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कहीं 'अंतरात्मा की आवाज' तो कहीं 'गद्दार'... झारखंड और कर्नाटक की क्रॉस वोटिंग ने कैसे पलटा पूरा खेल

भारतीय राजनीति में शुचिता और सिद्धांतों के दावों के बीच एक बार फिर 'क्रॉस वोटिंग' (पालाबदल) का जिन्न बाहर आ गया है। झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक के विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों ने न सिर्फ देश का सियासी गणित बिगाड़ दिया है, बल्कि देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों— भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के राजनीतिक दोहरे मापदंडों को भी पूरी तरह जनता के सामने उजागर कर दिया है।

इस चुनावी समर में सबसे दिलचस्प नजारा यह देखने को मिला कि जब विपक्षी दल का कोई विधायक पाला बदलता है, तो उसे 'अंतरात्मा की आवाज' बताकर उसका भव्य स्वागत किया जाता है, लेकिन जब अपनी ही पार्टी का कोई विधायक बगावत करता है, तो उसे तुरंत 'गद्दार' और धन-बल का शिकार घोषित कर दिया जाता है।

झारखंड में इंडी गठबंधन को बड़ा झटका: कांग्रेस के वोट कटे, एनडीए का निर्दलीय प्रत्याशी जीता

झारखंड के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन को अपने ही विधायकों की भीतरघात और क्रॉस-वोटिंग के कारण एक जीती-जिताई अतिरिक्त सीट गंवानी पड़ गई। इस चुनाव के गणित को समझें तो झारखंड में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के पास अपने केवल 24 विधायक थे, लेकिन उन्होंने पर्दे के पीछे ऐसी गोटियां फिट कीं कि वे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पक्ष में कुल 30 विधायकों का समर्थन जुटाने में कामयाब रहे।

दूसरी ओर, संख्या बल के हिसाब से इंडी गठबंधन के पास कुल 56 सीटें थीं, जो आसानी से दो सीटें जीतने के लिए काफी थीं। इसके बावजूद, अंदरूनी कलह के कारण कांग्रेस उम्मीदवार की झोली में मात्र 20 वोट ही गिरे और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राज्य में एनडीए के विकास एजेंडे पर विधायकों के भरोसे का प्रतीक बताया है।

कर्नाटक में उल्टा पड़ा दांव: बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के 8 विधायक टूटे, कांग्रेस की बल्ले-बल्ले

झारखंड से बिल्कुल उलट कहानी कर्नाटक के विधान परिषद (MLC) चुनाव में देखने को मिली, जहां बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को अपने ही विधायकों की बगावत के कारण करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास 135 विधायक हैं, लेकिन जब एमएलसी चुनाव के नतीजे आए तो हर कोई दंग रह गया क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवारों को कुल 151 वोट मिले।

दूसरी तरफ, 64 विधायकों वाली बीजेपी के दो उम्मीदवारों को सिर्फ 56 वोट ही मिल सके, जो उनकी मूल संख्या से 8 वोट कम थे। यही नहीं, बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीएस (JDS) के पास 18 विधायक थे, लेकिन उनके उम्मीदवार को सिर्फ 14 वोट मिले। इस तरह विपक्ष के कुल 8 विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर बीजेपी-जेडीएस गठबंधन का खेल पूरी तरह बिगाड़ दिया।

राजनीतिक दोगलापन: एक राज्य में जो 'गद्दारी' है, दूसरे राज्य में वो 'अंतरात्मा की आवाज' है

इन दोनों राज्यों के नतीजों के बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों का दोहरा चरित्र साफ दिखाई दे रहा है। झारखंड में जिन विधायकों ने पाला बदला, बीजेपी ने उनका बाहें फैलाकर स्वागत किया, लेकिन कर्नाटक में जैसे ही अपने 8 विधायकों ने धोखा दिया, तो बीजेपी ने तुरंत इसे गद्दारी करार देते हुए बागी विधायकों की पहचान के लिए आंतरिक जांच कमेटी बैठा दी है।

ठीक ऐसा ही रुख कांग्रेस का भी है; कांग्रेस ने झारखंड में क्रॉस-वोटिंग करने वाले अपने विधायकों को तोड़ने के लिए बीजेपी द्वारा धन-बल और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए, लेकिन कर्नाटक में विपक्षी विधायकों द्वारा अपनी पार्टी को वोट दिए जाने पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इसे 'अंतरात्मा की आवाज पर दिया गया वोट' बताते हुए बगावत करने वाले विधायकों का खुलकर आभार जताया और कहा कि यह नतीजे कांग्रेस सरकार में जनता और जनप्रतिनिधियों के अटूट विश्वास को दर्शाते हैं।

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