CJP प्रोटेस्ट पर ममता बनर्जी का बयान सोशल मीडिया पर वायरल, जानिए क्या है पूरा विवाद
पश्चिम बंगाल की राजनीति और देश के मुख्यधारा के राजनीतिक घटनाक्रमों में इन दिनों बयानों का पारा चढ़ा हुआ है। हाल ही में देश में युवाओं, छात्रों और नागरिक अधिकार समूहों द्वारा संचालित 'सीजेपी' (Citizens for Justice and Peace) आंदोलन और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी का एक नया तीखा बयान वायरल हो रहा है। विरोध-प्रदर्शन की तारीखों, सरकारी कार्यदिवसों और प्रशासनिक मंजूरियों को लेकर मीडिया व पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों पर बिफरते हुए ममता बनर्जी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा— "हमको मत सिखाओ! कल शनिवार है और सरकारी ऑफिसों में छुट्टी होती है"। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो गया।
CJP आंदोलन और शनिवार के दिन विरोध प्रदर्शन की टाइमिंग पर तीखी बहस
पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक इन दिनों सीजेपी (CJP) और युवा समूहों द्वारा मतदाता सूची संशोधन (SIR), चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ आंदोलन चलाया जा रहा है। जब संवाददाताओं ने ममता बनर्जी से इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने या सरकारी काम-काज प्रभावित होने को लेकर सवाल खड़े किए, तो उन्होंने तल्ख लहजे में मीडिया और आलोचकों को जवाब दिया। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि शनिवार का दिन सरकारी कार्यप्रणाली के हिसाब से अवकाश या हाफ-डे का दिन होता है, इसलिए वीकेंड पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष और आंदोलनकारी छात्र देश की प्रशासनिक व्यवस्था को अच्छी तरह समझते हैं और उन्हें किसी से पाठ सीखने की जरूरत नहीं है।
ममता बनर्जी का खुला समर्थन: जरूरत पड़ने पर खुद सड़क पर उतरने की दी चेतावनी
अपने इस वायरल बयान के साथ ही ममता बनर्जी ने एक बार फिर सीजेपी आंदोलन और युवा प्रदर्शनकारियों को अपना पूरा नैतिक और राजनीतिक समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति की मांग हुई, तो वह खुद भी सीजेपी के मंच और जंतर-मंतर पर जाकर प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठ सकती हैं। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब युवा और नागरिक अपने अधिकारों की बात करते हैं, तो उन्हें दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का सहारा लिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी छुट्टी के दिन भी अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो यह सीधे तौर पर तानाशाही सोच का प्रदर्शन है।
विपक्षी एकजुटता, राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
ममता बनर्जी के इस 'हमको मत सिखाओ' वाले बयान ने इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी है। जहां एक तरफ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के समर्थक इस बयान को ममता बनर्जी की बेबाकी और निडरता के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विरोधी खेमे के नेता इस पर चुटकी ले रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता होने के बावजूद ममता बनर्जी जिस भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं, वह उनकी राजनीतिक हताशा को दिखाता है। विरोधी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी छुट्टियों का हवाला देकर विरोध-प्रदर्शनों को जायज ठहराना प्रशासनिक नियमों का मखौल उड़ाने जैसा है।
देश में लोकतंत्र और विरोध के अधिकार पर छिड़ी व्यापक कानूनी बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने देश में वीकेंड प्रोटेस्ट, पुलिसिया पाबंदियों और राजनीतिक समर्थन को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा कारणों और यातायात व्यवस्था का हवाला देकर लगाई गई बंदिशों के बीच ममता बनर्जी के इस रुख ने आंदोलनकारियों के इरादों को नई ऊर्जा दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के संविधान के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हासिल है, चाहे वह शनिवार हो या कोई अन्य दिन। फिलहाल, ममता बनर्जी का यह वायरल बयान और सीजेपी का आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा और गर्माया हुआ मुद्दा बना हुआ है।