खाड़ी देशों तक सीधी पहुंच के लिए भारत को मिला नया 'गेटवे', ये दोस्त निभाएगा खास रोल
भारत की सामरिक और आर्थिक कूटनीति के इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला नया मोड़ आ गया है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व के देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को हमेशा के लिए एक नई दिशा मिलने जा रही है। लंबे समय से फारस की खाड़ी के सामरिक रूप से संवेदनशील और तनावपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर भारत की निर्भरता और चिताएं अब कम होने जा रही हैं। भारत को खाड़ी देशों और सेंट्रल एशिया तक अबाध, सुरक्षित और सुगम पहुंच प्रदान करने के लिए एक बेहद शानदार और नया वैकल्पिक गलियारा मिल चुका है। इस मास्टरस्ट्रोक रणनीति के पीछे कौन सा देश और कौन सा विशेष प्रोजेक्ट है, जो भारत के लिए गेम-चेजर साबित होने जा रहा है, आइए इसके हर एक पहलू को गहराई से समझते हैं।
वैश्विक व्यापार और विशेष तौर पर भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य एक बेहद अहम समुद्री मार्ग रहा है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है, जिसके लिए जहाजों को इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरना पड़ता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय संघर्षों और सैन्य टकराव की वजह से इस मार्ग पर हमेशा एक अनिश्चितता और खतरे की तलवार लटकी रहती थी। जरा सी भी अशांति भारत की ऊर्जा आपूर्ति को ठप कर सकती थी। ऐसे में भारत को एक ऐसे सुरक्षित और निर्बाध 'गेटवे' की सख्त तलाश थी जो भू-राजनीतिक उथल-पुथल से पूरी तरह सुरक्षित हो और तेल तथा व्यापारिक माल की आवाजाही को बिना किसी बाधा के चालू रख सके।
भारत ने इस भौगोलिक और रणनीतिक चुनौती का एक बेहतरीन और अचूक तोड़ निकाल लिया है। अब भारत को मध्य पूर्व और पश्चिमी एशिया के बाजारों तक पहुंचने के लिए होर्मुज के चक्कर काटने की मजबूरी से मुक्ति मिलने जा रही है। हमारे एक परम मित्र और भरोसेमंद सहयोगी देश के साथ मिलकर एक ऐसा वैकल्पिक मार्ग विकसित किया जा रहा है जो बंदरगाहों और उन्नत रेल-सड़क नेटवर्क के जरिए सीधे खाड़ी देशों को जोड़ेगा। यह नया गेटवे न सिर्फ समुद्री जोखिमों को न्यूनतम कर देगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत और समय में भी भारी कमी लाएगा। कूटनीतिक गलियारों में इसे भारत की विदेश नीति की एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे रणनीतिक समीकरण में भारत के सदाबहार और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार ओमान और यूएई (UAE) के साथ-साथ पश्चिम एशिया का एक अन्य अहम मित्र देश मुख्य भूमिका निभा रहा है। भारत ने चाबहार बंदरगाह और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के अनुभवों से सीखते हुए इस नए मार्ग को अंतिम रूप दिया है। मध्य पूर्व के इस प्रमुख मित्र देश ने भारत के साथ मिलकर द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा गलियारे को जमीन पर उतारने का बीड़ा उठाया है। इस प्रोजेक्ट के तहत समुद्री मार्ग से आने वाले कार्गो को सीधे सुरक्षित स्थलीय मार्गों से होते हुए गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा, जिससे पाकिस्तान और होर्मुज दोनों की बाधाओं को पूरी तरह से बायपास किया जा सकेगा।
इस नए वैकल्पिक गेटवे के शुरू होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को अभेद्य सुरक्षा चक्र मिल जाएगा। जब कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) बिना किसी अड़चन के भारत पहुंचेंगे, तो देश में महंगाई और सप्लाई चेन के बाधित होने का खतरा नगण्य हो जाएगा। इसके अलावा, भारत के मैन्युफैक्चरर्स और निर्यातकों को मध्य पूर्व, यूरोप और मध्य एशिया के बाजारों तक अपने उत्पाद भेजने के लिए एक तेज और भरोसेमंद रास्ता मिल जाएगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत को ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन का एक प्रमुख हब बनाने में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे देश की आर्थिक विकास दर को भी जबरदस्त गति मिलेगी।