ब्रिक्स के तुरंत बाद मिलिट्री डिप्लोमेसी: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूस रवाना, हथियारों की सप्लाई तेज करने पर मॉस्को में महामंथन

ब्रिक्स के तुरंत बाद मिलिट्री डिप्लोमेसी: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूस रवाना, हथियारों की सप्लाई तेज करने पर मॉस्को में महामंथन

वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में आ रहे तीव्र बदलावों और पश्चिमी देशों के भारी कूटनीतिक दबाव के बीच भारत और रूस ने अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी तथा रक्षा संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नई दिल्ली दौरे के तुरंत बाद भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ बुधवार को तीन दिवसीय उच्चस्तरीय आधिकारिक यात्रा पर मॉस्को के लिए रवाना हो गए हैं। इस उच्चस्तरीय दौरे को अंतरराष्ट्रीय सामरिक विश्लेषक केवल एक औपचारिक प्रोटोकॉल यात्रा नहीं, बल्कि सक्रिय 'मिलिट्री डिप्लोमेसी' के रूप में देख रहे हैं। 16 सितंबर से 18 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान सेना प्रमुख रूसी रक्षा प्रतिष्ठानों के शीर्ष जनरलों और नीति निर्माताओं के साथ द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के विस्तार, संयुक्त सामरिक प्राथमिकताओं और विशेष रूप से भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रूसी सैन्य उपकरणों तथा आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति श्रृंखला को गति देने पर गहन विमर्श करेंगे।

भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के इस आधिकारिक दौरे का प्राथमिक ध्येय दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच स्वतंत्रता के बाद से चले आ रहे गहरे रक्षा सहयोग को नए रक्षा आयामों में ढालना है। यह दौरा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि नई दिल्ली अपनी सामरिक स्वायत्तता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और वैश्विक स्तर पर गुटबाजी से परे रहकर अपने पारंपरिक रक्षा सहयोगियों के साथ निरंतर सैन्य संवाद बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मॉस्को पहुंचने पर जनरल धीरज सेठ क्रेमलिन की दीवार के पास स्थित विख्यात 'टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर' (अज्ञात सैनिक स्मारक) पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर सोवियत सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी औपचारिक यात्रा की शुरुआत करेंगे।

कर्नल जनरल मोर्दविचेव संग उच्चस्तरीय बैठक: रणनीतिक सैन्य सहयोग और साझा प्रशिक्षण पर जोर

अपनी इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान भारतीय सेना प्रमुख रूसी थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ द्विपक्षीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल स्तर की आधिकारिक वार्ता करेंगे। इस बैठक का मुख्य केंद्र दोनों देशों की थल सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाना, रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद रोधी अभियानों के अनुभवों को साझा करना और दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच पेशेवर सैन्य शिक्षा के आदान-प्रदान को गहरा करना होगा। आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन हमलों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और डिजिटल संचार प्रणालियों की भूमिका पर दोनों कमांडर अपने व्यावहारिक निष्कर्ष साझा करेंगे।

इसके अलावा, जनरल सेठ मॉस्को स्थित रूसी सेना के सबसे सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत मुख्यालय 'नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर' (NDCC) का दौरा करेंगे। इस कमान केंद्र से संपूर्ण रूसी रक्षा अभियानों और परमाणु कमान की रियल-टाइम निगरानी की जाती है। यहां भारतीय सेना प्रमुख रूसी रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सैन्य कमांडरों से मुखातिब होंगे और आधुनिक वारफेयर नेटवर्क के संचालन का जायजा लेंगे। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के जमीनी बलों के बीच ऐसा उच्च स्तरीय संवाद भविष्य में सामरिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।

रूसी हथियारों की आपूर्ति में तेजी: टैंक, मिसाइल सिस्टम और असॉल्ट राइफल्स के पुर्जों पर महामंथन

भारतीय सेना प्रमुख की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा उद्योग और अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमेंट) से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान निकालना है। मॉस्को में जनरल धीरज सेठ रूस के रक्षा उद्योग, सैन्य विनिर्माण और विदेशी खरीद मामलों के प्रभारी उप रक्षामंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव से आमने-सामने की विस्तृत बैठक करेंगे। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के बेड़े में शामिल अग्रिम पंक्ति के रूसी हथियारों की सप्लाई लाइन को सुचारू बनाना और समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित करना है। यद्यपि भारत 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत घरेलू रक्षा निर्माण पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, किंतु वर्तमान में भी भारतीय सेना के तोपखाने, बख्तरबंद वाहनों और वायु रक्षा तंत्र में रूसी मूल के हथियारों का एक बड़ा हिस्सा मौजूद है।

बैठक में टी-90 भीष्म और टी-72 मुख्य युद्धक टैंकों के आधुनिक इंजनों और स्पेयर पार्ट्स, पिनाका के साथ तालमेल बिठाने वाले स्मेर्च मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर्स, इग्ला-एस एयर डिफेंस सिस्टम्स और वायु रक्षा मिसाइलों के कलपुर्जों की समय पर डिलीवरी को लेकर ठोस समय-सीमा तय किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में भारत-रूस संयुक्त उपक्रम के तहत निर्मित हो रही एके-203 क्लाश्निकोव असॉल्ट राइफलों के उत्पादन की गति और स्थानीयकरण प्रतिशत को बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। उप रक्षामंत्री ओस्माकोव के साथ होने वाली यह बातचीत मौजूदा आपूर्ति व्यवधानों को समाप्त कर भारतीय सेना की परिचालन तैयारियों को शीर्ष स्तर पर बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

सेंट पीटर्सबर्ग में मिखाइलोव्स्काया आर्टिलरी एकेडमी का दौरा: भविष्य की तोपखाना तकनीकों का अध्ययन

मॉस्को में अपने आधिकारिक कार्यक्रमों और उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं को संपन्न करने के बाद, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूस की सांस्कृतिक और रक्षा-तकनीकी राजधानी सेंट पीटर्सबर्ग का रुख करेंगे। वहां वे ऐतिहासिक 'मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी एकेडमी' का विस्तृत दौरा करेंगे। वर्ष 1820 में स्थापित यह प्रतिष्ठित सैन्य संस्थान दुनिया की सबसे पुरानी और अग्रणी तोपखाना एवं रॉकेट इंजीनियरिंग अकादमियों में से एक माना जाता है। जनरल सेठ वहां अकादमी के शीर्ष कमांडेंट, संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के साथ बैठक कर आधुनिक तोपखाने, निर्देशित गोला-बारूद (प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशंस) और हाइपरसोनिक बैलिस्टिक प्रणालियों के विकास से जुड़े तकनीकी विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर दोहराया है कि सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का यह रूस दौरा भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी (Special and Privileged Strategic Partnership) की निरंतरता का सशक्त प्रतीक है। इस प्रकार की सतत सैन्य कूटनीति न केवल दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच आपसी विश्वास और अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत वैश्विक कूटनीति के हर मंच पर अपने राष्ट्रीय और सामरिक हितों को साधने में पूरी तरह स्वतंत्र और सक्षम है।