पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड की तैयारी पूरी: 19 लाख कार्ड जारी, परिवहन मंत्री ने दिए जल्द शुरुआत के संकेत
दिल्ली की सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन के जरिए रोजाना सफर करने वाली लाखों महिलाओं के लिए यह खबर बेहद अहम है। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और क्लस्टर बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर की सुविधा को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने की योजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। राजधानी में कागजी 'पिंक टिकट' की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से विदा कर नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) आधारित 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' को अनिवार्य रूप से लागू करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
परिवहन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब तक 19 लाख से अधिक पात्र महिला लाभार्थियों के पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनाए जा चुके हैं। विभाग ने बुनियादी स्तर पर सभी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुगमता से क्रियान्वित किया जाए ताकि किसी भी दैनिक यात्री को यात्रा के दौरान असुविधा का सामना न करना पड़े।
19 लाख महिलाओं को मिले कार्ड, जानिए कैसे काम करेगा नया सिस्टम
नई व्यवस्था के तहत बसों में तैनात परिचालकों (कंडक्टर्स) को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनें (ETM) उपलब्ध कराई गई हैं। महिला यात्रियों को बस में चढ़ने के बाद कंडक्टर के पास मौजूद इस मशीन पर अपना पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड टैप कराना होगा।
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तुरंत जारी होगा जीरो-फेयर टिकट: कार्ड टैप होते ही मशीन से स्वचालित रूप से शून्य मूल्य (Zero-Fare) का डिजिटल टिकट निकल आएगा।
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सर्वर पर रियल-टाइम डेटा: टैप होते ही यात्रा का पूरा ब्योरा परिवहन विभाग के केंद्रीय सर्वर में दर्ज हो जाएगा, जिससे सरकार को सब्सिडी और यात्री संख्या का सटीक हिसाब मिल सकेगा।
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फर्जीवाड़े पर रोक: एक ही बस में एक कार्ड का बार-बार इस्तेमाल रोककर दुरुपयोग की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
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एनसीएमसी (NCMC) की मल्टी-यूटिलिटी: इस कार्ड में पैसे रीचार्ज कराकर इसे दिल्ली मेट्रो और अन्य ट्रांजिट सिस्टम में भी सामान्य भुगतान कार्ड की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
बिना स्मार्ट कार्ड सफर करने पर देना होगा सामान्य किराया
परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि किसी महिला यात्री के पास वैध पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड नहीं होगा, तो वह मुफ्त सफर की हकदार नहीं होंगी। ऐसी स्थिति में महिलाओं को आम यात्रियों की तरह यात्रा की तय दूरी के अनुसार टिकट खरीदना होगा और नकद या यूपीआई के जरिए किराया चुकाना होगा।
नियमों के मुताबिक यह कार्ड केवल दिल्ली की स्थायी निवासी महिलाओं, युवतियों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए जारी किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम या अन्य राज्यों से आने वाली महिला यात्रियों को दिल्ली की बसों में यात्रा करने के लिए सामान्य टिकट लेना होगा।
आधार वेरिफिकेशन से कार्ड बनवाना है बेहद आसान
जिन महिलाओं ने अभी तक अपना पिंक सहेली कार्ड नहीं बनवाया है, वे परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित अधिकृत केंद्रों या डीटीसी डिपो पर जाकर इसे तुरंत बनवा सकती हैं।
कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बिल्कुल सरल और निशुल्क रखी गई है:
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आवेदक महिला को अपना मूल आधार कार्ड और उससे लिंक मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा।
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काउंटर पर बायोमेट्रिक या ओटीपी (OTP) आधारित आधार प्रमाणीकरण पूरा किया जाएगा।
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पहली बार कार्ड जारी करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
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यदि भविष्य में कार्ड खो जाता है या खराब हो जाता है, तो तय सरकारी शुल्क देकर डुप्लीकेट कार्ड प्राप्त किया जा सकेगा।
दिल्ली और एनसीआर के यात्रियों के लिए जरूरी निर्देश
दिल्ली सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह कैशलेस और हाई-टेक बनाना है। परिवहन मंत्री ने डिपो प्रबंधकों, बस ड्राइवरों और कंडक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे यात्रियों के साथ विनम्रता से संवाद करें और उन्हें कार्ड के प्रति जागरूक करें।
राजधानी के व्यस्ततम रूटों जैसे कश्मीरी गेट, आनंद विहार, आईटीओ, धौला कुआं और महरौली जैसे टर्मिनल्स पर विशेष हेल्पडेस्क सक्रिय किए गए हैं। जिन दैनिक यात्रियों के पास अभी कार्ड नहीं है, उन्हें सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी केंद्र पर जाकर कार्ड बनवा लें ताकि उनकी दैनिक मुफ्त यात्रा निरंतर जारी रह सके।