श्रीभूमि में विसर्जन के दौरान बिहू कलाकारों पर बर्बर हमला, 13 गिरफ्तार
असम के श्रीभूमि जिले से एक बेहद स्तब्ध करने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां दुर्गा पूजा की प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के दौरान असमिया लोक संस्कृति के संवाहक बिहू कलाकारों के एक दल पर भीड़ द्वारा हिंसक हमला कर दिया गया। इस अमानवीय घटना के सामने आते ही पूरे राज्य में सांस्कृतिक और सामाजिक हलकों में भारी आक्रोश फैल गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य प्रशासन तुरंत हरकत में आया और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 13 लोगों को दबोच लिया है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि यह जांच का शुरुआती चरण है और डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर अन्य उपद्रवियों की शिनाख्त की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
घटना के मूल विवरण के अनुसार, श्रीभूमि सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत शुक्रवार, 23 अक्टूबर की शाम को यह अप्रिय स्थिति उत्पन्न हुई। स्थानीय स्तर पर सक्रिय हिंदुस्तान क्लब द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के उपलक्ष्य में एक विशाल और भव्य जुलूस आयोजित किया गया था। इस धार्मिक और सामाजिक आयोजन में सांस्कृतिक विविधता और उत्सव का रंग भरने के लिए क्लब प्रबंधन ने पास के ही एक ग्रामीण इलाके से 11 सदस्यीय बिहू नृत्य दल को अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन करने हेतु सादर आमंत्रित किया था। जुलूस जब अपने चरम पर था, तभी किसी बात को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया और आरोप है कि क्लब से जुड़े कुछ उपद्रवी सदस्यों व स्थानीय युवकों ने अचानक बिहू कलाकारों को घेरकर उन पर लाठी-डंडों और घूंसों से हमला बोल दिया।
घायल कलाकारों की गंभीर स्थिति और पुलिस की कानूनी कार्रवाई
श्रीभूमि सदर थाने के प्रभारी अधिकारी तरंगा पटोवारी ने आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि की है कि इस सुनियोजित मारपीट में बिहू दल के सात कलाकार बुरी तरह घायल हुए हैं। डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई आपातकालीन चिकित्सकीय जांच में कलाकारों के शरीर पर गंभीर अंदरूनी और बाहरी चोटों के निशान पाए गए हैं। प्रहार इतना घातक था कि कुछ कलाकारों के चेहरे लहूलुहान हो गए और उनके दांत तक टूट गए। इस पारंपरिक दल में चार महिला कलाकार और सात पुरुष कलाकार शामिल थे, जो केवल अपनी कला और परंपरा की प्रस्तुति देने वहां पहुंचे थे।
हमले से व्यथित और सहमे हुए कलाकारों ने उपचार के उपरांत तुरंत श्रीभूमि सदर पुलिस थाने में जाकर आपबीती सुनाई और औपचारिक लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत और सख्त धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। दर्ज मामले में जानलेवा हमला करने, आपराधिक भय उत्पन्न करने, जान से मारने की धमकी देने तथा सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को जानबूझकर बिगाड़ने से जुड़ी धाराएं शामिल की गई हैं। पुलिस द्वारा शनिवार को गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों को जब स्थानीय अदालत में पेश किया गया, तो वहां से उन्हें जमानत प्राप्त हो गई। हालांकि पुलिस का स्पष्ट कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो क्लिपिंग की वैज्ञानिक जांच जारी है ताकि कोई भी मुख्य षड्यंत्रकारी कानून की पकड़ से बच न सके।
संस्कृति के अपमान पर AASU का भारी आक्रोश और सड़क पर उतरने की चेतावनी
इस हिंसक घटना की तस्वीरें और लहूलुहान कलाकारों के दर्दनाक वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुए, राज्यभर के नागरिकों और सामाजिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा। अखिल असम छात्र संघ (AASU) ने इस घटना पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इसे राज्य की अस्मिता पर सीधा हमला करार दिया है। संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर विशेष चिंता और रोष प्रकट किया कि उपद्रवियों ने न केवल कलाकारों के साथ अमानवीय व्यवहार किया, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान और स्वाभिमान के पावन प्रतीक पारंपरिक ढोल को भी जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया।
