Maharashtra Politics: वर्षा बंगले पर देर रात सीक्रेट मीटिंग; महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर क्या मोदी सरकार का साथ देंगे शरद पवार?

Maharashtra Politics: वर्षा बंगले पर देर रात सीक्रेट मीटिंग; महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर क्या मोदी सरकार का साथ देंगे शरद पवार?

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर आधी रात को हुई एक गुप्त बैठक ने राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है। मंगलवार रात करीब 11 बजे मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ पर एनसीपी के दोनों गुटों के दिग्गज नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में मैराथन बैठक हुई। इस बैठक में शरद पवार गुट (NCP-SP) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और अजित पवार गुट (NCP) के प्रफुल्ल पटेल व प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे मौजूद रहे। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल बैठक में किन मुद्दों पर अंतिम मुहर लगी है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

लेकिन, सूत्रों के हवाले से जो सबसे बड़ी खबर छनकर सामने आ रही है, वह संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) में विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।

महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर यू-टर्न ले सकता है शरद गुट

सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) केंद्र सरकार द्वारा संसद में दोबारा पेश किए जाने वाले महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन कर सकती है।

गौरतलब है कि बजट सत्र के दौरान शरद पवार की पार्टी ने विपक्ष के साथ सुर में सुर मिलाते हुए इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। लेकिन हाल के दिनों में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैक-चैनल बातचीत के बाद अब शरद पवार गुट के रुख में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है।

पिछली बार दो-तिहाई बहुमत न मिलने से गिर गया था बिल

जानकारी के अनुसार, लोकसभा में पिछली बार पेश किए जाने के दौरान यह ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई (2/3) विशेष बहुमत हासिल नहीं कर सका था, जिसके चलते मोदी सरकार को पीछे हटना पड़ा था। अब केंद्र सरकार इस तकनीकी कमी को दूर कर संसद के आगामी मानसून सत्र में इसे दोबारा पूरी ताकत से पेश करने की तैयारी में है, जिसके लिए उसे विपक्षी खेमे के मतों की भी आवश्यकता है।

'पार्टी में संभावित टूट को रोकने का मास्टरस्ट्रोक?'

राजनीतिक विश्लेषकों और गलियारों में इस अप्रत्याशित यू-टर्न के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं:

  • सीमित समर्थन: चर्चा है कि एनसीपी (शरद पवार) का यह सहयोग केवल और केवल इसी विशिष्ट संविधान संशोधन विधेयक तक ही सीमित रहेगा, और वे गठबंधन (INDIA Alliance) से अलग नहीं हो रहे हैं।

  • बगावत पर ब्रेक: जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) में हुई हालिया टूट को देखते हुए, शरद पवार का यह फैसला अपनी पार्टी के भीतर किसी भी संभावित बगावत या टूट को रोकने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से शरद गुट के कुछ सांसदों के भाजपा या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने की अटकलें जोरों पर थीं।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने खुद साधा था शरद पवार से संपर्क

सूत्रों का दावा है कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक को आम सहमति से पास कराने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के केंद्रीय आलाकमान ने खुद व्यक्तिगत रूप से शरद पवार से संपर्क साधा था। इसी गंभीर मंत्रणा के बाद ही वर्षा बंगले पर इस सीक्रेट मीटिंग की रूपरेखा तैयार हुई और समर्थन को लेकर सैद्धांतिक सहमति बनी।

हालांकि, जब तक संसद के पटल पर यह विधेयक पेश नहीं हो जाता, तब तक एनसीपी (शरद पवार) की अंतिम और औपचारिक स्थिति पर सस्पेंस बना रहेगा, क्योंकि पार्टी ने अभी तक इस पर कोई भी लिखित या आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

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