देश के 21 राज्यों में कुदरत का तांडव 80KM की रफ्तार से चलेगी आंधी, दिल्ली यूपी बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश और ओले
News India Live, Digital Desk: मार्च के महीने में आसमान से आफत बरसने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 से 72 घंटों के भीतर उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर मध्य भारत तक मौसम का रौद्र रूप देखने को मिलेगा। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू होने वाला है।
1. इन राज्यों के लिए 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट (State-wise Alert)
| क्षेत्र | प्रभावित राज्य | मुख्य चेतावनी |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड। | 80 किमी/घंटा की रफ्तार से अंधड़, भारी बारिश और ओलावृष्टि। |
| पूर्वी भारत | उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा। | गरज-चमक, वज्रपात (Lightning) और मध्यम से भारी बारिश। |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ (महाराष्ट्र)। | ओलावृष्टि और तेज हवाओं के साथ बौछारें। |
2. प्रमुख शहरों का हाल (City Forecast: 20-21 March 2026)
दिल्ली-एनसीआर: शुक्रवार (20 मार्च) की दोपहर से मौसम बदलेगा। शनिवार को भारी बारिश और 60-70 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। तापमान में 5-7°C की बड़ी गिरावट आएगी।
उत्तर प्रदेश (लखनऊ/कानपुर/नोएडा): पश्चिमी यूपी में ओलावृष्टि की संभावना है। लखनऊ में शनिवार को तेज आंधी के साथ बारिश का अलर्ट है।
पंजाब और हरियाणा: अमृतसर, लुधियाना और चंडीगढ़ में भारी बारिश और ओले गिरने की चेतावनी है, जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है।
बिहार (पटना/मुजफ्फरपुर): 21 मार्च को पूरे प्रदेश में वज्रपात (Thunderbolt) और आंधी का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है।
3. 80 किमी की रफ्तार: क्या होगा असर? (Impact of High Winds)
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 80 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं 'तूफान' की श्रेणी में आती हैं, जिससे:
इंफ्रास्ट्रक्चर: बिजली के खंभे, मोबाइल टावर और पेड़ गिर सकते हैं।
यातायात: रेल और हवाई सेवाओं में देरी या डायवर्जन की संभावना है।
खेती: गेहूं, सरसों और आम की बौर (मंजर) को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
4. IMD की सुरक्षा एडवाइजरी (Safety Guidelines)
यात्रा टालें: खराब मौसम के दौरान लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें।
बिजली से बचाव: गरज-चमक के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करें और बिजली के खंभों से दूर रहें।
किसानों के लिए: कटी हुई फसलों को तिरपाल से ढकें और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर रखें।