नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान: अब हाईवे पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां, जल्द लागू होगा बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम; शुरू हुआ FASTag पोर्टेबिलिटी 'OneTag'
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी घोषणा की है। मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF 2026) के मंच से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि भारत बहुत जल्द बिना बूम बैरियर वाले पूर्ण डिजिटल टोलिंग युग में प्रवेश करने जा रहा है। इस नई तकनीक को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम कहा जाता है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य हाईवे और एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों के रुकने की मजबूरी (Zero Stoppage) को पूरी तरह समाप्त करना है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद नेशनल हाईवे पर स्थापित पारंपरिक टोल प्लाजा, लोहे के बैरियर और गाड़ियों की कतारें बीते दौर की बात हो जाएंगी। वाहन अपनी सामान्य क्रूज़िंग स्पीड पर चलते रहेंगे और ओवरहेड इलेक्ट्रॉनिक गैंट्रीज के जरिए ऑटोमैटिक तरीके से तय यूजर फीस कट जाएगी।
मार्च 2027 तक पूरे देश में लागू होगा बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम: जानिए नितिन गडकरी की डेडलाइन
नितिन गडकरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस नई व्यवस्था के रोलआउट की समयसीमा भी साझा की। उन्होंने बताया कि राजमार्ग मंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस पर युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है:
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दिसंबर 2026 तक 70% काम पूरा: मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि साल के अंत तक देश के 60 से 70 प्रतिशत टोल प्लाजा को फ्री-फ्लो इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुकूल बना लिया जाए।
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फरवरी-मार्च 2027 तक राष्ट्रव्यापी शुरुआत: गडकरी के अनुसार, अगले साल फरवरी से मार्च के बीच पूरे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैरियर-फ्री टोल प्लाजा सिस्टम को औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।
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पायलट प्रोजेक्ट की सफलता: सरकार ने दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर इस बैरियर-फ्री तकनीक का सफल पायलट परीक्षण पहले ही कर लिया है, जिससे मिले सकारात्मक डेटा के बाद इसे पूरे देश के लगभग 1,200 टोल प्लाजा पर लागू करने का फैसला लिया गया है।
कैसे काम करेगा मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम?
अक्सर वाहन चालकों के मन में यह सवाल उठता है कि जब सड़क पर कोई टोल बूथ या बैरियर नहीं होगा, तो सरकार टोल कैसे वसूलेगी? यह पूरी व्यवस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सेंसर टेक्नोलॉजी के तालमेल पर काम करेगी:
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हाई-स्पीड ओवरहेड गैंट्रीज: सड़क के ऊपर बड़े मेटल फ्रेम (Gantry) लगाए जाएंगे, जिन पर अत्याधुनिक आरएफआईडी (RFID) रीडर्स और हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे होंगे।
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ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR): जैसे ही कोई वाहन गैंट्री के नीचे से 80 से 100 किमी/घंटे की रफ्तार से गुजरेगा, एएनपीआर (ANPR) कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेंगे।
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फास्टैग और वाहन डेटाबेस का मिलान: सिस्टम गाड़ी पर लगे फास्टैग और केंद्रीय 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस का स्वतः मिलान करेगा।
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सटीक और पारदर्शी कटौती: वाहन ने हाईवे पर किस बिंदु से प्रवेश किया और कहां से बाहर निकला, इसके आधार पर तय दूरी का टोल सीधे लिंक्ड बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा, और यूजर के मोबाइल पर तुरंत एसएमएस आ जाएगा।
लॉन्च हुआ 'OneTag': मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह अब बदलेगा फास्टैग का बैंक
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान नितिन गडकरी ने भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL) और एनपीसीआई (NPCI) द्वारा विकसित 'OneTag' समाधान का भी आधिकारिक शुभारंभ किया। यह देश के करोड़ों फास्टैग यूजर्स के लिए एक बहुत बड़ी सहूलियत है:
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बिना टैग बदले बैंक स्विच करने की आजादी: पहले यदि किसी यूजर को अपने फास्टैग जारीकर्ता बैंक (Issuer Bank) की सेवा पसंद नहीं आती थी या बैंक पर कोई प्रतिबंध लगता था, तो उसे अपनी गाड़ी के शीशे से पुराना टैग खुरच कर निकालना पड़ता था और नया टैग खरीदना पड़ता था।
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फास्टैग पोर्टेबिलिटी सुविधा: अब 'वन टैग' के जरिए यूजर अपनी विंडस्क्रीन पर लगे मौजूदा फिजिकल फास्टैग को बदले बिना ही अपना बैंक बदल सकेंगे, बिल्कुल वैसे ही जैसे मोबाइल नंबर बदले बिना सिम कंपनी (MNP) बदली जाती है।
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राजमार्गयात्रा ऐप से आसान प्रक्रिया: यह पोर्टेबिलिटी सुविधा एनएचएआई के आधिकारिक 'Rajmargyatra' मोबाइल ऐप पर उपलब्ध करा दी गई है, जहां ग्राहक आसान सत्यापन और सहमति के बाद अपनी पसंद का बैंक चुन सकते हैं।
समय, ईंधन और अरबों रुपये की बचत: देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा भारी बूस्ट
नितिन गडकरी ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि बैरियर-फ्री टोलिंग केवल सफर को आसान बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक और पर्यावरणीय विकास का एक बड़ा इंजन है:
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वेटिंग टाइम 30 मिनट से घटकर शून्य: फास्टैग के लागू होने से पहले टोल प्लाजा पर औसत प्रतीक्षा समय 12 से 30 मिनट हुआ करता था। फास्टैग ने इसे 80-90% तक घटा दिया था, और अब नया बैरियर-फ्री सिस्टम इसे घटाकर शून्य यानी 10 सेकंड से भी कम कर देगा।
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सालाना ₹68,500 करोड़ के समय की बचत: टोल पर गाड़ियों के न रुकने से देश भर के यात्रियों का सालाना करीब 71 करोड़ घंटे का बहुमूल्य समय बचेगा, जिसकी आर्थिक कीमत ₹68,500 करोड़ से अधिक आंकी गई है।
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56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत: टोल प्लाजा पर इंजन स्टार्ट रखकर खड़े रहने से होने वाली तेल की खपत बंद होगी। इससे हर साल लगभग 56 करोड़ लीटर ईंधन बचेगा, जिसकी कीमत ₹5,250 करोड़ है।
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पर्यावरण को संजीवनी: ईंधन की इस भारी बचत से होने वाला कार्बन उत्सर्जन में कमी का प्रभाव लगभग 2.7 करोड़ नए पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ देगा।
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टोल संचालन लागत में भारी गिरावट: वर्तमान में टोल प्लाजा के रख-रखाव और कर्मचारियों पर कुल कलेक्शन का 12 से 15 प्रतिशत खर्च होता है। ऑटोमैटिक फ्री-फ्लो सिस्टम आने से यह घटकर महज 2 से 4 प्रतिशत रह जाएगा, जिससे सरकार को प्रतिवर्ष ₹6,000 से ₹7,000 करोड़ की सीधी बचत होगी और टोल रेवेन्यू में ₹10,000 करोड़ तक का इजाफा होगा।
वर्तमान में देश में 13 करोड़ से ज्यादा फास्टैग जारी किए जा चुके हैं और 98 फीसदी से अधिक टोल वसूली डिजिटल माध्यम से हो रही है। बैरियर-फ्री टोलिंग और वन-टैग पोर्टेबिलिटी के इस दोहरे कदम से भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग अब पूरी तरह से स्मार्ट, निर्बाध और आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में तब्दील होने जा रहे हैं।