अलीगढ़ के 37 गांवों से गुजरेगा ग्रीनफील्ड हाईवे, दिल्ली-आगरा-कानपुर जाने वालों को मिलेगी जाम से परमानेंट मुक्ति

अलीगढ़ के 37 गांवों से गुजरेगा ग्रीनफील्ड हाईवे, दिल्ली-आगरा-कानपुर जाने वालों को मिलेगी जाम से परमानेंट मुक्ति

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और दिल्ली-एनसीआर से सटे औद्योगिक शहर अलीगढ़ के बुनियादी ढांचे को एक नई और आधुनिक रफ्तार मिलने जा रही है। अलीगढ़ में बढ़ते वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने और अंतरराज्यीय यात्रियों को सुगम मार्ग देने के लिए केंद्र सरकार ने 33.38 किलोमीटर लंबे एक विशाल और आधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड रिंग रोड (Aligarh Ring Road) के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा इस संबंध में आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह महत्वाकांक्षी रिंग रोड अलीगढ़ जिले की कोल और गभाना तहसील के कुल 37 गांवों की सीमाओं से होकर गुजरेगा, जिससे दिल्ली, आगरा, मथुरा और कानपुर के बीच सफर करने वाले यात्रियों को शहर की भारी भीड़ में घुसने की जरूरत बिल्कुल नहीं होगी।

पला सल्लू से हरदुआगंज तक बनेगा चक्रव्यूह: जानिए क्या है रूट मैप

प्रस्तावित अलीगढ़ रिंग रोड का खाका इस तरह तैयार किया गया है कि यह पूरे शहर को बाहरी छोर से जोड़ते हुए एक सुरक्षा घेरा प्रदान करेगा। इस ग्रीनफील्ड हाईवे की शुरुआत गभाना तहसील के जीटी रोड स्थित पला सल्लू क्षेत्र से होगी। इसके बाद यह विभिन्न ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के बाहरी छोर को कवर करते हुए कोल तहसील के हरदुआगंज में आकर समाप्त होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक शेषनाथ यादव के अनुसार, इस फोर/सिक्स लेन (4/6 Lane) हाईवे का प्राथमिक लक्ष्य उन भारी कमर्शियल ट्रकों और बाहरी यात्री वाहनों को एक तीव्र और वैकल्पिक मार्ग देना है जो वर्तमान में शहर के व्यस्त चौराहों से गुजरने को मजबूर हैं।

दिल्ली-कानपुर के बीच बचेगा समय और ईंधन: बाईपास की कमी होगी पूरी

वर्तमान में दिल्ली, आगरा, एटा, कानपुर और लखनऊ की ओर से आने वाले हजारों भारी वाहन अलीगढ़ शहर के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों के बीच से होकर निकलते हैं, जिससे चौबीसों घंटे भीषण जाम और वायु प्रदूषण की स्थिति बनी रहती है। यद्यपि वर्तमान में भांकरी से बौनेर तक एक बाईपास चालू है, लेकिन वह महज एक हाफ मिनी रोड के रूप में ही काम कर पाता है। नया 33 किलोमीटर लंबा रिंग रोड बन जाने के बाद दिल्ली की ओर से आने वाले किसी भी वाहन को शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। वे सीधे हाईवे के माध्यम से अपने गंतव्य की ओर निकल जाएंगे, जिससे दिल्ली से आगरा और कानपुर के बीच यात्रा के समय (Travel Time) में भारी कटौती होगी और ईंधन की भी बचत होगी।

इन 37 गांवों की जमीनों पर बनेगा अलीगढ़ रिंग रोड

केंद्रीय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा-3 के तहत जिन गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, उनमें गभाना और कोल तहसील के प्रमुख राजस्व क्षेत्र शामिल हैं। प्रभावित गांवों की आधिकारिक सूची इस प्रकार है:

पला सल्लू, कोरह रुस्तमपुर, कोइल, सांगौर, गिरधरपुर, खेडिया हैवत खां, कलुआ, दाउदपुर कोटा, सुम्मेरपुर, समस्तपुर कोटा, अमरौली, कस्तरी वैश्य, पला मजरा कस्तरी वैश्य, चन्दोखा, छेरत सुडियाल, साथा, खेरूपुरा, सपेरा भानपुर, किढ़ारा, जटपुरा, बरौठ, मोरथल, मोहनपुर, नयाबांस नरेन्द्रगढ़ी, आजमाबाद माछुआ, सिकन्दरपुर माछुआ, खान आलमपुर, इमलानी, मई, महमूदपुर जमालपुर, चंगेरी, भोजपुर, अलहदादपुर, पनैठी, अदौन, जलूपुर सिहोर, बरौठा और हरदुआगंज।

प्रभावित गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और बैनामे पर प्रशासन ने लगाई रोक

जैसे ही मंत्रालय के निदेशक शेख अमीन खान द्वारा भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की अधिसूचना जारी की गई, जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी अतुल गुप्ता ने बताया कि कोल और गभाना तहसील के सभी संबंधित एसडीएम, तहसीलदार, सब-रजिस्ट्रार और एआईजी स्टांप को सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब इन प्रभावित 37 गांवों में किसी भी प्रकार के भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU), जमीन की रजिस्ट्री, बैनामा, दाखिल-खारिज (नामांतरण), नया कॉलोनी डेवलपमेंट या जमीन को बैंक में बंधक रखने जैसी राजस्व गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में भू-राजस्व कार्य करने से पहले एनएचएआई (NHAI) की लिखित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा, ताकि मुआवजा वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सके और किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद से बचा जा सके।

 

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