सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भी नहीं जाएगी नागरिकता, सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता रहेगा
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि आयोग का काम सिर्फ मतदाता सूची का नियंत्रण और पर्यवेक्षण करना है। अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है।
कल्याणकारी योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
अदालत ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाए गए लोगों को PDS और अन्नपूर्णा जैसी जरूरी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। कोर्ट ने साफ किया कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष सारांश संशोधन (SIR) के बाद भी लोग सब्सिडी वाले राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं के हकदार बने रहेंगे।
ट्रिब्यूनल के कामकाज पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सामने आया कि 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों के काम करने के तरीके से व्यावहारिक स्तर पर देरी और असंगतियां हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई ट्रिब्यूनल किसी का नाम सूची में शामिल न करने का फैसला देता है, तो चुनाव आयोग को नागरिकता निर्धारण का मामला संबंधित मंत्रालय को भेजना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 25 अगस्त को होगी।