रोज MG रोड के भीषण जाम में फंसने वालों को बड़ी राहत: बनेगा 4.5 KM लंबा एलिवेटेड रोड, मिनटों में तय होगा सफर

रोज MG रोड के भीषण जाम में फंसने वालों को बड़ी राहत: बनेगा 4.5 KM लंबा एलिवेटेड रोड, मिनटों में तय होगा सफर

शहर की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण जीवनरेखा मानी जाने वाली एमजी (महात्मा गांधी) रोड पर रोजाना घंटों रेंगने वाले लाखों दैनिक यात्रियों, दफ्तर जाने वाले पेशेवरों और वाहन चालकों के लिए बहुप्रतीक्षित राहत भरी खबर सामने आई है। पीक आवर्स के दौरान इस प्रमुख कॉरिडोर पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम, लगातार बजते हॉर्न और बढ़ते वायु प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन और पीडब्ल्यूडी ने 4.5 किलोमीटर लंबे 4-लेन एलिवेटेड रोड निर्माण परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और रूपरेखा को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह सिग्नल-फ्री एलिवेटेड कॉरिडोर एमजी रोड के सबसे संकरे और अत्यधिक दबाव वाले बॉटलनेक्स के ऊपर से गुजरेगा। इसके बन जाने से जो सफर तय करने में वर्तमान में 45 से 50 मिनट का भारी समय बर्बाद हो जाता है, वह मात्र 6 से 8 मिनट के भीतर फर्राटेदार तरीके से पूरा किया जा सकेगा। शहर के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने वाला यह मेगा प्रोजेक्ट स्थानीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों के लिए गेमचेंजर साबित होने जा रहा है।

किन प्रमुख जंक्शनों के ऊपर से गुजरेगा एलिवेटेड रोड: देखें कनेक्टिविटी का पूरा खाका

एमजी रोड पर जाम का सबसे बड़ा कारण हर 500 मीटर पर मौजूद प्रमुख चौराहे, टी-पॉइंट्स, वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स और भारी पैदल आवाजाही हैं। 4.5 किलोमीटर की इस एलिवेटेड परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि स्थानीय ट्रैफिक और थ्रू-ट्रैफिक (लंबी दूरी का ट्रैफिक) पूरी तरह अलग हो सकें।

  • सिग्नल-फ्री 4-लेन स्ट्रक्चर: मुख्य एलिवेटेड हिस्से पर दोनों दिशाओं में दो-दो लेन का निर्बाध गलियारा बनेगा, जिस पर 60 से 80 किमी प्रति घंटे की नियंत्रित गति से गाड़ियां चल सकेंगी।

  • प्रमुख चौराहों के ऊपर से उड़ान: रूट में पड़ने वाले 5 प्रमुख व्यस्ततम ट्रैफिक चौराहों को यह एलिवेटेड रोड पूरी तरह बाईपास करेगा, जिससे नीचे ग्राउंड लेवल पर वाहनों की कतारें समाप्त हो जाएंगी।

  • रणनीतिक एंट्री और एग्जिट रैंप्स: दैनिक यात्रियों की सुविधा के लिए प्रमुख अस्पतालों, बस टर्मिनल्स, रेलवे स्टेशनों और मेट्रो कनेक्टिविटी जंक्शनों के पास सुव्यवस्थित रैंप बनाए जाएंगे, ताकि वाहन आसानी से ऊपर चढ़ और नीचे उतर सकें।

  • ग्राउंड लेवल रोड का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण: एलिवेटेड पिलर्स के नीचे मौजूद मौजूदा सड़क की मरम्मत, ड्रेनेज सुधार और सर्विस लेन को दुरुस्त किया जाएगा, जिससे स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों को नीचे खुली जगह मिल सके।

ईंधन और कीमती समय की होगी भारी बचत, प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

हर दिन एमजी रोड पर फंसने वाले हजारों पेट्रोल और डीजल वाहनों के कारण ईंधन की बर्बादी के साथ-साथ शहर के वायु प्रदूषण स्तर (AQI) में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की जाती रही है। स्टॉप-एंड-गो ट्रैफिक के कारण गाड़ियों के ब्रेक और क्लच खराब होने के साथ आम जनता के ईंधन खर्च पर सीधा बोझ पड़ता है।

यातायात विशेषज्ञों के अनुसार, इस 4.5 किमी लंबे एलिवेटेड रोड के चालू होने से रोजाना लाखों लीटर ईंधन की सीधी बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। आपातकालीन वाहनों जैसे एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस गाड़ियों के लिए यह एलिवेटेड रूट एक डेडिकेटेड लाइफलाइन की तरह काम करेगा, जिन्हें अक्सर एमजी रोड के जाम में फंसकर मरीजों की जान जोखिम में डालते देखा जाता रहा है।

लखनऊ से देश के प्रमुख शहरों तक शहरी बुनियादी ढांचे में एलिवेटेड क्रांति

लखनऊ में शहीद पथ, किसान पथ और मुंशीपुलिया से लेकर खुर्रम नगर तक बने सफल एलिवेटेड फ्लाईओवर्स के मॉडल की तरह ही देश के विभिन्न शहरों के एमजी रोड कॉरिडोर को अब एलिवेटेड नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। चाहे उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर हों या अन्य औद्योगिक केंद्र, घनी आबादी वाले पुराने व्यापारिक बाजारों में जमीन अधिग्रहण करना लगभग असंभव होता है। ऐसे में बिना किसी बड़ी तोड़फोड़ और संपत्तियों के नुकसान के, मौजूदा सड़क के बीचोंबीच पिलर खड़े करके वर्टिकल एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना ही सबसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल इंजीनियरिंग समाधान साबित हुआ है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान जनता को असुविधा से बचाने के लिए चरणबद्ध ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। अधिकांश भारी पिलर्स और गर्डर्स का निर्माण प्री-कास्ट यार्ड में होगा, जिन्हें रात के समय क्रेन की मदद से असेंबल किया जाएगा ताकि दिन के व्यस्त समय में ग्राउंड लेवल पर यातायात पूरी तरह बाधित न हो।

तय समयसीमा में पूरा होगा प्रोजेक्ट: स्मार्ट लाइटिंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस 4.5 किमी लंबे एलिवेटेड रोड को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। पूरे स्ट्रेच पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), हाई-डेफिनिशन एएनपीआर (ANPR) कैमरे और ओवर-स्पीडिंग डिटेक्शन सेंसर लगाए जाएंगे ताकि दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं:

  • 24 से 30 महीने की सख्त निर्माण समयसीमा निर्धारित की गई है।

  • ऊर्जा की बचत के लिए पूरे एलिवेटेड हिस्से पर ऑटोमेटेड सोलर-हाइब्रिड एलईडी लाइटिंग लगेगी।

  • ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रिहायशी क्षेत्रों और स्कूलों के सामने नॉइज़ बैरियर्स (Noise Barriers) लगाए जाएंगे।

  • दोनों ओर सुरक्षित क्रैश बैरियर्स और जलभराव रोकने के लिए अत्याधुनिक स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज पाइपलाइन स्थापित होगी।