Mamata Banerjee In Supreme Court: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती! TMC नाम और 'जोड़ा फूल' सिंबल फ्रीज होने पर भड़कीं
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठनात्मक ढांचे में आई ऐतिहासिक टूट के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर छिड़ा संग्राम अब देश की सबसे बड़ी अदालत (Supreme Court) की चौखट पर पहुंच चुका है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा पार्टी का मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' (AITC) और उसका पारंपरिक चुनाव निशान 'जोड़ा फूल' (Flowers and Grass) तत्काल प्रभाव से फ्रीज किए जाने के अंतरिम आदेश को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस कदम को जल्दबाजी में लिया गया, मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात करार दिया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि करीब तीन दशक पूर्व (1998 में) उनके द्वारा खून-पसीने से खड़ी की गई मूल पार्टी की पहचान को किसी बागी गुट के फर्जी दावों के आधार पर एक झटके में छीना या फ्रीज नहीं किया जा सकता।
6 अक्टूबर के उपचुनावों से पहले चुनाव आयोग ने क्यों लिया यह फैसला?
पश्चिम बंगाल की दो बेहद अहम विधानसभा सीटों—नंदीग्राम और रेजीनगर—में 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं।
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दो गुटों का आमना-सामना: पार्टी में मची आंतरिक बगावत के बाद संगठन दो स्पष्ट धड़ों में बंट गया था—एक गुट का नेतृत्व खुद ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय / ऋतब्रत बनर्जी खेमा कर रहा है।
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दोनों ने किया असली TMC होने का दावा: दोनों ही गुटों ने चुनाव आयोग के समक्ष याचिकाएं दायर कर खुद को 'असली तृणमूल कांग्रेस' बताया और उपचुनावों में आधिकारिक सिंबल 'जोड़ा फूल' पर लड़ने की दावेदारी पेश कर दी।
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आयोग की अंतरिम व्यवस्था (सिंबल्स ऑर्डर 1968, पैरा 15): चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम समयसीमा के बीच पार्टी संगठन, सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों के संख्याबल की विस्तृत कानूनी जांच (Substantive Determination) करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। दोनों पक्षों को बराबरी के स्तर पर रखने के लिए आयोग ने मुख्य सिंबल और नाम को अस्थायी रूप से सील (फ्रीज) कर दिया।
दोनों धड़ों को मिले नए नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने उपचुनावों के मद्देनजर दोनों गुटों को अलग-अलग अंतरिम नाम और फ्री सिंबल आवंटित कर दिए हैं:
| खेमा / गुट | चुनाव आयोग द्वारा दिया गया नया नाम | आवंटित किया गया नया चुनाव चिह्न |
| ममता बनर्जी गुट | ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (MAITC) | फुटबॉल खिलाड़ी (Football Player) |
| बागी गुट (अरूप रॉय / ऋतब्रत) | डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTMC) | लिफाफा (Envelope) |
ममता बनर्जी ने उठाए 3 बड़े कानूनी सवाल: 'लोकतंत्र का काला दिन'
चुनाव आयोग के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने इसे भारतीय लोकतंत्र का "काला दिन" (Black Day) करार दिया और कानूनी याचिका में गंभीर आरोप लगाए:
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संस्थापक के अधिकार की अनदेखी: याचिका में दलील दी गई है कि पार्टी की स्थापना और पंजीकरण ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुआ था, ऐसे में बिना किसी पुख्ता विधायी बहुमत साबित किए केवल कुछ असंतुष्ट नेताओं की शिकायत पर मूल सिंबल फ्रीज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
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राजनीतिक दबाव का आरोप: ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर उनकी पार्टी को कमजोर करने और उपचुनावों में भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए जानबूझकर यह कार्रवाई की गई है।
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शिवसेना और लोजपा विवाद की नजीर: चुनाव आयोग ने इससे पहले 2021 में लोजपा (चिराग बनाम पशुपति) और 2022 में शिवसेना (उद्धव बनाम शिंदे) विवाद के समय भी शुरुआती चरण में मूल सिंबल को फ्रीज किया था। ममता खेमे की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट तुरंत इस अंतरिम आदेश पर रोक लगाए और उन्हें मूल नाम-निशान पर लड़ने की अनुमति दे।
नंदीग्राम उपचुनाव और विपक्षी गठबंधन की नई बिसात
सिंबल फ्रीज होने और बढ़ते कानूनी पचड़े के बीच ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर बड़ा सियासी दांव चल दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि बीजेपी को शिकस्त देने और 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक को मजबूत करने के लिए उनका गुट नंदीग्राम सीट पर अपना उम्मीदवार वापस लेकर कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा।
अब सबकी निगाहें देश की शीर्ष अदालत पर टिकी हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के अंतरिम फ्रीज आदेश में दखल देकर ममता बनर्जी को राहत देता है या फिर पश्चिम बंगाल के इस चुनावी दंगल में 'जोड़ा फूल' की जगह 'फुटबॉल प्लेयर' और 'लिफाफा' के बीच ही सीधी टक्कर देखने को मिलेगी।