महाराष्ट्र में फिर तख्तापलट की आहट: उद्धव ठाकरे की इमरजेंसी बैठक से कई सांसद गायब; मोबाइल फोन भी हुए बंद
महाराष्ट्र की सरगर्मी से भरी सियासत में एक बार फिर किसी बहुत बड़े सियासी उलटफेर के साफ संकेत मिलने लगे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अभी कुछ ही दिन बीते थे कि उद्धव बालासाहेब ठाकरे (Shivsena UBT) गुट के खेमे में अचानक भारी बेचैनी और हड़कंप मच गया है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज रविवार को मुंबई स्थित अपने आवास 'मातोश्री' पर दिल्ली में मौजूद अपने सभी नवनिर्वाचित सांसदों को तुरंत पहुंचने का फरमान सुनाते हुए एक बेहद संवेदनशील और आपातकालीन बैठक बुलाई थी। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल बैठक के शुरू होने से ठीक पहले पार्टी के कई महत्वपूर्ण सांसदों के अचानक गायब होने और उनके मोबाइल फोन बंद आने से उद्धव गुट की धड़कनें तेज हो गई हैं। लाइव हिन्दुस्तान के विशेष राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख हिमांशु झा की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि क्या लोकसभा में एनडीए का नंबर बढ़ने वाला है और मातोश्री के भीतर इस वक्त क्या चल रहा है।
शिरडी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे का फोन बंद: परिवार और पीए समेत अचानक हुए अंडरग्राउंड
उद्धव ठाकरे ने यह आपात बैठक दोपहर ठीक 12:30 बजे मातोश्री पर आयोजित की थी, जिसका मुख्य एजेंडा संसद के आगामी सत्र को लेकर रणनीति बनाना और अपने कुनबे को बिखरने से बचाना था। लेकिन बैठक से पहले ही शिरडी लोकसभा सीट से शिवसेना यूबीटी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे रहस्यमयी ढंग से पहुंच से बाहर हो गए हैं। रविवार सुबह से ही उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है। राजनीतिक सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, वाकचौरे पिछले दो दिनों से अपने परिवार के साथ किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं और शिरडी स्थित उनके सरकारी आवास पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि उनका निजी सहायक (PA) भी उनके साथ मौजूद नहीं है और उसका भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है, जिसने उद्धव गुट के भीतर बगावत के डर को और गहरा कर दिया है।
संजय जाधव और नागेश पाटिल ने भी बैठक से बनाई दूरी, क्या पाला बदलने की है तैयारी
मातोश्री की इस संकटकालीन बैठक से दूरी बनाने वाले नेताओं में सिर्फ भाऊसाहेब वाकचौरे ही अकेले नहीं हैं। पार्टी के दो अन्य कद्दावर सांसद संजय जाधव और नागेश पाटिल अष्टिकर ने भी ऐन वक्त पर इस बैठक में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, इन दोनों सांसदों ने पार्टी आलाकमान को संदेश भिजवाया है कि वे कुछ बेहद अपरिहार्य और जरूरी निजी कारणों से आज मुंबई की इस बैठक का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। आपको बता दें कि इस समय लोकसभा में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पास कुल 9 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में एकमात्र चेहरा संजय राउत बचे हैं। ऐसे में कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 3 प्रमुख चेहरों का एक साथ बैठक से नदारद होना उद्धव ठाकरे के लिए बहुत बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो रहा है।
क्या है मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' जिससे दहल उठा है विपक्ष
मुंबई से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के 'ऑपरेशन टाइगर' (Operation Tiger) की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का दावा है कि इसी गुप्त ऑपरेशन के इनपुट मिलने के बाद उद्धव ठाकरे ने आनन-फानन में अपने सभी सांसदों को मुंबई तलब किया था। दरअसल, शिंदे गुट और सत्तापक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने पिछले कुछ दिनों में लगातार यह सनसनीखेज दावा किया है कि उद्धव गुट के 9 में से कम से कम 7 लोकसभा सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सीधे संपर्क में हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद सत्र शुरू होने से पहले ही ये सांसद पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं, जिससे लोकसभा में एनडीए (NDA) का संख्या बल और मजबूत हो जाएगा।
इन 9 सांसदों को एकजुट रखने की चुनौती, मातोश्री पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
उद्धव ठाकरे ने इस आपात बैठक में जिन सभी लोकसभा सांसदों को हर हाल में उपस्थित रहने का कड़ा व्हिप जारी किया था, उनमें संजय देशमुख, नागेश पाटील, संजय जाधव, राजाभाऊ वाजे, अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटील, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमराजे निंबालकर के नाम शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले पंडितों का मानना है कि यदि भाऊसाहेब वाकचौरे और उनके साथी सांसद इस बैठक में नहीं पहुंचते हैं, तो यह शिवसेना (यूबीटी) के वजूद के लिए दूसरा सबसे बड़ा ऐतिहासिक विभाजन साबित हो सकता है। फिलहाल मातोश्री के बाहर भारी पुलिस बल और मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ है और पल-पल बदलते घटनाक्रम ने सूबे की सियासत को बेहद रोमांचक मोड़ पर ला खड़ा किया है।