चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की जंग तेज, आज चौथे दिन भी सड़कों पर उतरेगा INDIA ब्लॉक
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की ओर से चलाई जा रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'INDIA ब्लॉक' का विरोध प्रदर्शन आज शुक्रवार को भी जारी रहेगा। पिछले तीन दिनों से निर्वाचन सदन, आकाशवाणी भवन और राजघाट पर लगातार विरोध प्रदर्शन, धरने और हिरासत में लिए जाने के बावजूद विपक्षी दलों के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। विपक्षी सांसदों ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी मतदाता सूचियों में कथित विसंगतियों, 'वोट चोरी' के आरोपों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की बहाली की मांग को लेकर उनका यह 'सत्याग्रह' आगे भी जारी रहेगा। विपक्षी दलों के सांसदों और शीर्ष नेताओं को दिल्ली में ही मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रस्तावित विरोध मार्च और राष्ट्रपति भवन तक के कार्यक्रम को धार दी जा सके।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की तैयारी, 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर इंतजार
सड़कों पर प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्ष इस पूरे मामले को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रहा है। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल के अनुसार, इंडिया गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का औपचारिक समय मांगा गया था। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन की ओर से विपक्ष के 10 प्रमुख नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात की अनुमति दिए जाने की संभावना है। हालांकि, बैठक के तय समय और अंतिम प्रोटोकॉल को लेकर राष्ट्रपति भवन के औपचारिक जवाब व समय निर्धारण का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं का यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति के समक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची संशोधन (SIR) और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल हो सकते हैं ये 10 प्रमुख विपक्षी चेहरे
विपक्ष की ओर से जिन 10 शीर्ष नेताओं के राष्ट्रपति से मिलने जाने की संभावना है, उनमें विभिन्न घटक दलों के प्रमुख चेहरे शामिल हैं:
-
मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष)
-
राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष)
-
ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री - जो विशेष रूप से इस मार्च और मुलाकात के लिए दिल्ली पहुंची हैं)
-
अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी प्रमुख)
-
प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस सांसद)
-
अभिषेक बनर्जी / सुदीप बंद्योपाध्याय (तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता)
-
तेजस्वी यादव / मनोज झा (राष्ट्रीय जनता दल)
-
टी. आर. बालू (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम - DMK)
-
संजय राउत (शिवसेना - उद्धव बालासाहेब ठाकरे)
-
डी. राजा / सीताराम येचुरी कैडर / जॉन ब्रिटास (वामपंथी दलों के प्रतिनिधि)
क्या है SIR विवाद और विपक्ष की मुख्य मांगें?
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में चलाए जा रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के तहत लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना उचित सत्यापन के हटाए या प्रभावित किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि आयोग निष्पक्षता के संवैधानिक दायित्व से भटक रहा है। विपक्ष की मुख्य मांगें हैं:
-
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए या इस पर रोक लगाई जाए।
-
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें।
-
मतदाता सूची पुनरीक्षण की संपूर्ण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और सभी राजनीतिक दलों के साथ खुला संवाद किया जाए।
वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और चुनावी हताशा का परिणाम बताया है।
दिल्ली पुलिस का सुरक्षा घेरा कड़ा, कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध
लगातार चौथे दिन प्रस्तावित विरोध मार्च और राजघाट से राष्ट्रपति भवन की दिशा में संभावित हलचल को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को रायसीना हिल्स, इंडिया गेट, जनपथ और राजघाट के आसपास तैनात किया गया है। लुटियंस दिल्ली और संसद मार्ग से जुड़ने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और यात्रियों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी बड़े मार्च को उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।