5 घंटे की पैरोल: मां के निधन पर फूट-फूटकर रोए चिन्मय दास, अंतिम संस्कार के लिए मिली मोहलत; आखिरी पलों में नहीं हो सकी मुलाकात

5 घंटे की पैरोल: मां के निधन पर फूट-फूटकर रोए चिन्मय दास, अंतिम संस्कार के लिए मिली मोहलत; आखिरी पलों में नहीं हो सकी मुलाकात

जेल की चारदीवारी में बंद चिन्मय दास पर उस वक्त गम का पहाड़ टूट पड़ा जब उन्हें अपनी मां के अचानक निधन की मनहूस खबर मिली। लंबे समय से कानूनी मामलों और न्यायिक हिरासत का सामना कर रहे चिन्मय दास को अदालत ने मानवीय आधार पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मात्र 5 घंटे की आपातकालीन पैरोल (Custody Parole) मंजूर की।

अदालत से मिली इस चंद घंटों की मोहलत के तहत जब उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्मशान घाट लाया गया, तो अपनी मां के पार्थिव शरीर को देखकर वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और फूट-फूटकर रो पड़े। सबसे बड़ा मलाल इस बात का रहा कि वे अपनी मां के आखिरी पलों में उनके पास मौजूद नहीं थे और न ही उनसे कोई अंतिम संवाद कर सके।

भारी पुलिस पहरे के बीच पहुंचे श्मशान घाट: भावुक कर देने वाला मंजर

जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की सख्त निगरानी में चिन्मय दास को पुलिस वैन के जरिए सीधे अंतिम संस्कार स्थल पर लाया गया:

  • सख्त कानूनी शर्तें: कोर्ट ने पैरोल देते समय स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यह पैरोल पुलिस कस्टडी में होगी। चिन्मय दास को किसी भी बाहरी व्यक्ति, मीडिया या मामले से जुड़े किसी गवाह से बातचीत करने की इजाजत नहीं दी गई।

  • भावुक क्षण: जैसे ही पुलिसकर्मियों के घेरे में चिन्मय दास ने मां के पार्थिव शरीर के आगे माथा टेका, वहां मौजूद परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी अपनी आंखें नम होने से नहीं रोक सके। मां के चरणों को स्पर्श करते हुए चिन्मय दास काफी देर तक रोते रहे और वहां खड़े सुरक्षाकर्मी भी इस दृश्य से असहज नजर आए।

  • अंतिम संस्कार की रस्में: पारिवारिक परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार उन्होंने मुखाग्नि और अंतिम विदाई की आवश्यक रस्में पूरी कीं। इस दौरान हर पल पुलिस का कड़ा सुरक्षा पहरा उनके चारों तरफ तैनात रहा।

आखिरी बार नहीं कर सके मुलाकात: बीमारी के दौरान भी नहीं मिली थी राहत

परिजनों के अनुसार, चिन्मय दास की मां पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। बेटे के जेल में होने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।

  • मिलने की अधूरी ख्वाहिश: परिजनों ने बताया कि मां अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बार-बार अपने बेटे से मिलने की गुहार लगा रही थीं। परिवार की ओर से पहले भी मानवीय आधार पर जमानत या अंतरिम राहत की याचिकाएं लगाई गई थीं, लेकिन कानूनी पेचीदगियों के चलते उन्हें पहले रिहाई नहीं मिल सकी थी।

  • मौत से पहले नहीं हुआ दीदार: अंततः जब तक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हुईं और पैरोल का आदेश जारी हुआ, तब तक मां ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। इस बात का गहरा अफसोस चिन्मय दास और उनके पूरे परिवार के चेहरों पर साफ झलकता दिखा।

समय सीमा समाप्त होते ही दोबारा जेल भेजा गया

अंतिम संस्कार की प्राथमिक प्रक्रियाएं पूरी होते ही 5 घंटे की निर्धारित समय सीमा समाप्त हो गई:

  • पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए चिन्मय दास को तुरंत वापस हिरासत में लिया।

  • किसी भी प्रकार की देरी किए बिना उन्हें उसी सुरक्षा काफिले के साथ वापस जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।

  • स्थानीय वकीलों के अनुसार, अंतिम संस्कार के बाद होने वाली त्रयोदशी या श्राद्ध कर्म की रस्मों के लिए परिवार आगे फिर से सक्षम अदालत में कुछ दिनों की नियमित अंतरिम जमानत (Interim Bail) के लिए नई अर्जी दाखिल करने की तैयारी कर रहा है।