नवरात्रि 2025: नौ दिन, नौ भोग! मां दुर्गा को अर्पित करें ये खास चीजें, हर मनोकामना होगी पूरी

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शारदीय नवरात्रि... मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का महापर्व। यह वो नौ दिन होते हैं जब मां अपने भक्तों के घर आती हैं, उनकी सारी परेशानियां दूर करती हैं और झोली खुशियों से भर देती हैं। भक्त इन नौ दिनों में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां को प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन नौ दिनों में मां के हर स्वरूप को उनका एक खास और प्रिय भोग अर्पित करने से आपकी पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है? जी हां, हर देवी को एक विशेष प्रसाद प्रिय है, जिसे चढ़ाने से वह जल्दी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं।

तो आइए, जानते हैं कि इस नवरात्रि आपको किस दिन मां के किस स्वरूप को कौन सा भोग लगाना है।

 

पहला दिन (प्रतिपदा): मां शैलपुत्री

भोग: गाय का शुद्ध घी
मां शैलपुत्री को आरोग्य की देवी माना जाता है। इन्हें शुद्ध घी का भोग लगाने या घी से बनी चीजों (जैसे हलवा) को अर्पित करने से भक्त को हर तरह की बीमारियों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और वह निरोगी जीवन का वरदान प्राप्त करता है।

दूसरा दिन (द्वितीया): मां ब्रह्मचारिणी

भोग: शक्कर और पंचामृत
मां ब्रह्मचारिणी तप और संयम की देवी हैं। इन्हें शक्कर का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त और उसके परिवार के सदस्यों को लंबी आयु (दीर्घायु) का आशीर्वाद मिलता है।

तीसरा दिन (तृतीया): मां चंद्रघंटा

भोग: दूध या दूध से बनी मिठाई (जैसे खीर, रबड़ी)
मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन के सारे दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। इन्हें दूध से बनी चीजों का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सभी दुखों से मुक्ति दिलाकर परम आनंद का वरदान देती हैं।

चौथा दिन (चतुर्थी): मां कूष्मांडा

भोग: मालपुआ
अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग अति प्रिय है। उनकी पूजा करके मालपुआ का भोग लगाने और फिर उसे गरीबों में दान करने से व्यक्ति की बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता तेज होती है।

पांचवां दिन (पंचमी): मां स्कंदमाता

भोग: केला
संतान सुख का वरदान देने वाली मां स्कंदमाता को केला बहुत पसंद है। इन्हें केले का भोग लगाने से भक्तों को स्वस्थ शरीर और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।

छठा दिन (षष्ठी): मां कात्यायनी

भोग: शहद
मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना बेहद शुभ फलदायी होता है। ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और साधक को सुंदर रूप और व्यक्तित्व का वरदान देती हैं, जिससे वह दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ पाता है।

सातवां दिन (सप्तमी): मां कालरात्रि

भोग: गुड़
संकटों का नाश करने वाली मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से मां भक्त की अकाल मृत्यु जैसे संकटों से रक्षा करती हैं और उसे हर तरह के भय से मुक्त कर देती हैं।

आठवां दिन (अष्टमी): मां महागौरी

भोग: नारियल
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा का विशेष विधान है। इन्हें नारियल का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की संतान संबंधी सभी परेशानियों को दूर करती हैं, जिससे घर में खुशहाली आती है।

नौवां दिन (नवमी): मां सिद्धिदात्री

भोग: तिल
सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री को नवमी के दिन तिल का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से साधक को जीवन में आने वाले हर अनहोनी और खतरे से बचाव का आशीर्वाद मिलता है।