Muslim Leader : मुझे मुस्लिम नेता क्यों कहा? दिल्ली ब्लास्ट पर सवाल पूछते ही पत्रकार पर भड़के सलमान खुर्शीद

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News India Live, Digital Desk: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, जो आमतौर पर अपने शांत और सधे हुए अंदाज के लिए जाने जाते हैं, हाल ही में मीडिया पर जमकर भड़क गए. उनका गुस्सा एक पत्रकार के सवाल पूछने के तरीके को लेकर था, जिसमें उन्हें 'मुस्लिम नेता' कहकर संबोधित किया गया था. यह घटना उस वक्त हुई जब उनसे दिल्ली में हुए हालिया बम धमाके को लेकर प्रतिक्रिया मांगी जा रही थी.

क्या था वो सवाल जिसने सलमान खुर्शीद को गुस्सा दिलाया?

दरअसल, पत्रकार दिल्ली में हुए बम धमाके पर सलमान खुर्शीद की राय जानना चाहते थे. इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया, "एक मुस्लिम नेता होने के नाते आप दिल्ली ब्लास्ट को कैसे देखते हैं?" बस, 'मुस्लिम नेता' शब्द सुनते ही सलमान खुर्शीद अपना आपा खो बैठे और उन्होंने पत्रकार को आड़े हाथों ले लिया.

"क्या मैं देश का नेता नहीं हूँ?" - खुर्शीद का पलटवार

सलमान खुर्शीद ने सवाल पूछने वाले पत्रकार पर पलटवार करते हुए कहा, "आप मुझे मुस्लिम नेता क्यों कह रहे हैं? क्या मैं देश का नेता नहीं हूँ? क्या मैं सिर्फ मुसलमानों का नेता हूँ?" उन्होंने पत्रकार से उल्टा सवाल पूछते हुए कहा, "क्या आप बीजेपी से हैं? या आरएसएस से हैं? आप लोग यही तो करते हैं, बांटने का काम."

खुर्शीद ने जोर देकर कहा, "मैं कांग्रेस पार्टी का नेता हूँ, इस देश का नेता हूँ. आप मुझसे एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर सवाल पूछिए, मैं जवाब दूंगा. लेकिन अगर आप मुझे एक मुस्लिम नेता कहकर पूछेंगे, तो मैं जवाब नहीं दूंगा."

सलमान खुर्शीद इस बात से बेहद नाराज थे कि किसी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर उनकी राय एक भारतीय नागरिक या एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर मांगी जा रही थी.

बाद में धमाके पर दी अपनी प्रतिक्रिया

हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एक राष्ट्रीय नेता के रूप में इस सवाल का जवाब जरूर देंगे. दिल्ली धमाके पर उन्होंने कहा, "यह एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मामला है. सरकार इसकी जांच कर रही है और हमें जांच एजेंसी को अपना काम करने देना चाहिए. यह राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके बाद ही कुछ कहना उचित होगा."

इस पूरी घटना ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या किसी नेता से उसकी धार्मिक पहचान को आधार बनाकर सवाल पूछना सही है.