संसद मानसून सत्र 2026: बदल गया सीटिंग अरेंजमेंट और सत्ता का समीकरण, 5 नए बड़े बिलों पर आज से मचेगा भारी घमासान

संसद मानसून सत्र 2026: बदल गया सीटिंग अरेंजमेंट और सत्ता का समीकरण, 5 नए बड़े बिलों पर आज से मचेगा भारी घमासान

देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र यानी संसद आज से एक नए सियासी संग्राम का गवाह बनने जा रही है। साल 2026 का मानसून सत्र आज (20 जुलाई) से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, लेकिन सत्र की शुरुआत से पहले ही राजधानी दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सरकार जहां बदले हुए समीकरणों के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने पहले ही दिन से सदन की कार्यवाही को घेरने का पूरा मन बना लिया है। रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में जो तीखे तेवर देखने को मिले, उससे साफ है कि इस बार का सत्र बेहद हंगामी होने वाला है।

सर्वदलीय बैठक में हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट

सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपना लिया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के गुट को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), डीएमके (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), जेएमएम और शिवसेना (UBT) सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया। विपक्ष का आरोप है कि जिन सांसदों के विलय पर लोकसभा स्पीकर का फैसला अभी पेंडिंग है, उन्हें किस आधार पर न्योता दिया गया। इसी मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए विपक्षी गुट ने बैठक से सांकेतिक वॉकआउट कर दिया, जिसने सत्र के पहले ही दिन बड़े हंगामे का ट्रेलर दिखा दिया है।

संसद के भीतर बदला सीटों का भूगोल

इस बार मानसून सत्र में सिर्फ राजनीतिक बहस ही नहीं बदलेगी, बल्कि संसद के भीतर का नजारा भी बदला हुआ दिखेगा। लोकसभा में कुल 48 सांसदों की बैठने की जगह (सीटिंग अरेंजमेंट) में बड़ा बदलाव किया गया है। टीएमसी के 20 बागी सांसद अब एनसीपी (अजीत पवार गुट) के साथ सीटों पर दिखाई देंगे, जबकि शिवसेना के उद्धव गुट से अलग हुए 6 सांसद अब शिंदे गुट के पाले में बैठे नजर आएंगे। इसके अलावा डीएमके के 22 सांसद भी विपक्षी ब्लॉक से अलग बैठेंगे। सीटों का यह नया समीकरण सदन के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक संदेश दे रहा है।

इन 5 बड़े बिलों को पेश करेगी सरकार

24 दिनों तक चलने वाले इस सत्र के दौरान मोदी सरकार पांच नए और बेहद महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखने जा रही है। सरकारी एजेंडे में शामिल इन बिलों की सूची इस प्रकार है:

  1. इनकम-टैक्स (संशोधन) बिल, 2026: मौजूदा अध्यादेश की जगह लेने के लिए।

  2. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026: अध्यादेश को रिप्लेस करने के लिए।

  3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026

  4. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026

  5. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026

महंगाई और बेरोजगारी पर तीखी सियासी भिड़ंत के आसार

विशेषज्ञों की मानें तो सदन में इन बिलों के अलावा देश के बुनियादी मुद्दों पर सबसे ज्यादा तकरार होने की आशंका है। विपक्षी खेमा महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और देश के ताजा हालातों को लेकर सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति बना चुका है। बंगाल चुनाव के बाद बदले हुए सियासी हालातों के बीच विपक्ष को इस बात की चिंता है कि सरकार संख्या बल के आधार पर किसी भी बड़े बिल को आसानी से पास न करा ले। यही वजह है कि पहले ही दिन से दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

लोकसभा और राज्यसभा का नया संख्या बल

संसद के दोनों सदनों में इस समय बहुमत और सीटों का गणित कुछ इस प्रकार है, जो यह तय करेगा कि बिल पास कराने में सरकार कितनी सहज रहेगी:

सदन (House) कुल मौजूदा सीटें एनडीए (NDA) इंडिया ब्लॉक (INDIA) अन्य (OTH) बहुमत का आंकड़ा
लोकसभा 540 318 183 39 272
राज्यसभा 244 152 64 28 122

आंकड़ों के इस खेल और सर्वदलीय बैठक के घटनाक्रम को देखकर यह साफ है कि सत्ता पक्ष के लिए इस सत्र को बिना बाधा के चलाना एक बड़ी परीक्षा होगी, जबकि विपक्ष अपनी एकजुटता से सरकार को बैकफुट पर लाने का हरसंभव प्रयास करेगा।

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