Mythological Story : देवताओं को भी कंपा देने वाला महिषासुर कौन था? जानिए उसके जन्म की वो अनोखी कहानी जो आपको हैरान कर देगी

Post

News India Live, Digital Desk:  Mythological Story : जब भी नवरात्रि का त्यौहार आता है, तो माँ दुर्गा के जयकारों के साथ एक नाम और गूंजता है - महिषासुर। हम सबने माँ दुर्गा द्वारा उसके संहार की तस्वीरें देखी हैं और कथाएँ सुनी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शक्तिशाली और क्रूर असुर आखिर था कौन और उसका जन्म कैसे हुआ था? उसकी पैदाइश की कहानी उतनी ही अजीब और दिलचस्प है, जितनी उसकी ताकत।

एक असुर और एक भैंस की प्रेम कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुरों के राजा रंभ को कोई संतान नहीं थी। वह एक ऐसा पुत्र चाहता था जो तीनों लोकों पर राज करे और जिसे कोई पराजित न कर सके। अपनी इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उसने कठोर तपस्या शुरू की। सालों की तपस्या के बाद, देवताओं ने उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा।

रंभ ने एक ऐसे शक्तिशाली पुत्र का वरदान माँगा, जिसे कोई भी देवता, दानव या मनुष्य न मार सके। उसे यह वरदान तो मिला, लेकिन साथ में यह शर्त भी थी कि उसका पुत्र उसी स्त्री से उत्पन्न होगा, जिससे वह प्रेम करेगा, चाहे वह किसी भी रूप में हो।

वरदान पाकर रंभ अपनी इच्छा के अनुसार साथी की तलाश में निकल पड़ा। घूमते-घूमते वह एक खूबसूरत जंगल में पहुँचा जहाँ उसने एक सुंदर और आकर्षक भैंस (महिषी) को देखा। रंभ पहली ही नज़र में उस भैंस पर मोहित हो गया। वह भूल गया कि वह एक जानवर है और उसने उससे विवाह कर लिया।

ऐसे हुआ महिषासुर का जन्म

दरअसल, वह भैंस कोई साधारण जानवर नहीं थी। वह एक राजकुमारी थी जिसे एक ऋषि ने श्राप देकर भैंस बना दिया था। रंभ और उस महिषी के मिलन से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका शरीर तो इंसान का था, लेकिन सिर एक भैंस का। इसी अनोखे रूप के कारण उसका नाम पड़ा महिषासुर (महिष का अर्थ है भैंस और असुर मतलब दानव)।

जन्म से ही वह बेहद शक्तिशाली था और अपनी इच्छानुसार कभी इंसान तो कभी भैंस का रूप धारण कर सकता था।

ब्रह्मा जी का वो वरदान जो बना उसके अंत का कारण

पिता की तरह महिषासुर भी बड़ा होकर अत्यंत महत्वाकांक्षी निकला। उसने अमर होने के लिए सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। ब्रह्मा जी जब प्रसन्न होकर प्रकट हुए तो महिषासुर ने अमरता का वरदान माँगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है, इसलिए यह वरदान संभव नहीं है।

तब महिषासुर ने चालाकी से सोचा कि एक स्त्री भला उसे क्या मार पाएगी, वह तो अबला होती है। उसने दूसरा वरदान माँगा, "ठीक है प्रभु, तो मुझे यह वरदान दीजिए कि मेरी मृत्यु किसी भी देव, दानव या पुरुष के हाथों न हो। मेरी मृत्यु सिर्फ और सिर्फ एक स्त्री के हाथों ही हो।"

ब्रह्मा जी ने "तथास्तु" कह दिया। यह वरदान पाते ही महिषासुर अजेय हो गया। उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर इंद्र देव को पराजित कर दिया और सभी देवताओं को वहाँ से भगा दिया। उसके अत्याचार से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। तब सभी देवता मिलकर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के पास पहुँचे और इस संकट से उबारने की प्रार्थना की। चूँकि कोई भी पुरुष देवता उसे मार नहीं सकता था, इसलिए सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों को मिलाकर एक दिव्य नारी शक्ति को जन्म दिया, जिन्हें हम माँ दुर्गा के नाम से जानते हैं। आगे की कहानी हम सब जानते हैं, कि कैसे माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया।