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अचानक शांत हुए मोबाइल फोन: सरकार ने 1 महीने के भीतर ही रोक दी 'इमर्जेंसी अलर्ट' सर्विस

पिछले कुछ हफ्तों के दौरान अगर आपके स्मार्टफोन पर अचानक एक तेज बीप की आवाज और वाइब्रेशन के साथ कोई पॉप-अप मैसेज फ्लैश हुआ था, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स के दिलों की धड़कन बढ़ाने वाला वह तेज 'आपातकालीन अलार्म' अब फिलहाल कुछ दिनों तक आपके फोन में नहीं गूंजेगा। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने अपनी अति-महत्वपूर्ण 'सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम' (Cell Broadcast Alert System) सेवा को देश भर में अस्थायी रूप से सस्पेंड यानी रोकने का एक चौंकाने वाला फैसला किया है। मई 2026 में ही आधिकारिक तौर पर लॉन्च की गई इस लाइफ-सेविंग सर्विस को महज एक महीने के भीतर बंद किए जाने से हर कोई हैरान है। लाइव हिन्दुस्तान के टेक और गवर्नेंस मामलों के विशेष संवाददाता अंकित ओझा की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड टेक रिपोर्ट में जानिए कि आखिर सरकार को यह सर्विस अचानक क्यों रोकनी पड़ी।

क्या थी एनडीएमए की सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस और पिछले दिनों क्यों बज रहे थे फोन

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने गृह मंत्रालय के सहयोग से देश के आम नागरिकों को किसी भी प्राकृतिक आपदा जैसे—भीषण आंधी-तूफान, बिजली गिरना, भूकंप या मूसलाधार बारिश की सटीक और तुरंत चेतावनी देने के लिए इस खास सिस्टम को विकसित किया था। इस तकनीक के चालू होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों, विशेषकर उत्तर भारत में आए हालिया तूफानों के समय लोगों के मोबाइल फोन पर एक सामान्य एसएमएस (SMS) से बिल्कुल अलग, एक बहुत ही तेज और डरावनी आवाज वाला अलार्म बजने लगता था। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य यह था कि भले ही आपका फोन साइलेंट मोड पर हो, लेकिन आपदा के समय यह अलार्म आपका ध्यान अपनी ओर खींच सके ताकि आप समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं या सतर्क हो जाएं।

सिर्फ एक महीने में क्यों सस्पेंड करनी पड़ी यह सेवा, जानकारों ने बताई इनसाइड स्टोरी

इस सरकारी सर्विस के अचानक सस्पेंड होने के बाद अब देश भर के स्मार्टफोन यूजर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मात्र एक महीने में ही इसे रोकने की जरूरत क्यों आन पड़ी। हालांकि एनडीएमए की तरफ से इसकी कोई पुख्ता और स्पष्ट आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन दूरसंचार मंत्रालय और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों (Technical Experts) का कहना है कि इसके पीछे कुछ गंभीर तकनीकी समीक्षाएं और जरूरी सुधार शामिल हैं। दरअसल, देश की कई जांच और तकनीकी एजेंसियां एक साथ मिलकर इस ब्रॉडकास्टिंग तकनीक को और अधिक सटीक, भौगोलिक रूप से केंद्रित और बिना किसी एरर (Error) के काम करने योग्य बनाने के लिए इसकी गहन समीक्षा (Review) कर रही हैं। जैसे ही इस कोडिंग और नेटवर्क मैपिंग में जरूरी सुधार पूरे हो जाएंगे, इस सर्विस को एक नए और बेहतर रूप में दोबारा रोलआउट कर दिया जाएगा।

बिना इंटरनेट के भी दौड़ता है संदेश: जानिए इस अनोखी ब्रॉडकास्ट तकनीक की 4 बड़ी खासियतें

भारत सरकार की इस खास इमरजेंसी सर्विस की तकनीकी बनावट बहुत ही बेजोड़ है, जो इसे संकट के समय सबसे ज्यादा भरोसेमंद बनाती है। इस तकनीक की मुख्य खासियतों को आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:

  • बिना इंटरनेट के काम करना: इस सर्विस की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपके मोबाइल में इंटरनेट डेटा पैक (Internet Data) हो या न हो, या फिर सेलुलर नेटवर्क बेहद कमजोर हो, तब भी यह संदेश सीधे आपके हैंडसेट की स्क्रीन पर बिना किसी रुकावट के पहुंच जाता है।

  • इंस्टेंट डिलीवरी: पारंपरिक एसएमएस के मुकाबले ब्रॉडकास्ट तकनीक में संदेशों को डिलीवर होने में एक सेकंड का भी समय नहीं लगता, जिससे आपातकालीन स्थिति में लाखों लोगों तक सूचना तुरंत पहुंचती है।

  • लोकेशन आधारित ट्रैकिंग (GEO Optimization): यह सिस्टम केवल उसी खास जियो-लोकेशन (Geographical Location) पर ही संदेश भेजता है, जहां प्राकृतिक आपदा या खतरे का अंदेशा सबसे ज्यादा होता है, जिससे पूरे देश या राज्य में बेवजह पैनिक (डर) नहीं फैलता।

  • स्वदेशी तकनीक का दम: आपको बता दें कि देश के इस एडवांस सिस्टम को भारत की ही प्रमुख सरकारी टेलीकॉम रिसर्च विंग 'सी-डॉट' (C-DOT यानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स) और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरी तरह से इन-हाउस तैयार किया है, जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिहाज से भी काफी अहम है।

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