Barapullah Flyover: जिस बारापुला से थी फर्राटेदार रफ्तार की उम्मीद, वही बना सिरदर्द; अब बदलेगा डिजाइन और सुधरेगा ट्रैफिक फ्लो
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दक्षिण और पूर्वी दिल्ली के बीच सिग्नल-फ्री आवाजाही और यात्रा समय को घटाने के लिए तैयार किया गया महत्वाकांक्षी बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर (Barapullah Elevated Corridor) आज खुद लाखों वाहन चालकों के लिए दैनिक सिरदर्द और ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान जब इस एलिवेटेड रोड के पहले चरण की शुरुआत हुई थी, तब दावा किया गया था कि सराय काले खां से जवाहरलाल नेहरू (JLN) स्टेडियम और आईएनए (INA) तक का सफर महज 10 से 12 मिनट में पूरा हो जाएगा। शुरुआत में इसने रिंग रोड और मथुरा रोड के दबाव को काफी हद तक कम भी किया, लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे ट्रैफिक वॉल्यूम बढ़ा और आगे के फेज के विस्तार में लेटलतीफी हुई, इस कॉरिडोर के एग्जिट और एंट्री प्वाइंट्स 'बॉटलनेक' (चोक प्वाइंट) में तब्दील हो गए। आज स्थिति यह है कि पीक आवर्स के दौरान वाहन चालक बारापुला पर चढ़ने और उतरने के चक्कर में 30 से 45 मिनट तक रेंगने को मजबूर हैं।
डिजाइन की बुनियादी खामियां बनीं परेशानी का सबब: कहां फंसता है ट्रैफिक
यातायात और अर्बन प्लानिंग विशेषज्ञों के अनुसार, बारापुला फ्लाईओवर की मौजूदा दुर्दशा के पीछे इंजीनियरिंग डिजाइन और ट्रैफिक सर्कुलेशन की कुछ बुनियादी खामियां हैं।
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आईएनए और रिंग रोड एग्जिट का चोक प्वाइंट: जब बारापुला का एलिवेटेड डेक आईएनए मार्केट और अरबिंदो मार्ग के पास उतरता है, तो वहां कई दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक अचानक एक संकरी 2-लेन सड़क पर आपस में मिल जाता है (Traffic Merging Conflict)। यहां से एम्स, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली हाट और दक्षिण दिल्ली की ओर मुड़ने वाले वाहनों के लिए पर्याप्त डिसपर्सल स्पेस नहीं है।
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सराय काले खां और आश्रम की तरफ बैक-अप जाम: पूर्वी दिल्ली और नोएडा से आने वाले वाहन जब सराय काले खां से बारापुला पर चढ़ते हैं, तो आश्रम अंडरपास और डीएनडी कनेक्टर्स के वाहनों की भीड़ वहां पहले से मौजूद होती है। सुबह और शाम के पीक समय में यह जाम कई किलोमीटर पीछे तक फैल जाता है।
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अधूरे फेज-3 का भारी दबाव: मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां को जोड़ने वाले फेज-3 के निर्माण में वर्षों की देरी और जमीन अधिग्रहण के पेंच के कारण जो अतिरिक्त ट्रैफिक लोड सीधे ट्रांस-यमुना की तरफ निकलना चाहिए था, वह बीच रास्ते में ही फंस रहा है।
अब बदलेगा बारापुला का डिजाइन: पीडब्ल्यूडी और ट्रैफिक पुलिस का मास्टरप्लान
समस्या की गंभीरता और दैनिक शिकायतों को देखते हुए दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर सेंटर (UTTIPEC) के साथ मिलकर बारापुला के मौजूदा डिजाइन को री-इंजीनियर करने का बड़ा फैसला लिया है। नए मास्टरप्लान के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं:
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नए लूप और डिसपर्सल रैंप (Dedicated Exit Loops): आईएनए और अरबिंदो मार्ग के पास उतरने वाले ट्रैफिक को सीधे बिना रुके निकालने के लिए अतिरिक्त डायवर्जन लूप्स और एलिवेटेड रैंप बनाए जाएंगे, ताकि एम्स और रिंग रोड की तरफ जाने वाले वाहनों को जमीनी ट्रैफिक सिग्नल का सामना न करना पड़े।
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मर्जिंग पॉइंट्स की लेन चौड़ीकरण: जहां भी एलिवेटेड कॉरिडोर जमीन पर उतरता है, वहां सर्विस रोड और मुख्य कैरिजवे के बीच की डिवाइडिंग ग्रिल्स और फुटपाथ को रि-अलाइन करके अतिरिक्त लेन स्पेस तैयार किया जाएगा। इससे अचानक ब्रेक लगने और गाड़ियों की गति धीमी होने की समस्या खत्म होगी।
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स्मार्ट सिग्नल और लेन सेग्रीगेशन: सराय काले खां एंट्री प्वाइंट पर भौतिक डिवाइडर लगाकर भारी वाहनों, बसों और निजी कारों के लिए अलग-अलग लेन बनाई जाएगी, ताकि चढ़ाई के वक्त आपस में गाड़ियां न उलझें। इसके साथ ही आईटीएमएस (Intelligent Traffic Management System) के जरिए वाहनों के दबाव के आधार पर सिग्नल्स का टाइमिंग खुद एडजस्ट होगा।
रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों को कैसे मिलेगी राहत
बारापुला कॉरिडोर प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख से अधिक वाहनों का भार संभालता है। जब इसका डिजाइन संशोधित होकर पूरी तरह लागू हो जाएगा, तो इसका सीधा लाभ नोएडा, गाजियाबाद, पूर्वी दिल्ली से एम्स, सफदरजंग अस्पताल, चाणक्यपुरी, आईजीआई एयरपोर्ट और गुरुग्राम की ओर जाने वाले दैनिक यात्रियों को मिलेगा।
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यात्रा समय में 60% तक की कमी: जो दूरी तय करने में आज पीक समय में 40 मिनट लगते हैं, वह सुचारू डिजाइन के बाद घटकर मात्र 12 से 15 मिनट रह जाएगी।
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ईंधन और पर्यावरण की बचत: जाम में घंटों खड़े रहकर आइडलिंग करने वाले वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण और ईंधन की बर्बादी पर प्रभावी लगाम लगेगी।
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रिंग रोड और मथुरा रोड पर दबाव घटेगा: बारापुला पर सुचारू प्रवाह सुनिश्चित होने से मुख्य रिंग रोड (आश्रम-लाजपत नगर-मूलचंद स्ट्रेच) पर वाहनों का दबाव स्वतः 25% तक कम हो जाएगा।
निर्माण समय-सीमा और दिल्ली सरकार की निगरानी
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, डिजाइन संशोधनों के लिए फिजिबिलिटी स्टडी और सॉयल टेस्टिंग का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि मौजूदा ट्रैफिक को पूरी तरह बंद किए बिना रात के समय गर्डर और लूप्स लगाने का काम पूरा किया जा सके। सरकार ने निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि फेज-3 के बचे हुए काम और इन सुधारात्मक लूप्स के निर्माण में समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए। यदि यह रीडिजाइन योजना समय पर जमीन पर उतरती है, तो बारापुला वास्तव में अपने मूल उद्देश्य को पूरा करते हुए दिल्लीवासियों को जाम-मुक्त और तेज रफ्तार सफर का अनुभव करा सकेगा।