AASU के केंद्रीय अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने मुखर होते हुए कहा कि सूचना मिलते ही छात्र संघ की स्थानीय इकाइयों ने पीड़ित दल के सदस्यों से संपर्क साधा और बराक घाटी के विभिन्न जिलों में सक्रिय उनके प्रतिनिधि लगातार कलाकारों के साथ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को ऐसी उदाहरणात्मक सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बने। उत्पल शर्मा ने ऐलान किया कि संगठन सोमवार को श्रीभूमि के जिला आयुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपेगा और दोषियों की पुनर्ग गिरफ्तारी तथा उन पर कठोर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए लोकतांत्रिक प्रदर्शन करेगा। वहीं छात्र संघ के मुख्य सलाहकार डॉ. समुज्जल भट्टाचार्य ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी सख्त प्रतिक्रिया देते हुए इसे समूचे असम के लिए शर्मसार करने वाली घटना बताया और पुलिस तंत्र से किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने की अपील की।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कड़े तेवर और पुलिस महानिदेशक की सक्रियता
मामले की गूंज राजधानी दिसपुर तक पहुंचते ही असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताते हुए प्रशासनिक स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप किया। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि बिहू केवल एक लोकनृत्य नहीं है, बल्कि यह असम की आत्मा, जन-जन का गौरव और हमारी सदियों पुरानी विशिष्ट पहचान है। राज्य की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और विरासत का किसी भी मंच पर अपमान किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने तुरंत राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) हरमीत सिंह को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने और बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के उपद्रवियों पर कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के सीधे आदेश के बाद असम पुलिस के डीजीपी हरमीत सिंह ने तत्काल बयान जारी कर बताया कि श्रीभूमि जिला पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। श्रीभूमि सदर थाने में केस दर्ज कर 13 प्राथमिक आरोपियों को पकड़ा जा चुका है और मामले के अन्य पहलुओं की गहराई से छानबीन की जा रही है। डीजीपी ने आश्वासन दिया कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले और सांस्कृतिक सौहार्द को तार-तार करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में यह तथ्य भी प्रमुखता से सामने आया है कि वारदात के वक्त पकड़े गए अधिकांश उपद्रवी अत्यधिक शराब के नशे में धुत थे। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सभी का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें अल्कोहल के अंश की पुष्टि हुई है।
बराक घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल और आयोजकों की जवाबदेही
बराक घाटी के विभिन्न नागरिक समाज, सांस्कृतिक संगठनों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने भी इस बर्बर घटना की एक सुर में घोर भर्त्सना की है। स्थानीय संगठनों का मानना है कि दुर्गा पूजा जैसे महापर्व के दौरान इतने बड़े सार्वजनिक जुलूस में कलाकारों की सुरक्षा के न्यूनतम और पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। आयोजक हिंदुस्तान क्लब की प्रशासनिक विफलता और लापरवाही को लेकर भी भारी नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि बाहर से बुलाए गए मेहमान कलाकारों को सुरक्षा का बुनियादी घेरा तक मुहैया नहीं कराया गया था।
नागरिक संगठनों ने मांग उठाई है कि प्रशासन को भीड़ प्रबंधन और विसर्जन शोभायात्राओं के लिए और अधिक सख्त नियमावली तैयार करनी चाहिए ताकि नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों के कारण भविष्य में इस प्रकार की लज्जाजनक घटनाएं दोबारा न घटें। फिलहाल श्रीभूमि जिले में स्थिति नियंत्रण में है, परंतु कलाकारों के साथ हुई इस बर्बरता ने असम के सामाजिक ताने-बाने और सांस्कृतिक सुरक्षा को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है, जिस पर शासन और समाज दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।