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March 18 2026 11:30 am

Navratri 2025 : दूसरे दिन करें माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें कथा, भोग और प्रिय रंग

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News India Live, Digital Desk: शारदीय नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित होते हैं. पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा के बाद, दूसरे दिन तप और त्याग की देवी माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है. "ब्रह्म" का अर्थ है तपस्या और "चारिणी" का अर्थ है आचरण करने वाली. इस प्रकार, ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली देवी. चलिए जानते हैं नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा विधि, कथा और महत्व के बारे में.

कौन हैं माँ ब्रह्मचारिणी?

अपने पूर्वजन्म में माँ ब्रह्मचारिणी ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था और भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. नारद जी के कहने पर उन्होंने हज़ारों वर्षों तक सिर्फ फल-फूल और फिर सूखे बिल्व पत्र खाकर तप किया. बाद में उन्होंने वो भी त्याग दिया, जिस वजह से उनका एक नाम 'अपर्णा' भी पड़ा. उनकी इस कठिन तपस्या से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया. अंत में, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें भगवान शिव को पति रूप में पाने का वरदान दिया. माँ का यह स्वरूप धैर्य, त्याग और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है.

पूजा की सरल विधि:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें. इस दिन पूजा में सफ़ेद या नारंगी रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.
  2. पूजा की चौकी पर माँ ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
  3. माँ को गंगाजल से स्नान कराएं और फिर फूल, अक्षत, रोली, और चंदन अर्पित करें.
  4. माँ ब्रह्मचारिणी को सफ़ेद रंग की वस्तुएं बहुत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें सफ़ेद फूल (जैसे चमेली) ज़रूर चढ़ाएं.

माँ का प्रिय भोग और रंग:

  • प्रिय भोग: माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर (चीनी) और पंचामृत का भोग अत्यंत प्रिय है. ऐसी मान्यता है कि माँ को चीनी का भोग लगाने से उपासक और उसके परिवार के सदस्यों को लंबी आयु का वरदान मिलता है.
  • शुभ रंग: नवरात्रि के दूसरे दिन का शुभ रंग रॉयल ब्लू (Royal Blue) यानी शाही नीला है. यह रंग समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है.

माँ ब्रह्मचारिणी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti)

जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥

ब्रह्मा मंत्र है नाम तुम्हारा।
जिसको जपे वो उतरे पारा॥

जो मन कामनी चाहे कोई।
तेरी कृपा से सोई होई॥

करूं आरती तेरी मैया।
पार लगा दो मेरी नैया॥

क्यों खास है इनकी पूजा?

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों के अंदर तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम जैसे गुणों का विकास होता है. इनकी कृपा से व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली किसी भी कठिनाई का सामना दृढ़ता से कर पाता है.