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TMC Crisis Deepens: ममता बनर्जी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! सबसे भरोसेमंद सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी हुए बागी, अमित शाह से की मुलाकात

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही बगावत की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए शनिवार का दिन एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लेकर आया। टीएमसी के सबसे वरिष्ठ और दिल्ली की राजनीति में पार्टी का चेहरा माने जाने वाले लोकसभा सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय खुलकर बागी खेमे में शामिल हो गए हैं।

सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार को नई दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ टीएमसी की एक और बागी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं। सूत्रों के मुताबिक, भूपेंद्र यादव से मिलने के बाद सुदीप बंद्योपाध्याय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की है, जिसके बाद बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल बेहद तेज हो गई है।

बागी गुट के पत्र पर किए दस्तखत, संख्या बढ़कर हुई 20

न्यूज रिपोर्टों के अनुसार, कोलकाता उत्तर सीट से सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने टीएमसी के असंतुष्ट (बागी) खेमे के उस आधिकारिक पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष से संसद के भीतर एक अलग ब्लॉक के तौर पर पहचान मांगी गई है।

बागी गुट के वरिष्ठ नेता जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने पहले दावा किया था कि उनके साथ 19 लोकसभा सदस्यों का समर्थन है। अब सुदीप बंद्योपाध्याय के आने के बाद बागी सांसदों की कुल संख्या बढ़कर 20 हो गई है। बागी गुट की कद्दावर नेता काकोली घोष दस्तीदार पहले ही यह साफ कर चुकी हैं कि जैसे ही लोकसभा स्पीकर से उनके गुट को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस संसदीय ग्रुप के रूप में मान्यता मिल जाएगी, यह पूरा गुट संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन सौंप देगा। ये सभी बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने वाले हैं।

कुणाल घोष का तीखा हमला- सुदीप बंद्योपाध्याय को कहा 'गद्दार'

सुदीप बंद्योपाध्याय के इस कदम पर कोलकाता में ममता बनर्जी के प्रति वफादार नेताओं की ओर से बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने बंद्योपाध्याय पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें 'गद्दार' करार दिया।

कुणाल घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा:

"सुदीप दा की व्यक्तिगत असुरक्षा और पद-सत्ता की भूख के कारण ही टीएमसी ने तापस रॉय और सजल घोष जैसे कई महत्वपूर्ण नेताओं को बीजेपी के हाथों खो दिया था। उन्होंने न केवल ममता बनर्जी के भरोसे का खून किया है, बल्कि उन जमीनी कार्यकर्ताओं की पीठ में भी छुरा घोंपा है जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में रात-दिन एक करके उन्हें जिताया था।"

घोष ने एक पुराना वाकया साझा करते हुए बताया कि जब हाल ही में सीआईडी (CID) ने ममता बनर्जी के आवासीय परिसर पर छापा मारा था, तब सुदीप दा ने फोन करके पूछा था कि वे कहां हैं। जब कुणाल ने कहा कि वे दीदी के घर पर ही हैं, तो सुदीप ने कहा कि उनकी पत्नी नयना (TMC विधायक) भी वहां आ रही हैं, लेकिन वे कभी नहीं आईं। इसके बजाय अब सुदीप दा खुद बीजेपी के दरवाजे पर पहुंच गए हैं।

वफादार बनाम बागी: टीएमसी के भीतर नेताओं की ताजा स्थिति

इस समय तृणमूल कांग्रेस के भीतर कौन से नेता ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और कौन बगावत के रास्ते पर हैं, इसे आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

ममता बनर्जी का बड़ा एक्शन: सायोनी घोष और माला रॉय की छुट्टी

पार्टी के भीतर मचे इस घमासान और संगठन पर अपनी ढीली होती पकड़ को दोबारा मजबूत करने के उद्देश्य से टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने बगावती सुर अपनाए हुए नेताओं को पदों से हटाना शुरू कर दिया है:

  1. सायोनी घोष पर गाज: सांसद सायोनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनकी जगह युवा नेता अर्णब बनर्जी को नया यूथ विंग प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया है।

  2. माला रॉय की विदाई: कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय को भी 'तृणमूल महिला कांग्रेस' के अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया है। उनके स्थान पर नदिया जिले के कालिगंज से विधायक अलीफा अहमद को महिला संगठन की कमान सौंपी गई है।

सौगत और कल्याण बनर्जी का बयान:

वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने कहा कि वे सुदीप बंद्योपाध्याय के इस कदम से बेहद आहत हैं, क्योंकि तीन-चार दिन पहले ही सुदीप ने उनसे कहा था कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं और जो भी करेंगे साथ मिलकर करेंगे। वहीं, कल्याण बनर्जी ने इस बगावत को कमतर आंकते हुए कहा कि कई लोग पहले भी पार्टी छोड़ चुके हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जब ये लोग दोबारा चुनाव मैदान में उतरेंगे, तो बंगाल की जनता इन्हें अच्छी तरह सबक सिखाएगी। बहरहाल, 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर का यह बिखराव पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले आया है।

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