स्टालिन की DMK ने ठुकराया 'बंगाल-केरल मॉडल', थलपति विजय की TVK संग गठबंधन की कोशिशों पर फेरा पानी

स्टालिन की DMK ने ठुकराया 'बंगाल-केरल मॉडल', थलपति विजय की TVK संग गठबंधन की कोशिशों पर फेरा पानी

दक्षिण भारत के सबसे रसूखदार राजनीतिक सूबे तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त जबरदस्त उबाल आ चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बने विपक्षी 'INDIA' गठबंधन में थलपति विजय की नवोदित पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को एक साथ लाने की कवायद शुरू हुई थी, जिसे DMK ने सिरे से खारिज कर दिया है। दलित केंद्रित दल वीसीके (VCK) और कांग्रेस द्वारा दिए गए 'बंगाल-केरल फॉर्मूले' को मानने से इनकार करते हुए स्टालिन की पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जमीनी हकीकत बाकी प्रदेशों से बिल्कुल जुदा है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच DMK और कांग्रेस के रिश्तों में भी गंभीर दरार आ गई है।

क्या है बंगाल-केरल मॉडल? जिसे तमिलनाडु में लागू करने की थी तैयारी

राजनीतिक गलियारों में इस वक्त 'बंगाल-केरल मॉडल' की खूब चर्चा हो रही है। यह एक ऐसा रणनीतिक फॉर्मूला है जिसके तहत क्षेत्रीय पार्टियां राज्य स्तर पर तो एक-दूसरे के धुर विरोधी के रूप में चुनाव लड़ती हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार या भाजपा के विरोध में एकजुट होकर 'INDIA' गठबंधन का हिस्सा बनी रहती हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC), वामपंथी दल और कांग्रेस राज्य में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते हैं। ठीक इसी तरह केरल में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) और वामपंथियों के एलडीएफ (LDF) के बीच सत्ता के लिए सीधा मुकाबला होता है। हालांकि, लोकसभा या राष्ट्रीय मुद्दों पर ये सभी दल दिल्ली में एक मंच पर नजर आते हैं। वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन और कांग्रेस इसी तर्ज पर विजय की TVK और स्टालिन की DMK को राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ जोड़ना चाहते थे।

DMK का तीखा पलटवार: कांग्रेस ने मंत्रिपद के लालच में पीठ में छुरा घोंपा

इस प्रस्तावित फॉर्मूले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कोइम्बटूर से DMK सांसद गणपति पी. राजकुमार ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सिर्फ मंत्रिपद हासिल करने और सत्ता की मलाई चाटने के लिए थलपति विजय की TVK से हाथ मिलाया है। सांसद ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने DMK की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है और अब वह अपनी कमियों को छिपाने के लिए वीसीके (VCK) को एक दूत या मध्यस्थ की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि स्टालिन नेतृत्व को मनाया जा सके। उन्होंने साफ किया कि DMK का शीर्ष नेतृत्व इस खोखले प्रस्ताव को कभी स्वीकार नहीं करेगा।

विजय की TVK पर उठाए सवाल: बिना किसी सांसद वाली पार्टी के लिए इतनी बेताबी क्यों?

तमिलनाडु की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए DMK सांसद ने थलपति विजय की पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने तर्क दिया कि जिस TVK के पास राष्ट्रीय संसद में एक भी सांसद नहीं है, उसे 'INDIA' ब्लॉक का हिस्सा बनाने के लिए कांग्रेस इतनी बेताब क्यों है? इस पर विपक्षी दलों को गंभीरता से आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि भाजपा हमेशा से क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की कोशिश करती रही है और DMK इसके खिलाफ अपनी वैचारिक लड़ाई मजबूती से लड़ रही है। सांसद के बयानों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि तमिलनाडु में फिलहाल कांग्रेस और DMK के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और इस विवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को एक बड़ा झटका लग सकता है।

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