त्योहारी सीजन में दिल्ली के बाजारों को तगड़ा झटका: 1 दिन में 2,000 करोड़ का व्यापार स्वाहा

त्योहारी सीजन में दिल्ली के बाजारों को तगड़ा झटका: 1 दिन में 2,000 करोड़ का व्यापार स्वाहा

देश की राजधानी दिल्ली में त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही जहां व्यापारियों को रिकॉर्ड बिक्री की उम्मीद थी, वहीं हालिया राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों ने पूरे बाजार पर पानी फेर दिया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के ताजा आकलन के अनुसार, दिल्ली में एक ही दिन के प्रदर्शन और भारी सुरक्षा बंदोबस्त के चलते राजधानी के कारोबारियों को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान झेलना पड़ा है। दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस, खान मार्केट से लेकर चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे एशिया के सबसे बड़े थोक बाजारों तक सन्नाटा पसर गया। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास आयोजित विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर पुलिस द्वारा की गई कड़ी बैरिकेडिंग, मार्गों के डायवर्जन और 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रहने से पूरी दिल्ली की रफ्तार थम गई। खरीदारों की आवाजाही पूरी तरह रुकने के कारण बाजारों में कारोबार घटकर सामान्य दिनों के मुकाबले महज 25 से 30 प्रतिशत पर सिमट गया, जिससे लगभग 15 लाख व्यापारियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

सीटीआई की सभी राजनीतिक दलों और संगठनों से अपील: दिवाली तक न करें कोई धरना-प्रदर्शन

व्यापारियों के इस भारी आर्थिक नुकसान को देखते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और छात्र यूनियनों से हाथ जोड़कर सार्वजनिक अपील की है। सीटीआई ने स्पष्ट कहा है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए त्योहारों का समय और व्यस्त कारोबारी बाजारों को चुनना कतई जायज नहीं है। संगठन ने मांग की है कि कम से कम दिवाली और छठ पर्व तक दिल्ली के किसी भी इलाके में ऐसा कोई धरना, चक्का जाम या प्रदर्शन न किया जाए जिससे आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां बाधित हों। व्यापारियों का कहना है कि सालभर वे इस त्योहारी तिमाही (अक्टूबर-नवंबर) का इंतजार करते हैं, क्योंकि पूरे साल की 40 प्रतिशत बिक्री इसी दौरान होती है। अगर ऐसे अहम मौके पर शहर को छावनी बना दिया जाएगा और ग्राहक बाजारों तक पहुंच ही नहीं पाएंगे, तो छोटे व मझोले व्यापारी पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।

मेट्रो स्टेशन बंद होने और ट्रैफिक जाम से टूटी रीढ़: ग्राहक घरों में कैद, कैंसिल हुईं बुकिंग्स

प्रदर्शन के दिन दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर लगे कड़े प्रतिबंधों ने स्थिति को और भयावह बना दिया। सुरक्षा कारणों से दिल्ली पुलिस की सिफारिश पर राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, मंडी हाउस और उद्योग भवन जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए थे। दिल्ली के बाजारों की जान एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद) से आने वाले लाखों खरीदार होते हैं, जो मुख्य रूप से मेट्रो पर निर्भर रहते हैं। जब मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद हुए और सड़कों पर घंटों लंबा जाम लगा, तो लोगों ने बाजारों का रुख करने के बजाय घरों में रहना बेहतर समझा। इसका सीधा असर न केवल कपड़ों, आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक्स और फुटवियर के खुदरा विक्रेताओं पर पड़ा, बल्कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर भी बुरी तरह पस्त हो गया। दिल्ली के मध्य और दक्षिणी इलाकों के होटलों, रेस्टोरेंट्स, कैफे, सिनेमा हॉल्स और बैंक्वेट्स में लगभग 60 से 70 प्रतिशत बुकिंग्स या तो कैंसिल कर दी गईं या टाल दी गईं। यहां तक कि स्थानीय पेट्रोल पंपों और ऑटो-टैक्सी चालकों की दैनिक आय में भी 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

चांदनी चौक, सदर बाजार और खान मार्केट में पसरा सन्नाटा: बाहर के व्यापारी भी नहीं पहुंच पाए

दिल्ली सिर्फ स्थानीय आबादी का ही बाजार नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक और थोक वितरण केंद्र है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, मेरठ, आगरा से लेकर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तक के लाखों थोक व्यापारी त्योहारों का माल उठाने के लिए प्रतिदिन दिल्ली के सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, करोल बाग और गांधी नगर पहुंचते हैं। विरोध-प्रदर्शन और सीमाओं पर कड़ी चेकिंग के डर से बाहरी राज्यों से आने वाले लगभग 3 से 4 लाख व्यापारी दिल्ली नहीं आ सके। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन और कनॉट प्लेस मार्केट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि एक दिन के इस बंद और दहशत के माहौल से अकेले खान मार्केट में प्रत्येक दुकान को 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक का सीधा नुकसान हुआ है। इसके अलावा फल, फूल, मिठाइयों और सब्जियों जैसे जल्दी खराब होने वाले जरूरी सामानों का कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को अपनी पूंजी डूबने का दोहरा झटका लगा।

व्यापारियों का प्रशासन को सुझाव: व्यावसायिक क्षेत्रों के बजाय रामलीला मैदान या बुराड़ी में हों प्रदर्शन

सीटीआई और दिल्ली के विभिन्न व्यापारी संगठनों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और उपराज्यपाल (LG) को पत्र लिखकर भविष्य के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। व्यापारियों का तर्क है कि जंतर-मंतर, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और संसद मार्ग जैसे क्षेत्र घनी आबादी वाले व्यावसायिक गलियारों के बिल्कुल बीच में स्थित हैं। जब भी यहां प्रदर्शन होता है, तो सुरक्षा कारणों से पूरे मध्य दिल्ली को सील करना पड़ता है। व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि किसी भी बड़े राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के लिए दिल्ली के बाहरी इलाकों जैसे बुराड़ी ग्राउंड या रामलीला मैदान को ही अधिकृत स्थल बनाया जाना चाहिए, ताकि मध्य दिल्ली के व्यापारिक हब और आम जनता की दिनचर्या अप्रभावित रहे। यदि राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर पुनर्विचार नहीं किया और त्योहारी सीजन में ऐसे ही बंद के हालात बनते रहे, तो दिल्ली के व्यापारियों के सामने दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन और बैंकों की ईएमआई चुकाने का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।