माँ का शरीर एकदम धवल (श्वेत) और चमकदार हो गया, ठीक उसी तरह जैसे चाँद की रोशनी होती है. उनके इसी स्वरूप को माँ महागौरी के नाम से जाना गया.
'महा' का अर्थ है महान और 'गौरी' का अर्थ है सफेद या शुद्ध. इसीलिए माँ महागौरी का स्वरूप बेहद शांत, सुंदर और तेजमय होता है. उन्हें श्वेत वस्त्र धारण किए, त्रिशूल और डमरू धारण किए, बैल की सवारी करते हुए दर्शाया जाता है. अष्टमी के दिन इनकी पूजा से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं, उन्हें मनचाहा फल मिलता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से माँ की पूजा और व्रत करता है, उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है.