पंजाब के 50 म्युनिसिपल वार्डों में चुनाव रद्द, 6 हफ्ते के भीतर दोबारा मतदान कराने का सख्त आदेश
भारतीय न्यायपालिका ने स्थानीय चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पंजाब राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला और मोगा जिलों के कुल 50 म्युनिसिपल वार्डों में चुनाव को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने इन सभी वार्डों में छह हफ्ते के भीतर नए सिरे से निष्पक्ष मतदान कराने का सख्त आदेश दिया है। यह फैसला स्थानीय चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली, हिंसा और बाधा पहुंचाए जाने की शिकायतों के बाद आया है।
जांच आयोग की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
यह पूरा मामला 21 दिसंबर 2024 को हुए स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ा हुआ है। चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2025 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में एक-सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था।
इस आयोग ने लंबी जांच के बाद 18 नवंबर 2025 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए पाया कि चुनाव के दौरान नामांकन (Nomination) प्रक्रिया में खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, उम्मीदवारों के नामांकन पत्र जबरन छीने गए, उन्हें फाड़ा या नष्ट किया गया, कई उम्मीदवारों और उनके प्रस्तावक समर्थकों के साथ मारपीट की गई, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया तथा धमकाया गया।
पटियाला और मोगा के वार्डों में फिर से होगी वोटिंग
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी समीक्षा के बाद साफ किया कि जिन 50 वार्डों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गला घोंटा गया है, वहां दोबारा चुनाव कराना अनिवार्य है। इन 50 वार्डों में पटियाला जिले के 28 वार्ड और मोगा जिले के 22 वार्ड शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य सरकार को आयोग के सुझावों और दोबारा चुनाव कराने के निर्देश पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे दोबारा चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाईकोर्ट बार के कम से कम दो या तीन वरिष्ठ सदस्यों को 'ऑब्जर्वर' (पर्यवेक्षक) के रूप में नामित करें।
वीडियोग्राफी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़े सुरक्षा और निगरानी मानक तय किए हैं:
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नामांकन फॉर्म भरने, उनकी जांच करने, चुनाव चिन्ह आवंटित करने और मतदान की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
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वीडियोग्राफी के इन सभी डिजिटल रिकॉर्ड्स को पूरी तरह सुरक्षित रखकर मॉनिटरिंग कमेटी को सौंपा जाएगा।
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चुनाव शुरू होने से पहले पंजाब सरकार को ड्यूटी पर तैनात किए जाने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और डीएसपी रैंक तक के पुलिस अधिकारियों की वार्ड-वार सूची मॉनिटरिंग कमेटी को सौंपनी होगी।
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दोबारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर होने वाला समस्त खर्च और अधिकारियों का मानदेय पंजाब सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, साथ ही उन्हें जरूरी प्रशासनिक और सुरक्षा सहायता भी दी जाएगी।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव संपन्न होने के बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी, और यह प्रक्रिया तभी पूरी मानी जाएगी जब चीफ जस्टिस इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएंगे कि मतदान निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में संपन्न हुआ है।