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50 साल पहले फ्लाइट में अखबार पढ़कर इंदिरा गांधी ने कैसे बचाई 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' की जान

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री दिवंगत इंदिरा गांधी से जुड़े वैसे तो कई ऐतिहासिक किस्से मशहूर हैं, लेकिन देश के वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा उनका एक ऐसा ही अनसुना और दिलचस्प वाकया अब सामने आया है। दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' (गोडावण पक्षी) को बचाने की इंदिरा गांधी की एक अनूठी पहल का जिक्र किया है। यह कहानी आज से ठीक 50 साल पुरानी है, जब एक हवाई सफर के दौरान अखबार में छपी महज एक तस्वीर ने इस विलुप्तप्राय पक्षी की किस्मत बदल दी थी।

हल्दीघाटी के कार्यक्रम में जाते समय फ्लाइट में देखी थी वह तस्वीर

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर 'हिंदुस्तान टाइम्स' अखबार की एक पुरानी रिपोर्ट साझा करते हुए जयराम रमेश ने इस पूरी घटना से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 21 जून 1976 को इंदिरा गांधी राजस्थान के वीर सपूत महाराणा प्रताप से जुड़े ऐतिहासिक 'हल्दीघाटी युद्ध' की 400वीं वर्षगांठ के एक भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लेने गई थीं। वहां एक विशाल जनसभा को संबोधित करने के बाद, जब वह सुबह की फ्लाइट से उदयपुर के लिए रवाना हुईं, तो विमान में उनकी नजर हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में छपी 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' की एक तस्वीर पर टिक गई। उस समय यह पक्षी विलुप्त होने की कगार (Critically Endangered) पर पहुंच चुका था।

उदयपुर पहुंचते ही उठाया बड़ा कदम, जैसलमेर में बना 'डेजर्ट नेशनल पार्क'

अखबार में उस संकटग्रस्त पक्षी की स्थिति पढ़ने के बाद इंदिरा गांधी इतनी विचलित हुईं कि उन्होंने उदयपुर हवाई अड्डे पर उतरते ही वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की एक आपात बैठक बुला ली। इस अहम मुलाकात में उस समय के राजस्थान वन्यजीव बोर्ड के सदस्य हर्षवर्धन भी मौजूद थे। इंदिरा गांधी ने तुरंत इस पक्षी के संरक्षण का ब्लूप्रिंट तैयार करवाया। इसी पहल का ऐतिहासिक नतीजा था कि बाद में राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में विशाल 'डेजर्ट नेशनल पार्क' (मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान) की स्थापना की गई, जो आज भी इन पक्षियों का सबसे बड़ा और सुरक्षित ठिकाना है।

मशहूर पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने की थी 'राष्ट्रीय पक्षी' बनाने की मांग

जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में इतिहास के एक और दिलचस्प पन्ने को पलटते हुए बताया कि साल 1961 में भारत के जाने-माने 'बर्डमैन' सलीम अली ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को भारत का 'राष्ट्रीय पक्षी' घोषित करने का मजबूत प्रस्ताव रखा था। हालांकि, उस समय मैसूर के तत्कालीन महाराजा जयचामराजेंद्र वाडियार के नेतृत्व वाले भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने इसके पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए 'मोर' को देश का राष्ट्रीय पक्षी चुन लिया था। जयराम रमेश ने लिखा कि आज भी गोडावण कई प्राकृतिक और इंसानी चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन 50 साल पहले इंदिरा गांधी की उस उड़ान ने जो उम्मीद जगाई थी, उसी के कारण यह पक्षी आज भी हमारे बीच सांस ले रहा है।

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