Zomato-Swiggy डिलीवरी पार्टनर और कैब ड्राइवर्स को बड़ा तोहफा: सरकार बनाएगी सोशल सिक्योरिटी बोर्ड, जानें मिलने वाले बड़े फायदे
त्योहारी सीजन के बीच देश के लाखों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। दिन-रात सड़कों पर धूप, बारिश और ठंड की परवाह किए बिना घर-घर खाना पहुंचाने वाले ज़ोमैटो (Zomato) व स्विगी (Swiggy) के डिलीवरी पार्टनर्स, ओला-उबर (Ola-Uber) जैसी कंपनियों के कैब ड्राइवर्स और क्विक-कॉमर्स (Blinkit, Zepto, Instamart) से जुड़े लाखों डिलीवरी एजेंट्स के लिए सरकार ने एक समर्पित 'सोशल सिक्योरिटी बोर्ड' (Social Security Board) स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। लंबे समय से असंगठित क्षेत्र की तरह बिना किसी सामाजिक सुरक्षा कवच के काम कर रहे इन ऑन-डिमांड कर्मचारियों को अब औपचारिक रूप से पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना कवर और आपातकालीन वित्तीय सहायता के दायरे में लाया जा रहा है।
गिग वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी बोर्ड क्या है और इसका गठन क्यों जरूरी था
देशभर में गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ी है, लेकिन इससे जुड़े कामगारों को औपचारिक कर्मचारियों की तरह भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या ईएसआई (ESI) जैसे कानूनी लाभ नहीं मिलते थे। सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) के अंतर्गत गठित होने वाला यह 'सोशल सिक्योरिटी वेलफेयर बोर्ड' सीधे तौर पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की निगरानी में काम करेगा। इस बोर्ड में केंद्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे स्विगी, ज़ोमैटो, जोमैटो, उबर, अर्बन कंपनी) के अधिकारी और खुद गिग कामगारों के चुने हुए प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका मुख्य काम इन प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कल्याणकारी नीतियां तैयार करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और कंपनियों द्वारा उनके कल्याण में योगदान की निगरानी करना है।
वेलफेयर सेस और फंडिंग मॉडल: कैसे तैयार होगा सुरक्षा फंड
गिग वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा कोष को बनाए रखने के लिए सरकार ने एक अनूठा वित्तीय ढांचा तैयार किया है। इसके तहत एग्रीगेटर कंपनियों को अपने कुल वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा अथवा गिग वर्कर को किए जाने वाले कुल भुगतान का एक निश्चित प्रतिशत (लगभग 5%) 'सोशल सिक्योरिटी फंड' में जमा करना अनिवार्य होगा। कई राज्यों में इसके लिए प्रति ट्रांजैक्शन या प्रति डिलीवरी एक न्यूनतम वेलफेयर सेस (कल्याण उपकर) का प्रावधान भी लागू किया जा रहा है। इस फंड से सरकार डिलीवरी बॉयज और कैब ड्राइवर्स के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का खर्च वहन करेगी, जिससे कंपनियों के मुनाफे का एक हिस्सा सीधे उन जमीनी कर्मचारियों की सुरक्षा में लगेगा जो दिन-रात काम करते हैं।
डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवर्स को मिलने वाले प्रमुख फायदे
इस बोर्ड के अस्तित्व में आने से जमीनी स्तर पर काम करने वाले लाखों युवाओं को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलने जा रहे हैं:
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मुफ्त दुर्घटना व जीवन बीमा: ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना की स्थिति में ₹2 लाख से लेकर ₹5 लाख तक का गारंटीड एक्सीडेंटल कवर और दिव्यांगता मुआवजा।
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स्वास्थ्य सुरक्षा व ओपीडी कवर: श्रमिक और उसके परिवार के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत) से सीधा जुड़ाव और सामान्य बीमारियों के इलाज की सहायता।
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मातृत्व व आपातकालीन लाभ: महिला डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सवेतन मातृत्व अवकाश (Maternity Benefit) और आपातकालीन वित्तीय अनुदान।
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पेंशन और भविष्य निधि का विकल्प: एक निश्चित अवधि तक काम करने वाले सक्रिय पार्टनर्स के लिए सूक्ष्म-पेंशन (Micro-Pension) और बचत योजना की शुरुआत।
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शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal): कंपनियों द्वारा बिना उचित कारण के अकाउंट सस्पेंड करने, आईडी ब्लॉक करने या इंसेंटिव में कटौती के मामलों की निष्पक्ष सुनवाई के लिए समर्पित लीगल सेल।
ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण और यूनिक वर्कर आईडी
इस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए सभी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को केंद्रीय ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल पर खुद को पंजीकृत करना होगा। सरकार इसके लिए विशेष शिविर और कंपनियों के हब पर रजिस्ट्रेशन ड्राइव चला रही है। पंजीकरण के बाद प्रत्येक डिलीवरी पार्टनर या ड्राइवर को एक 12-अंकों का 'यूनिक गिग वर्कर आईडी' (UAN) जारी किया जाएगा। यह आईडी पूरी तरह पोर्टेबल होगी, जिसका अर्थ यह है कि यदि कोई कर्मचारी आज ज़ोमैटो में काम कर रहा है और कल स्विगी, जेप्टो या किसी अन्य कंपनी में चला जाता है, तो भी उसका सुरक्षा रिकॉर्ड और संचित लाभ समाप्त नहीं होगा।
ऑनलाइन पंजीकरण की आसान और सुगम प्रक्रिया
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पात्र डिलीवरी एजेंट या कैब ड्राइवर को आधिकारिक ई-श्रम पोर्टल (eshram.gov.in) पर जाना होगा या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर संपर्क करना होगा।
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अपना आधार नंबर दर्ज करके मोबाइल ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी सत्यापन पूरा करना होगा।
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व्यवसाय श्रेणी में 'Gig and Platform Worker' का चयन करना होगा और जिस एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म (Zomato, Swiggy, Ola, Uber आदि) से जुड़े हैं, उसकी पार्टनर आईडी दर्ज करनी होगी।
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अपना सक्रिय बचत बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड भरें ताकि किसी भी लाभ का भुगतान सीधे खाते में (DBT द्वारा) हो सके।
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विवरण सबमिट करते ही आपका डिजिटल 'ई-श्रम गिग कार्ड' जनरेट हो जाएगा, जिसे डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रखा जा सकता है।
सरकार के इस कदम से न केवल त्योहारों के समय डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि देश के अनौपचारिक श्रम क्षेत्र को एक मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा तंत्र भी मिलेगा।