Nature's fury in Jammu and Kashmir: कठुआ में बादल फटने से भारी तबाही, 4 लोगों की दर्दनाक मौत
जम्मू-कश्मीर की शांत वादियां एक बार फिर कुदरत के रौद्र रूप का शिकार हुई हैं। मानसून की भारी बारिश के बीच, कठुआ जिले के जंगलोट इलाके में बादल फटने (Cloudburst) से आई अचानक बाढ़ (Flash Flood) ने भारी तबाही मचा दी है, जिसमें अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह इस सीजन में क्षेत्र में हुई इस तरह की एक और विनाशकारी घटना है, जिसने स्थानीय जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है और एक गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
देर रात हुई इस घटना के बाद चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि वह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले गया, जिसमें घर, मवेशी और यहां तक कि इंसान भी शामिल थे। बचाव दल मौके पर हैं और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्ते एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
तबाही का खौफनाक मंजर: क्या-क्या हुआ नुकसान?
यह आपदा रात के अंधेरे में आई, जिससे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पानी और मलबे का सैलाब जब रिहायशी इलाके में घुसा तो मंजर बेहद खौफनाक था।
- चार लोगों की मौत: आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस जल प्रलय में अब तक चार शव बरामद किए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि मलबे में और भी लोग दबे हो सकते हैं, जिसके चलते हताहतों की संख्या बढ़ सकती है।
- रेलवे ट्रैक को भारी नुकसान: बाढ़ ने एक रेलवे अंडरपास को पूरी तरह से बहा दिया है, जिससे जम्मू-पठानकोट रेल लाइन पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है। यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लिंक है।
- घर और मवेशी बहे: बाढ़ के तेज बहाव में कई कच्चे और पक्के मकान या तो ढह गए या पूरी तरह से बह गए। इसके साथ ही, कई मवेशी भी पानी की भेंट चढ़ गए, जिससे स्थानीय किसानों और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
- सड़कें बनीं दरिया, संपर्क टूटा: इलाके को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों और पुलियों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है, जिससे बचाव कार्यों में बाधा आ रही है।
क्या होता है बादल का फटना? (Why it is so destructive in mountains)
'बादल फटना' बारिश का एक चरम रूप है। जब किसी एक बहुत ही छोटी सी जगह पर (लगभग 20-30 वर्ग किलोमीटर के दायरे में) एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर या उससे भी अधिक बारिश हो जाती है, तो उसे बादल फटना कहते हैं। मैदानी इलाकों की तुलना में यह घटना पहाड़ों पर कहीं ज़्यादा विनाशकारी होती है क्योंकि:
- तेज ढलान: पहाड़ों की ढलान के कारण पानी रुकता नहीं है, बल्कि अत्यंत तेज गति से नीचे की ओर बहता है।
- मलबा और पत्थर: यह तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर, और मलबा लेकर चलता है, जिससे इसकी विनाशकारी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
प्रशासन और बचाव दल मौके पर मुस्तैद
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं।
- बचाव अभियान जारी: बचावकर्मी रात से ही लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने का काम किया जा रहा है।
- हाई अलर्ट जारी: प्रशासन ने इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
- मौसम विभाग की चेतावनी: मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले 24-48 घंटों में भी जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में बादल फटने जैसी चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिसे विशेषज्ञ सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से जोड़कर देख रहे हैं। यह घटना एक और रिमाइंडर है कि हमें पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन को लेकर और अधिक गंभीर होने की जरूरत है।