'विरोध प्रदर्शनों का असली चेहरा आया सामने': धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, बांग्लादेश का हवाला देकर किया बड़ा हमला
देश की राजनीति में एक बार फिर तीखा वैचारिक और राजनीतिक घमासान मच गया है। जुलाई महीने में पेपर लीक और विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद से सुर्खियों में रहे बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर बेहद तीखा हमला बोला है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और विपक्षी दल भारत की मजबूत राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए मासूम छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक ढाल के रूप में कर रहे हैं। इस बयान के सामने आने के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
छात्रों को ढाल बनाकर अराजकता फैलाने का लगाया गंभीर आरोप
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि देश के विभिन्न मुद्दों पर छात्रों के नाम पर होने वाले इस तरह के आंदोलन असल में देश में अराजकता फैलाने और हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए युवा पीढ़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
प्रधान ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब चुनावी नतीजे विपक्ष के मनमुताबिक नहीं आते हैं, तो वे बार-बार देश की जनता के जनादेश का अपमान करना शुरू कर देते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग हमेशा अपने हाथ में संविधान की प्रति लेकर घूमने का नाटक करते हैं, वे असल में संविधान-विरोधी कृत्यों में लिप्त हैं और केवल सत्ता की लालसा में लगातार संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन का दिया हवाला
अपने इस तीखे हमले के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) में हुए हालिया राजनीतिक घटनाक्रम का भी विशेष रूप से हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में 'Gen Z' के विद्रोह और वहां जिस तरह से अचानक सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई गई थी, उसी तर्ज पर भारत में भी कुछ राजनीतिक तत्व अस्थिरता पैदा करने की फिराक में हैं।
प्रधान ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित और छात्र कल्याण के नाम पर शुरू किए गए इन तमाम प्रदर्शनों का असली चेहरा अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। जो लोग विदेशी ताकतों या अलोकतांत्रिक तरीकों के सहारे देश में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहे हैं, उन्हें यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता केवल और केवल लोकतांत्रिक चुनावों और प्रक्रियाओं के जरिए ही संभव है। देश की जागरूक जनता इस तरह की किसी भी अलोकतांत्रिक और अराजक मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
कांग्रेस पार्टी और पवन खेड़ा का तीखा पलटवार
धर्मेंद्र प्रधान के इस आक्रामक बयान के बाद कांग्रेस पार्टी भी पूरी तरह से बचाव की मुद्रा में आ गई है और बीजेपी पर पलटवार करने में देर नहीं लगाई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बीजेपी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य बीजेपी नेताओं के उन बयानों का कड़ा विरोध किया, जिनमें भारत के विरोध-प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश की उथल-पुथल से की गई थी।
पवन खेड़ा ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों के माध्यम से सत्ता बदलना और सरकार से सवाल पूछना ही किसी भी मजबूत विपक्ष का मुख्य लोकतांत्रिक लक्ष्य होता है, इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने बीजेपी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि आज सत्ताधारी पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं, असहमतियों और जन-आलोचनाओं को सहन करने की अपनी क्षमता पूरी तरह खो चुकी है, इसलिए वे विपक्ष की हर आवाज को दबाने के लिए इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
किस बात को लेकर गरमाई है देश की सियासत
राजनीतिक गलियारों में यह पूरा नया विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं में गड़बड़ी के कथित आरोपों को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच शुरू हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान 'AISA' की अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा दिए गए कुछ बयानों ने आग में घी का काम किया है।
अपने बयानों में नेहा बोरा और प्रशांत भूषण ने बांग्लादेश के 'जेन जी' आंदोलन का विशेष जिक्र करते हुए इसे एक बड़ी 'सत्ता परिवर्तन की लड़ाई' बताया था। इसी बयान को आधार बनाते हुए बीजेपी ने अब कांग्रेस और विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों तरफ से राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के तहत आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।