राजस्थान में कुदरत का कहर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कांपा प्रदेश, 6 डिग्री गिरा पारा किसानों की बढ़ी धड़कनें
News India Live, Digital Desk: राजस्थान में मौसम ने अचानक ऐसी करवट ली है कि चैत्र के महीने में सावन और पूस का अहसास होने लगा है। बीते 24 घंटों के दौरान मरुधरा के कई जिलों में हुई झमाझम बारिश और भीषण ओलावृष्टि (Hailstorm) ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहां एक ओर इस बदलाव से तपती गर्मी से राहत मिली है, वहीं खेतों में तैयार खड़ी फसलों पर बरसे इन 'सफेद ओलों' ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। मौसम विभाग (IMD) ने आज भी प्रदेश के कई हिस्सों में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी करते हुए ओलावृष्टि और तेज अंधड़ की चेतावनी दी है।
तापमान में 6 डिग्री की भारी गिरावट, शहरों में बढ़ी ठिठुरन
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर सहित दर्जनों शहरों में दिन का तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। धूल भरी आंधी और बादलों की आवाजाही के बीच हुई बारिश ने फिजा में अचानक ठंडक घोल दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अप्रैल की शुरुआत में इस तरह का बदलाव असामान्य है, जिससे लोगों को वायरल बीमारियों के प्रति भी सतर्क रहने की जरूरत है।
खेतों में बिछी 'सफेद चादर', सरसों और गेहूं की फसल तबाह
इस बेमौसम बरसात ने सबसे ज्यादा चोट राजस्थान के अन्नदाता पर की है। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर और भरतपुर जैसे कृषि प्रधान जिलों में चने के आकार के ओले गिरे हैं। खेतों में पककर तैयार खड़ी सरसों, गेहूं और चने की फसलें ओलों की मार से जमीन पर बिछ गई हैं। किसानों का कहना है कि कटाई के ऐन वक्त पर कुदरत के इस प्रहार ने उन्हें बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। कई इलाकों में खेतों में पानी भरने से कटी हुई फसलें भी सड़ने लगी हैं।
प्रशासन हुआ अलर्ट, खराबे के सर्वे के दिए निर्देश
फसलों को हुए भारी नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर प्रभावित जिलों के कलेक्टरों ने पटवारियों और कृषि विभाग की टीमों को फील्ड में उतरने के आदेश दिए हैं। ओलावृष्टि से हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन (Girdawari) शुरू कर दिया गया है, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा और राहत प्रदान की जा सके।
सावधानी की अपील: बिजली और आंधी से रहें दूर
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों तक प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। विभाग ने वज्रपात (Lightning) की आशंका जताते हुए लोगों को ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और कच्चे मकानों से दूर रहने की सलाह दी है। अप्रैल के पहले सप्ताह तक मौसम में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जिसके बाद ही गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल सकता है।